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मासिक विशेष योग और मुहूर्त दोष कैलेंडर

मासिक विशेष योग और मुहूर्त दोष कैलेंडर

वैदिक मुहूर्त में उपयोग किए जाने वाले सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु पुष्य, रवि पुष्य, रवि योग, भौमाश्विनी, द्विपुष्कर, त्रिपुष्कर योगों के साथ लत्ता, कूहू, दग्ध, क्रकच, खचर और यमघंटक जैसे मुहूर्त दोषों की मासिक तिथियां यहां देखें। शुभ योग अनुकूल कार्यों को बल देते हैं, जबकि दोष महत्वपूर्ण कार्यों में सावधानी का संकेत देते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु (Key Takeaways)

  • मूल सिद्धांत: ये योग और दोष विशेष वार, नक्षत्र, तिथि, ग्रहों के नक्षत्र स्थान या सूर्य-चंद्र नक्षत्र संबंध से बनते हैं।
  • महत्वपूर्ण सूचना: शुभ योग शुभता बढ़ा सकते हैं, जबकि दग्ध, कूहू, क्रकच और लत्ता जैसे दोष सावधानी के काल माने जाते हैं। फिर भी पूर्ण मुहूर्त परीक्षण आवश्यक है।
  • उपयोग: गुरु पुष्य, रवि पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग उचित आध्यात्मिक, आर्थिक और शुभ प्रारंभों के लिए उपयोगी माने जाते हैं। भौमाश्विनी योग देवी उपासना और स्वास्थ्य उपायों से जुड़ा है। दग्ध, यमघंटक, क्रकच, खचर, कूहू और लत्ता काल मुहूर्त चयन में चेतावनी संकेत हैं।
  • गणना आधार: ये समय सटीक खगोलीय गणना और लाहिड़ी अयनांश के आधार पर निकाले जाते हैं।

विशेष योग और दोष खोजक

अपने शहर के अनुसार विशेष योग और मुहूर्त दोषों का समय जानने के लिए महीना, वर्ष और स्थान चुनें।

