onlinejyotish.com free Vedic astrology portal

आज का पंचांग | Aaj Ka Panchang - Columbus के लिए 6 मई 2026 का पंचांग


6 मई 2026 वैज्ञानिक दृक गणित पंचांग

आज का विशेष: नीचे दिए गए विवरण आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सही समय, सही निर्णय: जब जीवन में महत्वपूर्ण कदम उठाने हों (जैसे नया व्यापार, यात्रा या शुभ कार्य), तो यह पंचांग आपको 'राहुकाल' जैसी अशुभ घड़ियों से बचाकर सही दिशा दिखाता है।
  • स्थान आधारित सटीकता: पंचांग पूरी तरह से सूर्योदय पर निर्भर है। हमारा टूल आपके शहर (Columbus) के अनुसार 100% सटीक वैदिक समय की गणना करता है।
  • मानसिक शांति का मार्ग: तिथियों और नक्षत्रों के आधार पर दिए गए सात्विक उपाय और मार्गदर्शन आपको दैनिक जीवन की चिंताओं से मुक्त कर मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
  • पूर्णतः निःशुल्क सेवा: हमारा उद्देश्य वैदिक ज्योतिष के प्रामाणिक ज्ञान को हर जरूरतमंद तक पहुंचाना है, बिना किसी स्वार्थ या भटकाव के।

आप दुनिया में कहीं भी हों, आपके स्थान के अनुसार (जम्बू द्वीपे, क्रौंच द्वीपे आदि संस्कृत नामों के साथ) और उस दिन की तिथि, वार, नक्षत्र के साथ आपका संपूर्ण नित्य संकल्प प्रतिदिन अपने आप अपडेट होगा। यह त्रिकाल संध्यावंदन करने वालों, नित्य पूजा और व्रत का पालन करने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस पंचांग के माध्यम से आप अपनी दैनिक गतिविधियों की योजना आसानी से बना सकते हैं, शुभ मुहूर्त जान सकते हैं और अनुकूल दिनों का चयन कर सकते हैं। अपने शहर का नाम चुनें और आज की तिथि, नक्षत्र और राहुकाल जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। यह पंचांग आपको आध्यात्मिक मार्गदर्शन और दैनिक जीवन में सही निर्णय लेने में सहायता करेगा। नीचे दिए गए फॉर्म में अपने शहर का विवरण दर्ज करें और आज का पंचांग प्राप्त करें। आपके लिए यह दिन मंगलमय हो!

पंचांग विवरण Columbus

आज का पंचांग – संक्षिप्त विवरण (Columbus)

  • तिथि: कृष्ण-पंचमी (07) रात 12:46 तक (आज का दिन सामान्य कार्यों के लिए ठीक है।)
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा पूरा दिन (आज का नक्षत्र अधिकांश दैनिक कार्यों के लिए अनुकूल है।)
  • राहुकाल (अशुभ): दोपहर 1:28 से दोपहर 3:13 तक

📅 6/5/2026📍 Columbus
स्वस्ति श्री पराभव संवत्सर, उत्तरायण, वसंत ऋतु, वैशाख मास
(पूर्णिमान्त: पराभव संवत्सर, ग्रीष्म ऋतु, ज्येष्ठ मास)
🌅 सूर्योदय सुबह 6:30 🌇 सूर्यास्त रात 8:27
संकल्प तिथि:
कृष्ण-पंचमी
श्राद्ध तिथि:
अमान्त: वैशाख कृष्ण-पंचमी
पूर्णिमान्त: ज्येष्ठ कृष्ण-पंचमी
तिथि : कृष्ण-पंचमी (07) रात 12:46 तक, फिर कृष्ण-षष्ठी
सप्ताह का दिन : बुधवार (सौम्यवासरः)
नक्षत्र : पूर्वाषाढ़ा पूरा दिन
योग : सिद्ध आज (06) दोपहर 3:42 तक, फिर साध्य
करण : कौलव आज (06) सुबह 11:36 तक, फिर तैतिल (07) रात 12:46 तक
राशि : धनु राशि 05/05/2026, तड़के 3:25 से  07/05/2026, दोपहर 3:57 तक
🚫 अशुभ समय
राहुकाल:
दोपहर 1:28 से दोपहर 3:13 तक
दुर्मुहूर्त:
दोपहर 1:01 से दोपहर 1:56तक
वर्ज्य:
आज (06) शाम 5:09 से आज (06) शाम 6:57 तक
✅ शुभ समय
अमृत घटी:
नहीं
अभिजीत:
दोपहर 1:01-दोपहर 1:56
ब्रह्म मुहूर्त:
सुबह 5:09-सुबह 5:49
onlinejyotish.com - Hindu Jyotish App

