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वर्ण कूट विचार

वर्ण मिलान तालिका और नियम

द्विजा झषालिकर्कटास्ततो नृपा विशोऽ‌ङ्घ्रिजाः ।
वरस्य वर्णतोऽधिका वधूर्न शस्यते बुधैः ।।२२।।

मुख्य बातें:
  • वर्ण कूट का 1 गुण होता है।
  • परंपरानुसार वर का वर्ण वधू के वर्ण के समान या उससे उच्च होना चाहिए।
  • वर की राशि के स्वामी का वर्ण उच्च होने पर वर्ण दोष नष्ट हो सकता है।

मीन, वृश्चिक और कर्क ब्राह्मण वर्ण; मेष, सिंह और धनु क्षत्रिय वर्ण; वृषभ, कन्या और मकर वैश्य वर्ण; तथा मिथुन, कुंभ और तुला शूद्र वर्ण माने गए हैं। शास्त्रों के अनुसार वधू का वर्ण वर से ऊँचा होना शुभ नहीं है।

वर्ण विभाजन

वर्णब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्र
राशियाँकर्क, वृश्चिक, मीनमेष, सिंह, धनुवृषभ, कन्या, मकरमिथुन, तुला, कुंभ

वर्ण कूट गुण तालिका

वधू \ वरब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्र
ब्राह्मण1000
क्षत्रिय1100
वैश्य1110
शूद्र1111

वर्ण दोष के संबंध में एक शास्त्रीय श्लोक कहता है:

वर्णश्रेष्ठा तु या नारी हीन वर्णस्तु यः पुमान् ।
विवाहं यदि कुर्वीत तस्या भर्ता न जीवति ।।

वर की चंद्र राशि का वर्ण वधू से निम्न हो, फिर भी यदि वर की राशि का स्वामी वधू की राशि के स्वामी से उच्च वर्ण का हो, तो परंपरानुसार यह दोष नष्ट माना जाता है।

ग्रहों के वर्ण

  • सूर्य और मंगल: क्षत्रिय
  • गुरु और शुक्र: ब्राह्मण
  • चंद्रमा: वैश्य
  • बुध और शनि: शूद्र

विषय-सूची


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