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निःशुल्क वैदिक ज्योतिष उपकरण

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पंचांग, समय, ग्रह स्थिति, तिथि या पारंपरिक व्याख्याओं के लिए उपकरण चुनें। नाम से खोजें या नीचे दी गई श्रेणियाँ देखें।

Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश पर आधारित
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पंचांग और दैनिक समय (10)

भार्गव नाड़ी
भार्गव सिद्धांत आधारित समय विभाग और दैनिक मार्गदर्शन।
होरा समय
स्थानीय सूर्योदय के आधार पर ग्रह होरा तालिका।
मुहूर्त समय
दैनिक कार्यों के लिए आज के शुभ मुहूर्त समय।
चौघड़िया समय
शुभ, लाभ, अमृत आदि चौघड़िया समय।
दैनिक काल समय
आपके शहर के लिए राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल समय।
दैनिक लग्न समय
पूरे दिन लग्न परिवर्तन के समय।
पंचक रहित लग्न नया
मुहूर्त के लिए पंचक दोषों से रहित शुभ लग्न।
दैनिक ग्रह स्थिति
किसी भी तारीख के लिए उच्च-सटीक ग्रह दीर्घांश।
आज का संकल्प
संवत्सर, अयन, ऋतु, मास, पक्ष, तिथि, वार और नक्षत्र सहित आज का संकल्प पाठ।
मासिक पूजा और यज्ञ तिथियाँ
महीने के लिए अग्निवास आधारित पूजा, यज्ञ और होम की अनुकूल तिथियाँ।

मुहूर्त और शुभ उपकरण (2)

मुहूर्त सहायक
उत्तम मुहूर्त तय करने के लिए उन्नत जाँच और फ़िल्टर।
ताराबल / चंद्रबल
जन्म नक्षत्र और चंद्र राशि के आधार पर व्यक्तिगत अनुकूलता।

ग्रह गोचर और गति (5)

मासिक ग्रह गोचर (राशि)
महीने में ग्रहों के राशि परिवर्तन सटीक तारीख और समय सहित।
मासिक ग्रह गोचर (नक्षत्र)
महीने में ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन सटीक समय सहित।
ग्रह वक्री गति विवरण
मुख्य ग्रहों की वक्री गति प्रारंभ और समाप्ति तिथियाँ।
गुरु मौढ्य विवरण
किसी भी वर्ष और स्थान के लिए गुरु अस्त/मौढ्य काल।
शुक्र मौढ्य विवरण
किसी भी वर्ष और स्थान के लिए शुक्र अस्त/मौढ्य काल।

ग्रहण और खगोलीय घटनाएँ (2)

चंद्र ग्रहण तिथि
आपके स्थान के अनुसार चंद्र ग्रहण तिथियाँ और समय।
सूर्य ग्रहण तिथि
आपके स्थान के अनुसार सूर्य ग्रहण तिथियाँ और समय।

तिथि और कर्मकांड उपकरण (3)

मासिक श्राद्ध तिथि
किसी भी वर्ष और स्थान के लिए मासिक श्राद्ध तिथियों की सूची।
श्राद्ध तिथि फाइंडर
मृत्यु तिथि और समय के आधार पर सही श्राद्ध तिथि जानें।
जन्मदिन तिथि फाइंडर
व्रत/पूजा योजना के लिए अपने जन्मदिन की तिथि जानें।

वास्तु और दिशाएँ (2)

वास्तु प्लानर नया
घर/ऑफिस के कमरों के अनुसार वास्तु दिशा मार्गदर्शन।
घर की मुख दिशा जानें
नाम से पारंपरिक दिशा सुझाव; भवन की वास्तविक दिशा नहीं मापता।

उपाय, रत्न और आध्यात्मिक (4)

वैदिक रत्न रिपोर्ट
परंपरागत वैदिक ज्योतिष सिद्धांतों पर आधारित रत्न सुझाव।
रुद्राक्ष / इष्ट देवता
रुद्राक्ष सुझाव और इष्ट देवता संकेत।
नवग्रह स्तोत्र
ग्रह शांति और भक्ति के लिए नवग्रह स्तोत्र।
English · हिन्दी · తెలుగు
ग्रह उपाय
ग्रहों के अनुसार उपाय मार्गदर्शन।
English · हिन्दी · తెలుగు

अध्ययन और संदर्भ (5)

ज्योतिष सीखें नया
राशि, नक्षत्र, ग्रह, भाव, दशा और योग आदि विषयों के चरणबद्ध पाठ।
English · हिन्दी · తెలుగు
ज्योतिष लेख
वैदिक ज्योतिष पर गहन लेख और मार्गदर्शिकाएँ।
वैदिक ज्योतिष क्विज
अपने वैदिक ज्योतिष ज्ञान को परखने के लिए क्विज।
English · తెలుగు
ज्योतिष सॉफ्टवेयर
निःशुल्क ज्योतिष सॉफ्टवेयर टूल्स और उपयोगिताएँ।
100 वर्ष एफेमेरिस
दीर्घकालीन ग्रह स्थिति संदर्भ।