विशेष योग एवं दोष कैलेंडर - 11/2026

तिथि, दिन शुभ योग विवरण योग का समय
01-11-2026
रविवार
रवि पुष्य योग
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:05 AM - 06:00 PM
02-11-2026
सोमवार
यमघंटक योग
07:06 AM - 05:16 PM
02-11-2026
सोमवार
बुध लत्ता दोष
शुक्र लत्ता दोष
05:16 PM - 07:08 AM
03-11-2026
मंगलवार
क्रकच योग
07:08 AM - 12:33 AM
03-11-2026
मंगलवार
शुक्र लत्ता दोष
07:08 AM - 04:56 PM
03-11-2026
मंगलवार
मंगल लत्ता दोष
04:56 PM - 07:09 AM
03-11-2026
मंगलवार
मृत्यु योग
12:33 AM - 07:09 AM
04-11-2026
बुधवार
मंगल लत्ता दोष
07:09 AM - 05:00 PM
04-11-2026
बुधवार
यमघंटक योग
05:00 PM - 07:10 AM
07-11-2026
शनिवार
गुरु लत्ता दोष
राहु लत्ता दोष
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:22 PM - 07:13 AM
07-11-2026
शनिवार
मृत्यु योग
12:58 AM - 07:13 AM
08-11-2026
रविवार
गुरु लत्ता दोष
राहु लत्ता दोष
07:13 AM - 08:54 PM
08-11-2026
रविवार
कुहू योग
12:26 AM - 02:02 AM
08-11-2026
रविवार
त्रिपुष्कर योग
मृत्यु योग
02:02 AM - 07:14 AM
09-11-2026
सोमवार
सर्वार्थ सिद्धि योग
10:49 PM - 07:16 AM
09-11-2026
सोमवार
मृत्यु योग
03:30 AM - 07:16 AM
10-11-2026
मंगलवार
यमघंटक योग
07:16 AM - 01:08 AM
10-11-2026
मंगलवार
खचर योग
01:08 AM - 07:17 AM
11-11-2026
बुधवार
खचर योग
दग्ध योग
मृत्यु योग
पूरे दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)
11-11-2026
बुधवार
रवि योग
03:49 AM - 07:18 AM
12-11-2026
गुरुवार
खचर योग
पूरे दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)
12-11-2026
गुरुवार
यमघंटक योग
रवि योग
07:18 AM - 06:47 AM
12-11-2026
गुरुवार
मृत्यु योग
07:39 AM - 07:19 AM
13-11-2026
शुक्रवार
खचर योग
पूरे दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)
14-11-2026
शनिवार
खचर योग
07:20 AM - 09:54 AM
14-11-2026
शनिवार
मृत्यु योग
07:20 AM - 12:54 PM
14-11-2026
शनिवार
रवि योग
09:54 AM - 07:21 AM
14-11-2026
शनिवार
क्रकच योग
त्रिपुष्कर योग
12:54 PM - 07:21 AM
15-11-2026
रविवार
त्रिपुष्कर योग
रवि योग
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:21 AM - 12:59 PM
15-11-2026
रविवार
मृत्यु योग
07:21 AM - 03:31 PM
16-11-2026
सोमवार
मृत्यु योग
07:23 AM - 05:50 PM
16-11-2026
सोमवार
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:23 AM - 03:47 PM
17-11-2026
मंगलवार
खचर योग
रवि योग
06:04 PM - 07:25 AM
18-11-2026
बुधवार
क्रकच योग
07:25 AM - 08:36 PM
18-11-2026
बुधवार
खचर योग
07:25 AM - 07:40 PM
18-11-2026
बुधवार
रवि योग
पूरे दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)
19-11-2026
गुरुवार
रवि योग
07:26 AM - 08:26 PM
20-11-2026
शुक्रवार
रवि योग
07:27 AM - 08:20 PM
20-11-2026
शुक्रवार
मृत्यु योग
08:02 PM - 07:28 AM
20-11-2026
शुक्रवार
अमृत सिद्धि योग
सर्वार्थ सिद्धि योग
08:20 PM - 07:28 AM
21-11-2026
शनिवार
सूर्य लत्ता दोष
07:25 PM - 07:29 AM
22-11-2026
रविवार
सर्वार्थ सिद्धि योग
सूर्य लत्ता दोष
07:29 AM - 05:45 PM
22-11-2026
रविवार
रवि योग
05:45 PM - 07:31 AM
23-11-2026
सोमवार
रवि योग
07:31 AM - 03:32 PM
23-11-2026
सोमवार
पूर्णिमा चंद्र लत्ता दोष
01:12 PM - 07:32 AM
24-11-2026
मंगलवार
पूर्णिमा चंद्र लत्ता दोष
07:32 AM - 09:53 AM
24-11-2026
मंगलवार
यमघंटक योग
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:32 AM - 12:55 PM
24-11-2026
मंगलवार
त्रिपुष्कर योग
09:53 AM - 12:55 PM
24-11-2026
मंगलवार
मृत्यु योग
09:53 AM - 06:20 AM
25-11-2026
बुधवार
विष योग
07:33 AM - 02:45 AM
25-11-2026
बुधवार
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:33 AM - 07:17 AM
25-11-2026
बुधवार
यमघंटक योग
10:06 AM - 07:17 AM
25-11-2026
बुधवार
दग्ध योग
मृत्यु योग
02:45 AM - 07:34 AM
25-11-2026
बुधवार
शनि लत्ता दोष
07:17 AM - 07:34 AM
26-11-2026
गुरुवार
शनि लत्ता दोष
07:34 AM - 04:38 AM
26-11-2026
गुरुवार
मृत्यु योग
11:19 PM - 07:35 AM
26-11-2026
गुरुवार
सर्वार्थ सिद्धि योग
04:38 AM - 07:35 AM
27-11-2026
शुक्रवार
सर्वार्थ सिद्धि योग
07:35 AM - 02:20 AM
28-11-2026
शनिवार
मृत्यु योग
07:36 AM - 05:27 PM
28-11-2026
शनिवार
क्रकच योग
05:27 PM - 07:37 AM
28-11-2026
शनिवार
रवि योग
12:29 AM - 07:37 AM
29-11-2026
रविवार
मृत्यु योग
07:37 AM - 03:17 PM
29-11-2026
रविवार
रवि योग
07:37 AM - 11:12 PM
29-11-2026
रविवार
बुध लत्ता दोष
यमघंटक योग
शुक्र लत्ता दोष
11:12 PM - 07:38 AM
30-11-2026
सोमवार
बुध लत्ता दोष
शुक्र लत्ता दोष
07:38 AM - 10:30 PM
30-11-2026
सोमवार
मृत्यु योग
07:38 AM - 01:42 PM