योग
सिद्ध आज (06) दोपहर 3:42 तक, फिर साध्य
करण
कौलव आज (06) सुबह 11:36 तक, फिर तैतिल (07) रात 12:46 तक
नक्षत्र पाद
मूल-4 आज (06) सुबह 6:24 तक
पूर्वाषाढ़ा-1 आज (06) दोपहर 1:08 तक
पूर्वाषाढ़ा-2 आज (06) रात 7:52 तक
पूर्वाषाढ़ा-3 (07) तड़के 2:35 तक
सूर्य राशि
मेष राशि 13/04/2026, रात 11:52 से  14/05/2026, रात 8:41 तक
अशुभ समय
गुलिक काल
सुबह 11:44 से दोपहर 1:28 तक
यमगण्ड काल
सुबह 8:15 से सुबह 9:59 तक
सूर्यचंद्र उदयास्त
सूर्य
सूर्योदय: सुबह 6:30
सूर्यास्त: रात 8:27
चंद्र
चंद्रोदय: 12:20 AM
चंद्रास्त: 09:50 AM
दिन की अवधि : 13:56
अभिजीत : दोपहर 1:28
रात्रि प्रमाण : 10:02
पूजा, होम और अभिषेक
अग्निवास : स्वर्ग (अशुभ) (07) रात 12:46 तक
होमाहुति : गुरु
शिव वास : वृषभारूढ़ (इच्छाएँ पूर्ण)
वास्तु कर्तरी

वास्तु कर्तरी में वर्जित कार्य:
पेड़ काटना, खरपतवार हटाना, कृषि कार्य प्रारंभ करना, बीज बोना, भूमि खोदना, नया गाँव बसाना, गृह-निर्माण शुरू करना, क्षौर कर्म (मुंडन/दाढ़ी), बगीचे लगाना, तालाब या कुएँ खोदना और नए वाहनों का उपयोग करना वर्जित है।
कर्तरी में किए जाने वाले कार्य:
कर्तरी के दौरान उपनयन संस्कार, विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ और मण्डप निर्माण जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

यात्राओं के लिए...
दिशा शूल : उत्तर
बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा से बचें। यदि आवश्यक हो, तो तुलसी के पत्ते, तिल या धनिया खाकर निकलें।
ध्यान दें: जिस दिशा में दिशा शूल होता है, उस दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यह केवल लंबी यात्राओं या लंबे समय तक रहने के लिए लागू होता है, दैनिक यात्राओं पर नहीं।

त्रिसंध्या समय - नित्य संकल्प

त्रिसंध्या समय - नित्य संकल्प
प्रातः संध्या कालसुबह 5:49 से सुबह 6:29
मध्यान्ह संध्या कालदोपहर 12:54 से दोपहर 2:03
सायं संध्या कालरात 7:31 से रात 8:27

आज का संकल्प

मम उपात्त, समस्त दुरित क्षय द्वारा श्री परमेश्वरमुद्दिश्य, श्री परमेश्वर प्रीत्यर्थं, शुभे शोभने मुहूर्ते - श्री महाविष्णोराज्ञ या प्रवर्तमानस्य आद्यब्रह्मणः द्वितीय परार्धे, श्वेतवराहकल्पे, वैवस्वतमन्वन्तरे कलियुगे प्रथमपादे, क्रौंच द्वीपे, रमणक वर्षे, ऐन्द्र खण्डे, मेरोः पश्चिम दिग्भागे, उत्तर अमेरिकायों, अटलांटिक पेसिफिक सागरयोर्मध्य प्रदेशे, राखी मेकिन्ली पर्वतयोर्मध्ये, मिसिसिपी मिसौरी इत्यादि षोडश जीव नदी प्रवाह प्रान्ते, राष्ट्रे, Columbus नगर स्थाने स्वस्थाने, शोभनगृहे (स्वगृहे / वसति गृहे), समस्त देवता ब्राह्मण हरिहर सन्निधौ, अस्मि न्वर्तमान व्यावहारिक, चान्द्रमानेन - प्रभवादि षष्टि संवत्सराणां मध्ये - पराभव नाम संवत्सर - उत्तरायणे - वसंत ऋतौ - वैशाख मासे - कृष्ण पक्षे - पंचमी तिथौ - सौम्य वासरे - पूर्वाषाढ़ा शुभ नक्षत्रे, सिद्ध शुभ योगे, कौलव शुभ करणे.

