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Columbus के लिए आज का पंचांग

4 फ़रवरी 2026 वैज्ञानिक दृक गणित पंचांग

आज का विशेष: नीचे दिए गए विवरण आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित हैं।

बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि सही समय पर शुरू किया गया कार्य अवश्य सफल होता है। यहाँ आप अपनी दिनचर्या, यात्रा और शुभ कार्यों के लिए आवश्यक दैनिक वैदिक पंचांग देख सकते हैं। यह पंचांग दृक सिद्धांत (Drik Ganitha) पर आधारित है, जो नासा (NASA) के ग्रहों की स्थिति से मेल खाता है।

एकमात्र ऑनलाइन पंचांग जो व्यावहारिक और दैनिक जीवन में उपयोगी सटीक विवरण प्रदान करता है।

पंचांग विवरण Columbus

किसी अन्य शहर का पंचांग देखने के लिए कृपया नीचे स्थान बदलें।

आज का पंचांग – संक्षिप्त विवरण

Columbus • 4 फ़रवरी 2026
  • आज की तिथि: कृष्ण-तृतीया आज (04) दोपहर 1:41 तक
  • आज का नक्षत्र: पूर्व फाल्गुनी आज (04) सुबह 11:43 तक
  • राहुकाल: दोपहर 12:45 से दोपहर 2:03 तक
  • वर्ज्यम (अशुभ समय): आज (04) दोपहर 12:08 से आज (04) दोपहर 1:47 तक
  • सूर्योदय / सूर्यास्त: सुबह 7:37 / शाम 5:54


4/2/2026Columbus
स्वस्ति श्री विश्वावसु संवत्सर, उत्तरायण, शिशिर ऋतु, माघ मास, कृष्ण पक्ष, बुधवार (सौम्यवासरः)
(पूर्णिमान्त : विश्वावसु संवत्सर, शिशिर ऋतु, फाल्गुन मास)
तिथि
सूर्योदय काल तिथि: कृष्ण-तृतीया
कृष्ण-तृतीया आज (04) दोपहर 1:41 तक, फिर कृष्ण-चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्व फाल्गुनी आज (04) सुबह 11:43 तक, फिर उत्तर फाल्गुनी
राशि
सिंह राशि 02/02/2026, दोपहर 12:18 से  04/02/2026, शाम 5:50 तक
वर्ज्य
आज (04) दोपहर 12:08 से आज (04) दोपहर 1:47 तक
दुर्मुहूर्त
दोपहर 12:25 से दोपहर 1:06तक
राहुकाल

दोपहर 12:45 से दोपहर 2:03 तक
अमृत घड़ियां
नहीं
श्राद्ध तिथि

अमांत : माघ कृष्ण-चतुर्थी
पूर्णिमान्त : फाल्गुन कृष्ण-चतुर्थी
पूर्णिमान्त पंचांग का उपयोग मुख्य रूप से उत्तर भारत में किया जाता है, जबकि अमान्त पंचांग का पालन दक्षिण भारत और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है।

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योग
अतिगण्ड आज (04) दोपहर 2:33 तक, फिर सुकर्म
करण
वणिज आज (04) रात 1:51 तक, फिर विष्टि आज (04) दोपहर 1:41 तक
नक्षत्र पाद
पू.फाल्गुनी-3 आज (04) सुबह 5:39 तक
पू.फाल्गुनी-4 आज (04) सुबह 11:43 तक
उ.फाल्गुनी-1 आज (04) शाम 5:50 तक
उ.फाल्गुनी-2 कल(05) रात 12:00 तक
सूर्य राशि
मकर राशि 14/01/2026, सुबह 4:33 से  12/02/2026, शाम 5:30 तक
अशुभ समय
गुलिक काल
सुबह 11:28 से दोपहर 12:45 तक
यमगण्ड काल
सुबह 8:54 से सुबह 10:11 तक
सूर्यचंद्र उदयास्त
सूर्य
सूर्योदय: सुबह 7:37
सूर्यास्त: शाम 5:54
चंद्र
चंद्रोदয়: 09:14 PM
चंद्रास्त: 09:03 AM
दिन की अवधि : 10:17
अभिजीत : दोपहर 12:45
रात्रि की अवधि : 13:41
पूजा, होम और अभिषेक
अग्निवास : पृथ्वी (शुभ) आज (04) दोपहर 1:41 तक
होमाहुति : मंगल
शिव वास : क्रीड़ा (अशुभ)
यात्राओं के लिए...
दिशा शूल : उत्तर
बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा से बचें। यदि आवश्यक हो, तो तुलसी के पत्ते, तिल या धनिया खाकर निकलें।
ध्यान दें: जिस दिशा में दिशा शूल होता है, उस दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यह केवल लंबी यात्राओं या लंबे समय तक रहने के लिए लागू होता है, दैनिक यात्राओं पर नहीं।