सिद्धि, पुष्य, पुष्कर योगों और मुहूर्त दोषों का महत्व

वैदिक मुहूर्त में वार, नक्षत्र, तिथि, ग्रहों के नक्षत्र स्थान और सूर्य-चंद्र नक्षत्र संबंध के आधार पर यह देखा जाता है कि कोई समय कार्य को समर्थन देता है या बाधा पैदा करता है। सिद्धि, पुष्य और पुष्कर योग उचित कार्यों को बल देते हैं, जबकि दग्ध, कूहू, क्रकच, खचर, यमघंटक और लत्ता जैसे दोष महत्वपूर्ण शुभ कार्यों में सावधानी या वर्जन का संकेत देते हैं। फिर भी तिथि, नक्षत्र, लग्न, ताराबल, चंद्रबल, पंचक, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य, अस्त ग्रह और कार्य-विशेष नियमों की जांच आवश्यक है।

  • गुरु पुष्य योग: जब गुरुवार को पुष्य नक्षत्र होता है। यह शिक्षा, आध्यात्मिक साधना, निवेश, सोना या मूल्यवान वस्तुओं की खरीद, संपत्ति संबंधी योजना, नए कार्य और महत्वपूर्ण समझौतों के लिए शुभ माना जाता है।
  • रवि पुष्य योग: जब रविवार को पुष्य नक्षत्र होता है। यह मूल्यवान वस्तुओं की खरीद, समृद्धि से जुड़े कार्य, व्यापारिक योजना, भक्ति कार्य और स्थिरता देने वाले कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
  • अमृत सिद्धि योग: वार और नक्षत्र की विशेष जोड़ी से बनने वाला शुभ योग। यह दीर्घकालिक शुभ परिणाम, कार्यों की सुगमता और रचनात्मक कार्यों की पूर्णता में सहायक माना जाता है।
  • भौमाश्विनी योग: मंगलवार को अश्विनी नक्षत्र होने पर यह योग बनता है। यह विशेष रूप से देवी उपासना और स्वास्थ्य संबंधी उपायों के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन देवी के समक्ष श्री देव्यथर्वशीर्षम् का पाठ करने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से राहत, स्वास्थ्य बल और देवी माता की कृपा प्राप्त होने की परंपरागत मान्यता है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: ‘सर्वार्थ’ का अर्थ है सभी उद्देश्यों की सिद्धि। यह वार-नक्षत्र संयोजन से बनने वाला शुभ योग है, जिसे महत्वपूर्ण कार्यों, व्यापार, शिक्षा, यात्रा और रचनात्मक प्रयासों के लिए उपयोगी माना जाता है।
  • रवि योग: जब चंद्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से कुछ विशेष अनुकूल दूरियों पर होता है, तब यह योग बनता है। यह छोटे दोषों को कम करने और दैनिक कार्यों में सफलता देने वाला माना जाता है।
  • द्विपुष्कर योग: विशेष वार, तिथि और नक्षत्र के संयोग से बनता है। इस योग में किए गए कार्यों के फल दो बार दोहरने या बढ़ने की मान्यता है। इसलिए बचत, निवेश, खरीद और शुभ प्रारंभ के लिए इसे अनुकूल माना जाता है। ऋण, विवाद और हानि से जुड़े कार्यों से बचना चाहिए।