एवं गुण विशेषेण विशिष्टायाम् अस्याम् शुभ तिथौ श्रीमान् ----- गोत्रस्य ----- नामधेयस्य, (मम सहकुटुम्बस्य अस्माकं, सर्वेषां, सहकुटुम्बानां, क्षेम, स्थैर्य, विजय, अभय आयुर् आरोग्य, ऐश्वर्यादि अभिवृद्ध्यर्थं, मम गृहे महा लक्ष्मी नित्य निवास सिद्ध्यर्थं, मम इष्टकाम्य फल सिद्ध्यर्थं, मम व्यापार, व्यवहार, उद्योगादीनां दिनदिनाभिवृद्धि सिद्ध्यर्थं समस्त मंगला व्याप्तं, शरीरे वर्तमानकाल वर्तिष्यमान सकल रोग परिहार द्वार क्षिप्र आरोग्य सौख्य सिद्ध्यर्थं) - प्रातः/मध्याह्निक/सायं संध्यां, गायत्री जपं, अहं करिष्ये (या जो पूजा/व्रत कर रहे हैं उसका नाम बोलें)।
नोट: विवाहित लोग 'मम सहकुटुम्बस्य' से पहले 'धर्मपत्नी समेतस्य' जोड़ सकते हैं। रिक्त स्थान में अपना गोत्र और नाम बोलें।

दिन-रात विभाजन

दिन विभाजन
अरुणोदय कालसुबह 4:54 से सुबह 6:30
प्रातः कालसुबह 6:30 से सुबह 9:18
संगव कालसुबह 9:18 से दोपहर 12:05
मध्याह्न कालदोपहर 12:05 से दोपहर 2:52
अपराह्न कालदोपहर 2:52 से शाम 5:39
सायं कालशाम 5:39 से रात 8:27
रात्रि विभाजन
प्रदोष कालरात 8:27 से रात 10:27
निशीथ कालरात 1:08 से रात 1:48
अर्धरात्रिरात 1:28
उषः कालसुबह 4:29 से सुबह 6:29

दिन विभाजन
पूर्वाह्नसुबह 6:30 से सुबह 9:59 तक
मध्याह्न सुबह 9:59 से दोपहर 1:28 तक
अपराह्न दोपहर 1:28 से शाम 4:57 तक
सायाह्न शाम 4:57 से रात 8:27 तक
रात्रि विभाजन
प्रदोषरात 8:27 से रात 10:57 तक
निशीथ रात 10:57 से रात 1:28 तक
त्रियामा रात 1:28 से तड़के 3:58 तक
उषः काल तड़के 3:58 से सुबह 6:29 तक

शुभ समय

शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:09 से सुबह 5:49
विजय मुहूर्तदोपहर 3:48 से शाम 4:44
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 1:01 से दोपहर 1:56
गोधूलि मुहूर्तशाम 6:24 से शाम 6:36

गौरी पंचांग / चौघड़िया
दिन
नामसमय (प्रारंभ - अंत)
लाभ-बुध (अच्छा)सुबह 6:30 - सुबह 8:15
अमृत-चंद्र (अच्छा)सुबह 8:15 - सुबह 9:59
काल-शनि (खराब)सुबह 9:59 - सुबह 11:44
शुभ-गुरु (अच्छा)सुबह 11:44 - दोपहर 1:28
रोग-मंगल (खराब)दोपहर 1:28 - दोपहर 3:13
उद्वेग-सूर्य (खराब)दोपहर 3:13 - शाम 4:57
चर-शुक्र (तटस्थ)शाम 4:57 - शाम 6:42
लाभ-बुध (अच्छा)शाम 6:42 - रात 8:27
रात्रि
नामसमय (प्रारंभ - अंत)
उद्वेग-सूर्य (खराब)रात 8:27 - रात 9:42
शुभ-गुरु (अच्छा)रात 9:42 - रात 10:57
अमृत-चंद्र (अच्छा)रात 10:57 - रात 12:13
चर-शुक्र (तटस्थ)रात 12:13 - रात 1:28
रोग-मंगल (खराब)रात 1:28 - तड़के 2:43
काल-शनि (खराब)तड़के 2:43 - तड़के 3:58
लाभ-बुध (अच्छा)तड़के 3:58 - सुबह 5:14
उद्वेग-सूर्य (खराब)सुबह 5:14 - सुबह 6:29
ये चौघड़िया तिथि, वार या नक्षत्र की परवाह किए बिना किसी भी काम को शुरू करने, नौकरी में शामिल होने आदि के लिए अनुकूल होते हैं। शुभ चौघड़ियों में किए गए कार्य अनुकूल रहते हैं। औषधि सेवन के लिए अमृत घड़िया, यात्रा के लिए चर घड़िया, और व्यापार या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने के लिए लाभ घड़िया उत्तम होती हैं।