दिन, रात विभाजन

दिन विभाजन
अरुणोदय कालसुबह 6:01 से सुबह 7:37
प्रातः कालसुबह 7:37 से सुबह 9:40
संगव कालसुबह 9:40 से सुबह 11:44
मध्याह्न कालसुबह 11:44 से दोपहर 1:47
अपराह्न कालदोपहर 1:47 से दोपहर 3:51
सायं कालदोपहर 3:51 से शाम 5:54
रात्रि विभाजन
प्रदोष कालशाम 5:54 से रात 8:39
निशीथ कालरात 12:18 से रात 1:12
अर्धरात्रिरात 12:45
उषः कालसुबह 4:51 से सुबह 7:35

शुभ समय

शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:46 से सुबह 6:41
विजय मुहूर्तदोपहर 2:28 से दोपहर 3:10
अभिजीत कालदोपहर 12:25 से दोपहर 1:06
गोधूलि मुहूर्तरात 7:30 से रात 7:42

त्रिसंध्या समय

त्रिसंध्या समय
प्रातः संध्या कालसुबह 6:41 से सुबह 7:35
मध्यान्ह संध्या कालदोपहर 12:20 से दोपहर 1:11
सायं संध्या कालशाम 5:13 से शाम 5:54

गौरीपंचांग / चौघड़िया
दिन
नामसमय (प्रारंभ - अंत)
लाभ-बुध (अच्छा)सुबह 7:37 - सुबह 8:54
अमृत-चंद्र (अच्छा)सुबह 8:54 - सुबह 10:11
काल-शनि (खराब)सुबह 10:11 - सुबह 11:28
शुभ-गुरु (अच्छा)सुबह 11:28 - दोपहर 12:45
रोग-मंगल (खराब)दोपहर 12:45 - दोपहर 2:03
उद्वेग-सूर्य (खराब)दोपहर 2:03 - दोपहर 3:20
चर-शुक्र (तटस्थ)दोपहर 3:20 - शाम 4:37
लाभ-बुध (अच्छा)शाम 4:37 - शाम 5:54
रात्रि
नामसमय (प्रारंभ - अंत)
उद्वेग-सूर्य (खराब)शाम 5:54 - रात 7:37
शुभ-गुरु (अच्छा)रात 7:37 - रात 9:20
अमृत-चंद्र (अच्छा)रात 9:20 - रात 11:02
चर-शुक्र (तटस्थ)रात 11:02 - रात 12:45
रोग-मंगल (खराब)रात 12:45 - तड़के 2:28
काल-शनि (खराब)तड़के 2:28 - सुबह 4:10
लाभ-बुध (अच्छा)सुबह 4:10 - सुबह 5:53
उद्वेग-सूर्य (खराब)सुबह 5:53 - सुबह 7:35
ये चौघड़िया तिथि, वार या नक्षत्र की परवाह किए बिना किसी भी काम को शुरू करने, नौकरी में शामिल होने आदि के लिए अनुकूल होते हैं। शुभ चौघड़ियों में किए गए कार्य अनुकूल रहते हैं। औषधि सेवन के लिए अमृत घड़िया, यात्रा के लिए चर घड़िया, और व्यापार या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने के लिए लाभ घड़िया उत्तम होती हैं।