  • त्रिपुष्कर योग: विशेष वार, तिथि और नक्षत्र के संयोग से बनने वाला अधिक शक्तिशाली पुष्कर योग। इसमें किए गए कार्यों के फल तीन गुना बढ़ने की मान्यता है। यह शुभ खरीद, निवेश और वृद्धि से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल है, परंतु हानि, रोग, विवाद या ऋण से जुड़े कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • लत्ता दोष: ग्रह द्वारा चंद्र नक्षत्र को पीड़ित करने वाली स्थिति को लत्ता कहा जाता है। सूर्य अपने स्थान से 12वें नक्षत्र को, मंगल 3वें को, गुरु 6वें को, शनि 8वें को, बुध 22वें को, राहु 20वें को, शुक्र 24वें को और पूर्णिमा चंद्रमा 7वें नक्षत्र को पीड़ित करता है। यदि कार्य का नक्षत्र इस प्रकार पीड़ित हो तो महत्वपूर्ण शुभ कार्यों में सावधानी रखनी चाहिए।
  • कूहू योग: अमावस्या के अंतिम चार घटी, लगभग 96 मिनट, विषघटी माने जाते हैं। इस समय जन्म होने पर कूहू शांति की परंपरा बताई गई है। शुभ प्रारंभों के लिए यह समय उपयुक्त नहीं माना जाता।
  • यमघंटक योग: यह अशुभ वार-नक्षत्र संयोजन है। महत्वपूर्ण शुभ कार्य, यात्राएं, संस्कार और बड़े आरंभ इस समय सामान्यतः टाले जाते हैं, क्योंकि इससे कार्य में बाधा या मानसिक अशांति हो सकती है।
  • दग्ध योग: रविवार-द्वादशी, सोमवार-एकादशी, मंगलवार-पंचमी, बुधवार-तृतीया, गुरुवार-षष्ठी, शुक्रवार-अष्टमी और शनिवार-नवमी से दग्ध योग बनता है। इसे जला हुआ काल मानकर शुभ कर्मों में वर्जित माना जाता है।
  • क्रकच योग: तिथि संख्या और वार संख्या का योग 13 होने पर क्रकच योग बनता है। मुहूर्त ग्रंथों में इसे शुभ कार्यों के लिए निंद्य कहा गया है, इसलिए महत्वपूर्ण आरंभों में इससे बचना चाहिए।
  • खचर योग: सूर्य के नक्षत्र से चंद्रमा के नक्षत्र तक गिनने पर यदि संख्या 3, 4, 5 या 9 हो तो खचर योग बनता है। विवाह और सीमंत जैसे कार्यों में इसे वर्जित माना गया है।
  • विष योग: रविवार को चतुर्थी, सोमवार को षष्ठी, मंगलवार को सप्तमी, बुधवार को द्वितीया, गुरुवार को अष्टमी, शुक्रवार को नवमी या शनिवार को सप्तमी होने पर बनता है। नाम के अनुसार इसे विषैले या हानिकारक प्रभाव का सूचक माना जाता है; विवाह, गृहप्रवेश और अन्य शुभ कार्यों में इससे बचना चाहिए।
  • हुताशन योग: रविवार को द्वादशी, सोमवार को षष्ठी, मंगलवार को सप्तमी, बुधवार को अष्टमी, गुरुवार को नवमी, शुक्रवार को दशमी या शनिवार को एकादशी होने पर बनता है। हुताशन नाम अग्नि या दाहक स्वभाव को दर्शाता है; कलह, क्षति या कार्यहानि की आशंका के कारण बड़े शुभ कार्यों में इसे वर्जित माना जाता है।
  • मृत्यु योग: नंदा तिथियां (1, 6, 11) रविवार या मंगलवार; भद्रा तिथियां (2, 7, 12) सोमवार या शुक्रवार; जया तिथियां (3, 8, 13) बुधवार; रिक्ता तिथियां (4, 9, 14) गुरुवार; अथवा पूर्णा तिथियां (5, 10, 15) शनिवार को पड़ें तो यह योग बनता है। नाम के अनुसार इसे गंभीर विनाशकारी प्रभाव का सूचक माना जाता है; विवाह, गृहप्रवेश और अन्य शुभ कार्यों से बचना चाहिए।
  • इन परिणामों का उपयोग कैसे करें: शुभ योग मिलने पर भी पूर्ण मुहूर्त परीक्षण आवश्यक है। यदि उसी समय शुभ योग के साथ कोई प्रबल दोष भी हो, तो बड़े कार्यों में उस दोष को अनदेखा नहीं करना चाहिए। इन दुर्योगों के फल परंपरागत रूप से उनके नामों से सूचित स्वभाव के अनुसार समझे जाते हैं।