दिन मुहूर्त
दिन
अधिपतिसमय (प्रारंभ - अंत)
रुद्रसुबह 6:30 - सुबह 7:26
अहिसुबह 7:26 - सुबह 8:22
मित्रसुबह 8:22 - सुबह 9:18
पितृसुबह 9:18 - सुबह 10:13
वसुसुबह 10:13 - सुबह 11:09
अम्बुसुबह 11:09 - दोपहर 12:05
विश्वदेवदोपहर 12:05 - दोपहर 1:01
अभिजितदोपहर 1:01 - दोपहर 1:56
विधातादोपहर 1:56 - दोपहर 2:52
पुरुहूतदोपहर 2:52 - दोपहर 3:48
इन्द्राग्निदोपहर 3:48 - शाम 4:44
निरृतिशाम 4:44 - शाम 5:39
वरुणशाम 5:39 - शाम 6:35
आर्यमनशाम 6:35 - रात 7:31
भगरात 7:31 - रात 8:27
रात्रि
अधिपतिसमय (प्रारंभ - अंत)
गिरीशरात 8:27 - रात 9:07
आजपदरात 9:07 - रात 9:47
आहिर्बुध्न्यरात 9:47 - रात 10:27
पूषनरात 10:27 - रात 11:07
अश्विरात 11:07 - रात 11:47
यमरात 11:47 - रात 12:28
अग्निरात 12:28 - रात 1:08
विधात्रीरात 1:08 - रात 1:48
छन्दरात 1:48 - तड़के 2:28
आदितितड़के 2:28 - तड़के 3:08
जीवतड़के 3:08 - तड़के 3:48
विष्णुतड़के 3:48 - सुबह 4:29
अर्कसुबह 4:29 - सुबह 5:09
ब्रह्मासुबह 5:09 - सुबह 5:49
मारुतसुबह 5:49 - सुबह 6:29

होरा समय
अधिपतिसमय (प्रारंभ - अंत)
बुधसुबह 6:30 - सुबह 7:40
चंद्रसुबह 7:40 - सुबह 8:50
शनिसुबह 8:50 - सुबह 9:59
गुरुसुबह 9:59 - सुबह 11:09
मंगलसुबह 11:09 - दोपहर 12:19
सूर्यदोपहर 12:19 - दोपहर 1:28
शुक्रदोपहर 1:28 - दोपहर 2:38
बुधदोपहर 2:38 - दोपहर 3:48
चंद्रदोपहर 3:48 - शाम 4:57
शनिशाम 4:57 - शाम 6:07
गुरुशाम 6:07 - रात 7:17
मंगलरात 7:17 - रात 8:27
सूर्यरात 8:27 - रात 9:17
शुक्ररात 9:17 - रात 10:07
बुधरात 10:07 - रात 10:57
चंद्ररात 10:57 - रात 11:47
शनिरात 11:47 - रात 12:38
गुरुरात 12:38 - रात 1:28
मंगलरात 1:28 - तड़के 2:18
सूर्यतड़के 2:18 - तड़के 3:08
शुक्रतड़के 3:08 - तड़के 3:58
बुधतड़के 3:58 - सुबह 4:49
चंद्रसुबह 4:49 - सुबह 5:39
शनिसुबह 5:39 - सुबह 6:29