उपयोगी सेवाएँ और ऐप्स (3)

शिशु नाम
शिशुओं के नाम और उनके अर्थ।
English
साई प्रश्नावली
भक्ति और मार्गदर्शन भाव से बनाया गया साई प्रश्नावली उपकरण।
मोबाइल ऐप्स
Android ऐप्स और मोबाइल अनुभव।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ये ज्योतिष उपकरण मेरी भाषा में उपलब्ध हैं?
उपलब्ध भाषाएँ उपकरण के अनुसार बदलती हैं। परिणाम की तुलना में पेज के निर्देश कम भाषाओं में हो सकते हैं। उपकरण में भाषा विकल्प देखें। प्रश्नावली अंग्रेज़ी और तेलुगु में, तथा पाठ अंग्रेज़ी, तेलुगु और हिंदी में हैं।
होरा, चौघड़िया और मुहूर्त समय में क्या अंतर है?
होरा में दिन और रात को 24 ग्रह घंटों में बाँटा जाता है, जिनमें हर होरा का एक ग्रह स्वामी होता है। चौघड़िया में दिन और रात को 8 भागों में बाँटकर शुभ, लाभ, अमृत, चर, रोग, काल, उद्वेग आदि नामों से दिखाया जाता है। मुहूर्त किसी कार्य के लिए चुना गया शुभ समय है, जिसे तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और लग्न जैसे तत्वों को देखकर तय किया जाता है।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल कैसे निकाले जाते हैं?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान को 8 समान भागों में बाँटकर राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल निकाले जाते हैं। सप्ताह के दिन के अनुसार इन भागों का क्रम बदलता है। ये समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होते हैं, इसलिए शहर की अक्षांश-रेखांश स्थिति के अनुसार समय बदलता है।
वक्री गति वैदिक ज्योतिष में क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
जब कोई ग्रह राशि चक्र में पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देता है, तो उसे वक्री कहा जाता है। पारंपरिक ज्योतिष में वक्री ग्रहों को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि वे अपने स्वामित्व वाले और दृष्टि पड़ने वाले भावों के विषयों को अधिक बल से प्रभावित करते हैं।
गुरु/शुक्र मौढ्य क्या होता है?
जब गुरु या शुक्र सूर्य के बहुत निकट आ जाते हैं, तब उस ग्रह को अस्त या मौढ्य कहा जाता है। इस अवधि में उस ग्रह के शुभ प्रभाव कमजोर माने जाते हैं। इसलिए गुरु और शुक्र मौढ्य काल में विवाह, उपनयन जैसे शुभ कार्य पारंपरिक रूप से टाले जाते हैं।
क्या ये पंचांग और मुहूर्त गणनाएँ स्थानानुसार बदलती हैं?
हाँ। सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि अंत समय, नक्षत्र परिवर्तन, होरा, राहुकाल, चौघड़िया और लग्न समय आपके शहर के अक्षांश और रेखांश के आधार पर निकाले जाते हैं। सूर्योदय/चंद्रोदय के लिए टोपोसेंट्रिक पद्धति और निरयण ग्रह स्थितियों के लिए लाहिड़ी अयनांश का उपयोग किया जाता है।
श्री संतोष कुमार शर्मा

इन उपकरणों के बारे में

श्री संतोष कुमार शर्मा गोल्लापेल्ली (26+ वर्षों का अनुभव) के मार्गदर्शन में विकसित और सत्यापित उपकरण। उच्च खगोलीय सटीकता के लिए लाहिड़ी अयनांश (चित्रा पक्ष) और Swiss Ephemeris डेटा का उपयोग किया गया है।

Gollapelli Santhosh Kumar Sharma

लेखक के बारे में

यह लेख और इसकी ज्योतिषीय भविष्यवाणियां Gollapelli Santhosh Kumar Sharma द्वारा तैयार की गई हैं, जो वैदिक ज्योतिषी हैं और जिन्हें वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली विश्लेषण, पंचांग गणना और व्यक्तिगत परामर्श में 26+ years का अनुभव है।

यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिष सिद्धांतों, व्यावहारिक फलित और सरल व्याख्या को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि पाठकों को दैनिक जीवन, महत्वपूर्ण निर्णयों और आध्यात्मिक समझ के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन मिल सके।

लेखक की पद्धति: प्रत्येक भविष्यवाणी में ग्रह स्थिति, दशा प्रभाव, गोचर फल और शास्त्रीय ज्योतिष नियमों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे मार्गदर्शन संतुलित, उपयोगी और समझने में सरल रहता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।