दिन मुहूर्त
दिन
अधिपतिसमय (प्रारंभ - अंत)
रुद्रसुबह 7:37 - सुबह 8:18
अहिसुबह 8:18 - सुबह 8:59
मित्रसुबह 8:59 - सुबह 9:40
पितृसुबह 9:40 - सुबह 10:21
वसुसुबह 10:21 - सुबह 11:02
अम्बुसुबह 11:02 - सुबह 11:44
विश्वदेवसुबह 11:44 - दोपहर 12:25
अभिजितदोपहर 12:25 - दोपहर 1:06
विधातादोपहर 1:06 - दोपहर 1:47
पुरुहूतदोपहर 1:47 - दोपहर 2:28
इन्द्राग्निदोपहर 2:28 - दोपहर 3:10
निरृतिदोपहर 3:10 - दोपहर 3:51
वरुणदोपहर 3:51 - शाम 4:32
आर्यमनशाम 4:32 - शाम 5:13
भगशाम 5:13 - शाम 5:54
रात्रि
अधिपतिसमय (प्रारंभ - अंत)
गिरीशशाम 5:54 - शाम 6:49
आजपदशाम 6:49 - रात 7:44
आहिर्बुध्न्यरात 7:44 - रात 8:39
पूषनरात 8:39 - रात 9:33
अश्विरात 9:33 - रात 10:28
यमरात 10:28 - रात 11:23
अग्निरात 11:23 - रात 12:18
विधात्रीरात 12:18 - रात 1:12
छन्दरात 1:12 - तड़के 2:07
आदितितड़के 2:07 - तड़के 3:02
जीवतड़के 3:02 - तड़के 3:56
विष्णुतड़के 3:56 - सुबह 4:51
अर्कसुबह 4:51 - सुबह 5:46
ब्रह्मासुबह 5:46 - सुबह 6:41
मारुतसुबह 6:41 - सुबह 7:35

होरा समय
अधिपतिसमय (प्रारंभ - अंत)
बुधसुबह 7:37 - सुबह 8:28
चंद्रसुबह 8:28 - सुबह 9:19
शनिसुबह 9:19 - सुबह 10:11
गुरुसुबह 10:11 - सुबह 11:02
मंगलसुबह 11:02 - सुबह 11:54
सूर्यसुबह 11:54 - दोपहर 12:45
शुक्रदोपहर 12:45 - दोपहर 1:37
बुधदोपहर 1:37 - दोपहर 2:28
चंद्रदोपहर 2:28 - दोपहर 3:20
शनिदोपहर 3:20 - शाम 4:11
गुरुशाम 4:11 - शाम 5:03
मंगलशाम 5:03 - शाम 5:54
सूर्यशाम 5:54 - रात 7:03
शुक्ररात 7:03 - रात 8:11
बुधरात 8:11 - रात 9:20
चंद्ररात 9:20 - रात 10:28
शनिरात 10:28 - रात 11:36
गुरुरात 11:36 - रात 12:45
मंगलरात 12:45 - रात 1:53
सूर्यरात 1:53 - तड़के 3:02
शुक्रतड़के 3:02 - सुबह 4:10
बुधसुबह 4:10 - सुबह 5:19
चंद्रसुबह 5:19 - सुबह 6:27
शनिसुबह 6:27 - सुबह 7:35

ताराबल/ चंद्रबल

ताराबल आज (04) सुबह 11:43 तक

आपका नक्षत्र: भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
ताराबल: जन्मतारा
फल, उपाय: यह बहुत अच्छा नहीं है। सूर्य इसका अधिपति है। यह मन पर प्रभाव डालता है जिससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं। तीसरा पाद अधिक हानिकारक लक्षण रखता है। जन्मतारा वाले दिन किसी काम या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पत्तेदार सब्जियों का दान करना चाहिए।
आपका नक्षत्र: कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
ताराबल: परम मित्र तारा
फल: यह अच्छा है, लेकिन थोड़े प्रयास से आपका काम पूरा हो जाएगा। अंत में आर्थिक लाभ होगा।
आपका नक्षत्र: रोहिणी, हस्त, श्रवण
ताराबल: मित्र तारा
फल: शुभ। यह आराम और खुशी देता है। सृजनात्मकता को बढ़ाता है और अप्रत्याशित शुभ परिणाम लाता है।
आपका नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
ताराबल: नैधनतारा
फल, उपाय: यह अच्छा नहीं है, इसे पूरी तरह से टाल देना चाहिए। किसी भी शुभ कार्य के लिए अनुकूल नहीं है। यह आर्थिक नुकसान और विवादों का भय उत्पन्न करता है! अनावश्यक खर्च और कठिनाइयाँ होंगी। नैधनतारा के दिन यदि किसी कार्य या शुभ कार्य को करना आवश्यक हो, तो कार्य शुरू करने से पहले तिल के साथ सोना दान करें।
आपका नक्षत्र: आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा
ताराबल: साधना तारा
फल: शुभ। आप सभी प्रकार के कार्य कर सकते हैं। यह कार्य सिद्धि देता है।
आपका नक्षत्र: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वभाद्रपद
ताराबल: प्रत्यक्ष तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। चौथा पाद पूरी तरह से अशुभ है। यह दुर्घटनाओं और व्यापारिक सौदों और पेशे में नुकसान लाता है। प्रत्यक्ष तारा के दिन यदि किसी कार्य या शुभ कार्य को करना आवश्यक हो, तो कार्य शुरू करने से पहले नमक का दान करें।
आपका नक्षत्र: पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद
ताराबल: क्षेम तारा
फल: शुभ। यात्रा और चिकित्सा उपचार के लिए अच्छा है। यह कल्याण लाता है।
आपका नक्षत्र: आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
ताराबल: विपत्तार
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। राहु इसका अधिपति है। यह विवाद और असहमति लाता है। आरंभ किए गए कार्य पूरे नहीं होंगे। विपत्तार के दिन यदि किसी कार्य या शुभ कार्य को करना आवश्यक हो, तो कार्य शुरू करने से पहले गुड़ का दान करें।
आपका नक्षत्र: अश्विनी, मघा, मूल
ताराबल: संपत्तार
फल: शुभ। आर्थिक मामलों और व्यावसायिक लेन-देन के लिए अच्छा है। बुध इसका अधिपति है। कार्यों में अनुकूलता होती है।