ताराबल/ चंद्रबल

ताराबल आज (06) सुबह 6:24 तक

आपका नक्षत्र: अश्विनी, मघा, मूल
ताराबल: जन्मतारा
फल, उपाय: यह बहुत अच्छा नहीं है। सूर्य इसका अधिपति है। यह मन पर प्रभाव डालता है जिससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं। तीसरा पाद अधिक हानिकारक लक्षण रखता है। जन्मतारा वाले दिन किसी काम या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पत्तेदार सब्जियों का दान करना चाहिए।
आपका नक्षत्र: भरणी, पूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
ताराबल: परम मित्र तारा
फल: यह अच्छा है, लेकिन थोड़े प्रयास से आपका काम पूरा हो जाएगा। अंत में आर्थिक लाभ होगा।
आपका नक्षत्र: कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
ताराबल: मित्र तारा
फल: शुभ। यह सुख-सुविधा और खुशी प्रदान करता है। सृजनात्मकता को बढ़ाता है और अप्रत्याशित सकारात्मक परिणाम लाता है।
आपका नक्षत्र: रोहिणी, हस्त, श्रवण
ताराबल: नैधन तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है, इसे पूरी तरह से टाल देना चाहिए। किसी भी मांगलिक कार्य के लिए यह अनुकूल नहीं है। यह आर्थिक हानि और विवादों का भय उत्पन्न करता है। अनावश्यक खर्च और कठिनाइयाँ आ सकती हैं। यदि नैधन तारा के दिन कोई कार्य करना अनिवार्य हो, तो उसे शुरू करने से पहले तिल के साथ स्वर्ण दान करें।
आपका नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
ताराबल: साधना तारा
फल: शुभ। आप सभी प्रकार के कार्य कर सकते हैं। यह कार्य सिद्धि प्रदान करता है।
आपका नक्षत्र: आर्द్రా, स्वाति, शतभिषा
ताराबल: प्रत्यक् तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। चौथा चरण (पाद) पूरी तरह से प्रतिकूल है। यह दुर्घटनाओं और व्यावसायिक सौदों में हानि का संकेत देता है। यदि प्रत्यक् तारा के दिन कोई कार्य करना अनिवार्य हो, तो उसे शुरू करने से पहले नमक का दान करें।
आपका नक्षत्र: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वभाद्रपद
ताराबल: क्षेम तारा
फल: यह अत्यंत शुभ तारा है। यात्राओं और चिकित्सा उपचार शुरू करने के लिए यह बहुत अच्छा है। यह सुख-शांति और कल्याण प्रदान करता है।
आपका नक्षत्र: पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद
ताराबल: विपत् तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। राहु इसका अधिपति है। यह विवाद और असहमति पैदा करता है। शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। यदि विपत् तारा के दिन कोई कार्य करना अनिवार्य हो, तो उसे शुरू करने से पहले गुड़ का दान करें।
आपका नक्षत्र: आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
ताराबल: सम्पत् तारा
फल: यह अत्यंत शुभ तारा है। आर्थिक मामलों और व्यावसायिक लेन-देन के लिए यह बहुत अच्छा है। बुध इसका अधिपति है। कार्यों में सफलता और अनुकूलता प्राप्त होती है।