शुभ योगों की शब्दावली

योग नाम परिभाषा / महत्व
पुष्य / पुष्यामृत जब पुष्य नक्षत्र रविवार या गुरुवार के साथ आता है, तब बनने वाला शुभ काल। यह समृद्धि और आध्यात्मिक कार्यों के लिए उपयोगी है, परंतु विवाह में सामान्यतः वर्जित माना जाता है।
पुष्कर योग द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर विशेष वार-तिथि-नक्षत्र संयोजन हैं, जिनमें कार्यफल दोहरने या बढ़ने की मान्यता है। इसलिए इस समय केवल शुभ कार्यों का चयन करना चाहिए।
योग प्रवेश चयनित स्थान पर आवश्यक वार, तिथि, नक्षत्र या सूर्य-चंद्र नक्षत्र संबंध के अनुसार योग प्रारंभ होने का सटीक समय।
लत्ता दोष ग्रह अपने नक्षत्र स्थान से गिनकर चंद्र नक्षत्र को पीड़ित करता है। सूर्य, मंगल, गुरु, शनि, बुध, राहु, शुक्र और पूर्णिमा चंद्र की लत्ता इसमें देखी जाती है।
कूहू योग अमावस्या की अंतिम चार घटी। इन्हें विषघटी माना जाता है और शुभ प्रारंभों में वर्जित समझा जाता है।
दग्ध / विष / हुताशन / मृत्यु / क्रकच / खचर वार-तिथि संयोजन, वार-तिथि संख्या और सूर्य-चंद्र नक्षत्र गणना पर आधारित मुहूर्त दोष। विवाह, गृहप्रवेश, सीमंत और अन्य शुभ कार्यों में ये महत्वपूर्ण सावधानी संकेत हैं।

Frequently Asked Questions

किसी भी योग को जन्मकुंडली या वर्तमान दशा के प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने वाला नहीं मानना चाहिए। ये योग शुभ कार्यों में सहायता करते हैं और छोटे अवरोधों को कम करने वाले माने जाते हैं। महत्वपूर्ण निर्णयों में पूर्ण मुहूर्त और व्यक्तिगत कुंडली देखनी चाहिए।

पुष्य नक्षत्र अनेक आर्थिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, परंतु कई मुहूर्त परंपराओं में विवाह के लिए इस पर विशेष वर्जना बताई गई है।

हाँ। नक्षत्र और तिथि खगोलीय आधार पर चलते हैं, लेकिन वार और मुहूर्त दिन स्थानीय समय और सूर्योदय नियमों से देखे जाते हैं। इसलिए शहर, अक्षांश, रेखांश और समय क्षेत्र के आधार पर समय बदल सकता है।

नहीं। पुष्कर योग कार्य के फल को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इसलिए वे शुभ और वृद्धि देने वाले कार्यों के लिए उपयोगी हैं, परंतु ऋण, विवाद, शल्य चिकित्सा, हानि या अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

सामान्य कार्यों में परिणाम मिश्रित हो सकता है। लेकिन विवाह, गृहप्रवेश, उपनयन, सीमंत और अन्य बड़े कार्यों में प्रबल दोष को अनदेखा नहीं करना चाहिए। पूर्ण मुहूर्त जांच आवश्यक है।

डेटा प्रामाणिकता: यह गणना 26+ वर्षों के अनुभव वाले वैदिक ज्योतिषी श्री संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में स्विस एफेमेरिस आधारित खगोलीय गणना से तैयार की जाती है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।