ताराबल आज (04) सुबह 11:43 से कल(05) दोपहर 12:28 तक

आपका नक्षत्र: कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
ताराबल: जन्मतारा
फल, उपाय: यह बहुत अच्छा नहीं है। सूर्य इसका अधिपति है। यह मन पर प्रभाव डालता है जिससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं। तीसरा पाद अधिक हानिकारक लक्षण रखता है। जन्मतारा वाले दिन किसी काम या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पत्तेदार सब्जियों का दान करना चाहिए।
आपका नक्षत्र: रोहिणी, हस्त, श्रवण
ताराबल: परम मित्र तारा
फल: यह अच्छा है, लेकिन थोड़े प्रयास से आपका काम पूरा हो जाएगा। अंत में आर्थिक लाभ होगा।
आपका नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
ताराबल: मित्र तारा
फल: शुभ। यह आराम और खुशी देता है। सृजनात्मकता को बढ़ाता है और अप्रत्याशित शुभ परिणाम लाता है।
आपका नक्षत्र: आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा
ताराबल: नैधनतारा
फल, उपाय: यह अच्छा नहीं है, इसे पूरी तरह से टाल देना चाहिए। किसी भी शुभ कार्य के लिए अनुकूल नहीं है। यह आर्थिक नुकसान और विवादों का भय उत्पन्न करता है! अनावश्यक खर्च और कठिनाइयाँ होंगी। नैधनतारा के दिन यदि किसी कार्य या शुभ कार्य को करना आवश्यक हो, तो कार्य शुरू करने से पहले तिल के साथ सोना दान करें।
आपका नक्षत्र: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वभाद्रपद
ताराबल: साधना तारा
फल: शुभ। आप सभी प्रकार के कार्य कर सकते हैं। यह कार्य सिद्धि देता है।
आपका नक्षत्र: पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद
ताराबल: प्रत्यक्ष तारा
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। चौथा पाद पूरी तरह से अशुभ है। यह दुर्घटनाओं और व्यापारिक सौदों और पेशे में नुकसान लाता है। प्रत्यक्ष तारा के दिन यदि किसी कार्य या शुभ कार्य को करना आवश्यक हो, तो कार्य शुरू करने से पहले नमक का दान करें।
आपका नक्षत्र: आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
ताराबल: क्षेम तारा
फल: शुभ। यात्रा और चिकित्सा उपचार के लिए अच्छा है। यह कल्याण लाता है।
आपका नक्षत्र: अश्विनी, मघा, मूल
ताराबल: विपत्तार
फल, उपाय: यह शुभ नहीं है। राहु इसका अधिपति है। यह विवाद और असहमति लाता है। आरंभ किए गए कार्य पूरे नहीं होंगे। विपत्तार के दिन यदि किसी कार्य या शुभ कार्य को करना आवश्यक हो, तो कार्य शुरू करने से पहले गुड़ का दान करें।
आपका नक्षत्र: भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
ताराबल: संपत्तार
फल: शुभ। आर्थिक मामलों और व्यावसायिक लेन-देन के लिए अच्छा है। बुध इसका अधिपति है। कार्यों में अनुकूलता होती है।