ताराबल आज (06) सुबह 6:24 से (07) सुबह 9:16 तक

आपका नक्षत्र: भरणी, पूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
ताराबल: जन्मतारा
फल, उपाय: यह बहुत अच्छा नहीं है। सूर्य इसका अधिपति है। यह मन पर प्रभाव डालता है जिससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं। तीसरा पाद अधिक हानिकारक लक्षण रखता है। जन्मतारा वाले दिन किसी काम या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पत्तेदार सब्जियों का दान करना चाहिए।
आपका नक्षत्र: कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
ताराबल: परम मित्र तारा
फल: यह अच्छा है, लेकिन थोड़े प्रयास से आपका काम पूरा हो जाएगा। अंत में आर्थिक लाभ होगा।
आपका नक्षत्र: रोहिणी, हस्त, श्रवण
ताराबल: मित्र तारा
फल: शुभ। यह सुख-सुविधा और खुशी प्रदान करता है। सृजनात्मकता को बढ़ाता है और अप्रत्याशित सकारात्मक परिणाम लाता है।
आपका नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
ताराबल: नैधन तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है, इसे पूरी तरह से टाल देना चाहिए। किसी भी मांगलिक कार्य के लिए यह अनुकूल नहीं है। यह आर्थिक हानि और विवादों का भय उत्पन्न करता है। अनावश्यक खर्च और कठिनाइयाँ आ सकती हैं। यदि नैधन तारा के दिन कोई कार्य करना अनिवार्य हो, तो उसे शुरू करने से पहले तिल के साथ स्वर्ण दान करें।
आपका नक्षत्र: आर्द్రా, स्वाति, शतभिषा
ताराबल: साधना तारा
फल: शुभ। आप सभी प्रकार के कार्य कर सकते हैं। यह कार्य सिद्धि प्रदान करता है।
आपका नक्षत्र: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वभाद्रपद
ताराबल: प्रत्यक् तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। चौथा चरण (पाद) पूरी तरह से प्रतिकूल है। यह दुर्घटनाओं और व्यावसायिक सौदों में हानि का संकेत देता है। यदि प्रत्यक् तारा के दिन कोई कार्य करना अनिवार्य हो, तो उसे शुरू करने से पहले नमक का दान करें।
आपका नक्षत्र: पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद
ताराबल: क्षेम तारा
फल: यह अत्यंत शुभ तारा है। यात्राओं और चिकित्सा उपचार शुरू करने के लिए यह बहुत अच्छा है। यह सुख-शांति और कल्याण प्रदान करता है।
आपका नक्षत्र: आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
ताराबल: विपत् तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। राहु इसका अधिपति है। यह विवाद और असहमति पैदा करता है। शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। यदि विपत् तारा के दिन कोई कार्य करना अनिवार्य हो, तो उसे शुरू करने से पहले गुड़ का दान करें।
आपका नक्षत्र: अश्विनी, मघा, मूल
ताराबल: सम्पत् तारा
फल: यह अत्यंत शुभ तारा है। आर्थिक मामलों और व्यावसायिक लेन-देन के लिए यह बहुत अच्छा है। बुध इसका अधिपति है। कार्यों में सफलता और अनुकूलता प्राप्त होती है।

चंद्रबल
से 05/05/2026, तड़के 3:25 से  07/05/2026, दोपहर 3:57 तक
मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन राशि के जातकों के पास चंद्रबल है।
वृषभ राशि वालों के लिए अष्टम (8वां) चंद्र।
कन्या राशि वालों के लिए अर्धाष्टम (4था) चंद्र।
मकर राशि वालों के लिए द्वादश (12वां) चंद्र।
जब चंद्रमा 4वें, 8वें और 12वें घर में गोचर करता है, तो शुभ कार्य करना या लंबी यात्राओं पर जाना उचित नहीं होता।


घातवार

आज कर्क राशि वालों के लिए घातवार है।
घात दिनों में नई वस्तुओं का उपयोग, नए वस्त्र पहनना, लंबी दूरी की यात्रा, गृह-प्रवेश, अधिकारियों से मिलना और अन्य महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

लग्न तालिका

लग्नअंत समय
धनु(06), 01:35 AM
मकर(06), 03:07 AM
कुंभ(06), 04:21 AM
मीन(06), 05:33 AM
मेष(06), 06:56 AM
वृषभ(06), 08:45 AM
मिथुन(06), 11:02 AM
कर्क(06), 01:33 PM
सिंह(06), 04:04 PM
कन्या(06), 06:34 PM
तुला(06), 09:05 PM
वृश्चिक(06), 11:30 PM

लग्न शुभांश, पुष्करांश

राशि/विभाजनअंशअंत समय
धनु/वृषभशुभ(06), 12:04 AM
धनु/मिथुनशुभ(06), 12:18 AM
धनु/कर्कशुभ(06), 12:32 AM
धनु/सिंहअशुभ(06), 12:45 AM
धनु/कन्याशुभ(06), 12:58 AM
धनु/तुलापुष्कर(06), 01:11 AM
धनु/वृश्चिकअशुभ(06), 01:23 AM
धनु/धनुपुष्कर(06), 01:35 AM
मकर/मकरवर्गोत्तम(06), 01:47 AM
मकर/कुंभअशुभ(06), 01:58 AM
मकर/मीनपुष्कर(06), 02:09 AM
मकर/मेषअशुभ(06), 02:19 AM
मकर/वृषभपुष्कर(06), 02:29 AM
मकर/मिथुनअशुभ(06), 02:39 AM
मकर/कर्कशुभ(06), 02:49 AM
मकर/सिंहअशुभ(06), 02:58 AM
मकर/कन्याशुभ(06), 03:07 AM
कुंभ/तुलाशुभ(06), 03:16 AM
कुंभ/वृश्चिकअशुभ(06), 03:24 AM
कुंभ/धनुशुभ(06), 03:33 AM
कुंभ/मकरअशुभ(06), 03:41 AM
कुंभ/कुंभवर्गोत्तम(06), 03:49 AM
कुंभ/मीनपुष्कर(06), 03:57 AM
कुंभ/मेषअशुभ(06), 04:05 AM
कुंभ/वृषभपुष्कर(06), 04:13 AM
कुंभ/मिथुनशुभ(06), 04:21 AM
मीन/कर्कपुष्कर(06), 04:29 AM
मीन/सिंहअशुभ(06), 04:37 AM
मीन/कन्यापुष्कर(06), 04:45 AM
मीन/तुलाशुभ(06), 04:52 AM
मीन/वृश्चिकअशुभ(06), 05:00 AM
मीन/धनुशुभ(06), 05:08 AM
मीन/मकरअशुभ(06), 05:16 AM
मीन/कुंभअशुभ(06), 05:24 AM
मीन/मीनवर्गोत्तम(06), 05:33 AM
मेष/मेषवर्गोत्तम(06), 05:41 AM
मेष/वृषभशुभ(06), 05:50 AM
मेष/मिथुनशुभ(06), 05:58 AM
मेष/कर्कशुभ(06), 06:07 AM
मेष/सिंहअशुभ(06), 06:16 AM
मेष/कन्याशुभ(06), 06:26 AM
मेष/तुलापुष्कर(06), 06:35 AM
मेष/वृश्चिकअशुभ(06), 06:45 AM
मेष/धनुपुष्कर(06), 06:56 AM
वृषभ/मकरअशुभ(06), 07:06 AM
वृषभ/कुंभअशुभ(06), 07:17 AM
वृषभ/मीनपुष्कर(06), 07:29 AM
वृषभ/मेषअशुभ(06), 07:40 AM
वृषभ/वृषभपुष्कर(06), 07:52 AM
वृषभ/मिथुनशुभ(06), 08:05 AM
वृषभ/कर्कशुभ(06), 08:18 AM
वृषभ/सिंहअशुभ(06), 08:31 AM
वृषभ/कन्याशुभ(06), 08:45 AM
मिथुन/तुलाशुभ(06), 08:59 AM
मिथुन/वृश्चिकअशुभ(06), 09:13 AM
मिथुन/धनुशुभ(06), 09:28 AM
मिथुन/मकरअशुभ(06), 09:43 AM
मिथुन/कुंभअशुभ(06), 09:58 AM
मिथुन/मीनपुष्कर(06), 10:14 AM
मिथुन/मेषअशुभ(06), 10:30 AM
मिथुन/वृषभपुष्कर(06), 10:46 AM
मिथुन/मिथुनवर्गोत्तम(06), 11:02 AM
कर्क/कर्कपुष्कर(06), 11:19 AM
कर्क/सिंहअशुभ(06), 11:36 AM
कर्क/कन्यापुष्कर(06), 11:52 AM
कर्क/तुलाशुभ(06), 12:09 PM
कर्क/वृश्चिकअशुभ(06), 12:26 PM
कर्क/धनुशुभ(06), 12:43 PM
कर्क/मकरअशुभ(06), 01:00 PM
कर्क/कुंभअशुभ(06), 01:17 PM
कर्क/मीनशुभ(06), 01:33 PM
सिंह/मेषअशुभ(06), 01:50 PM
सिंह/वृषभशुभ(06), 02:07 PM
सिंह/मिथुनशुभ(06), 02:24 PM
सिंह/कर्कशुभ(06), 02:41 PM
सिंह/सिंहवर्गोत्तम(06), 02:57 PM
सिंह/कन्याशुभ(06), 03:14 PM
सिंह/तुलापुष्कर(06), 03:31 PM
सिंह/वृश्चिकअशुभ(06), 03:47 PM
सिंह/धनुपुष्कर(06), 04:04 PM
कन्या/मकरअशुभ(06), 04:21 PM
कन्या/कुंभअशुभ(06), 04:37 PM
कन्या/मीनपुष्कर(06), 04:54 PM
कन्या/मेषअशुभ(06), 05:10 PM
कन्या/वृषभपुष्कर(06), 05:27 PM
कन्या/मिथुनशुभ(06), 05:44 PM
कन्या/कर्कशुभ(06), 06:00 PM
कन्या/सिंहअशुभ(06), 06:17 PM
कन्या/कन्यावर्गोत्तम(06), 06:34 PM
तुला/तुलावर्गोत्तम(06), 06:51 PM
तुला/वृश्चिकअशुभ(06), 07:07 PM
तुला/धनुशुभ(06), 07:24 PM
तुला/मकरअशुभ(06), 07:41 PM
तुला/कुंभअशुभ(06), 07:58 PM
तुला/मीनपुष्कर(06), 08:15 PM
तुला/मेषअशुभ(06), 08:32 PM
तुला/वृषभपुष्कर(06), 08:49 PM
तुला/मिथुनशुभ(06), 09:05 PM
वृश्चिक/कर्कपुष्कर(06), 09:22 PM
वृश्चिक/सिंहअशुभ(06), 09:39 PM
वृश्चिक/कन्यापुष्कर(06), 09:55 PM
वृश्चिक/तुलाशुभ(06), 10:12 PM
वृश्चिक/वृश्चिकवर्गोत्तम(06), 10:28 PM
वृश्चिक/धनुशुभ(06), 10:44 PM
वृश्चिक/मकरअशुभ(06), 11:00 PM
वृश्चिक/कुंभअशुभ(06), 11:15 PM
वृश्चिक/मीनशुभ(06), 11:30 PM
धनु/मेषअशुभ(06), 11:45 PM

सूर्योदय के समय ग्रह स्थिति

ग्रहवक्री/अस्तराशिअंश
लग्नमेष21:41:20
सूर्य-मेष21:41:21
चंद्रधनु13:23:23
मंगलमीन26:18:12
बुध(अ)मेष12:19:17
गुरुमिथुन25:28:29
शुक्रवृष20:37:59
शनिमीन15:31:22
राहु(व)कुंभ11:18:06
केतु(व)सिंह11:18:06
(व)= वक्री ग्रह, (अ)= अस्त ग्रह

मं
12
सू बु *ल*
1
शु
2
गु
3
(रा)
11

Retro=(),
Combust= _
onlinejyotish.com
4
10
(के)
5
चं
9
8
7
6

OnlineJyotish.com का समर्थन करें

onlinejyotish.com

onlinejyotish.com की ज्योतिष सेवाओं का उपयोग करने के लिए धन्यवाद। यदि यह पेज आपके लिए उपयोगी रहा हो, तो नीचे दिए गए किसी भी विकल्प से हमारा सहयोग करें।

1) इस पेज को शेयर करें
Facebook, X (Twitter), WhatsApp आदि पर इस पेज को शेयर करें।
Facebook Twitter (X) WhatsApp
2) ईमानदार रिव्यू दें
यदि हमारी सेवा आपके काम आई हो, तो Google Play Store या Google Business Profile पर ईमानदार रिव्यू दें।
आपका रिव्यू हमारी सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करता है।
3) कोई भी राशि योगदान करें
UPI या PayPal से अपनी पसंद की राशि भेजें।
UPI UPI Pay
✅ कॉपी हो गया!


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

आज का दिन सामान्य कार्यों के लिए ठीक है।

आज का नक्षत्र अधिकांश दैनिक कार्यों के लिए अनुकूल है।

पंचांग पूरी तरह से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है, जो हर शहर के लिए अलग होता है। सही वैदिक समय का पालन करने के लिए अपने शहर का चयन करना आवश्यक है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल में नई यात्रा या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बाधाएं आ सकती हैं।

पंचांग: पांच अंगों का महत्व

पंचांग केवल तारीखें नहीं हैं; यह खगोल विज्ञान और ज्योतिष का मिश्रण है। इसके पांच अंग होते हैं:

अंग अर्थ परिणाम / महत्व
1. तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच की दूरी धन और समृद्धि
2. वार (दिन) ग्रहों का अधिपति आयु (लंबी उम्र)
3. नक्षत्र तारामंडल पाप परिहार (मन की शांति)
4. योग सूर्य-चंद्रमा का योग स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता
5. करण तिथि का आधा भाग कार्य सिद्धि (सफलता)
श्री संतोष कुमार शर्मा - OnlineJyotish

श्री संतोष कुमार शर्मा (वैदिक ज्योतिषी)

वैदिक ज्योतिष में 26 वर्षों से अधिक के शोध के साथ, उन्होंने प्राचीन सिद्धांतों को आधुनिक खगोलीय सटीकता के साथ मिलाकर इस पंचांग को तैयार किया है।

नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।