चंद्रबल
से 02/02/2026, दोपहर 12:18 से  04/02/2026, शाम 5:50 तक
मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि के जातकों के पास चंद्रबल है।
मकर राशि वालों के लिए अष्टम (8वां) चंद्र.
वृषभ राशि वालों के लिए अर्धाष्टम (4वां) चंद्र.
कन्या राशि वालों के लिए द्वादश (12वां) चंद्र.
जब चंद्रमा 4वें, 8वें और 12वें घर में होता है, तो शुभ कार्य करना या लंबी यात्राओं पर जाना उचित नहीं होता।


घातवार

आज कर्क राशि वालों के लिए घातवार है।
घाटा दिवस पर नए सामान का उपयोग, नए वस्त्र पहनना, लंबी यात्रा करना, गृह‑प्रवेश करना, अधिकारियों से मिलना आदि कार्य नहीं करने चाहिए।

लग्न तालिका

लग्नअंत समय
तुला(04), 02:07:32 AM
वृश्चिक(04), 04:32:41 AM
धनु(04), 06:33:33 AM
मकर(04), 08:05:13 AM
कुंभ(04), 09:19:25 AM
मीन(04), 10:30:52 AM
मेष(04), 11:54:03 AM
वृषभ(04), 01:43:02 PM
मिथुन(04), 04:00:46 PM
कर्क(04), 06:31:41 PM
सिंह(04), 09:02:13 PM
कन्या(04), 11:32:02 PM

लग्न शुभांश, पुष्करांश

राशि/विभाजनअंशअंत समय
तुला/वृश्चिकअशुभ(04), 12:09:33 AM
तुला/धनूशुभ(04), 12:26:23 AM
तुला/मकरअशुभ(04), 12:43:14 AM
तुला/कुंभअशुभ(04), 01:00:07 AM
तुला/मीनपुष्कर(04), 01:17:00 AM
तुला/मेषअशुभ(04), 01:33:52 AM
तुला/वृषभपुष्कर(04), 01:50:43 AM
तुला/मिथुनशुभ(04), 02:07:32 AM
वृश्चिक/कर्कपुष्कर(04), 02:24:17 AM
वृश्चिक/सिंहअशुभ(04), 02:40:56 AM
वृश्चिक/कन्यपुष्कर(04), 02:57:29 AM
वृश्चिक/तुलाशुभ(04), 03:13:53 AM
वृश्चिक/वृश्चिकवर्गो(04), 03:30:07 AM
वृश्चिक/धनूशुभ(04), 03:46:08 AM
वृश्चिक/मकरअशुभ(04), 04:01:55 AM
वृश्चिक/कुंभअशुभ(04), 04:17:27 AM
वृश्चिक/मीनशुभ(04), 04:32:41 AM
धनू/मेषअशुभ(04), 04:47:36 AM
धनू/वृषभशुभ(04), 05:02:10 AM
धनू/मिथुनशुभ(04), 05:16:23 AM
धनू/कर्कशुभ(04), 05:30:13 AM
धनू/सिंहअशुभ(04), 05:43:40 AM
धनू/कन्यशुभ(04), 05:56:44 AM
धनू/तुलापुष्कर(04), 06:09:24 AM
धनू/वृश्चिकअशुभ(04), 06:21:40 AM
धनू/धनूपुष्कर(04), 06:33:33 AM
मकर/मकरवर्गो(04), 06:45:03 AM
मकर/कुंभअशुभ(04), 06:56:11 AM
मकर/मीनपुष्कर(04), 07:06:57 AM
मकर/मेषअशुभ(04), 07:17:24 AM
मकर/वृषभपुष्कर(04), 07:27:31 AM
मकर/मिथुनअशुभ(04), 07:37:21 AM
मकर/कर्कशुभ(04), 07:46:53 AM
मकर/सिंहअशुभ(04), 07:56:11 AM
मकर/कन्यशुभ(04), 08:05:13 AM
कुंभ/तुलाशुभ(04), 08:14:03 AM
कुंभ/वृश्चिकअशुभ(04), 08:22:42 AM
कुंभ/धनूशुभ(04), 08:31:09 AM
कुंभ/मकरअशुभ(04), 08:39:28 AM
कुंभ/कुंभवर्गो(04), 08:47:38 AM
कुंभ/मीनपुष्कर(04), 08:55:42 AM
कुंभ/मेषअशुभ(04), 09:03:41 AM
कुंभ/वृषभपुष्कर(04), 09:11:35 AM
कुंभ/मिथुनशुभ(04), 09:19:25 AM
मीन/कर्कपुष्कर(04), 09:27:14 AM
मीन/सिंहअशुभ(04), 09:35:02 AM
मीन/कन्यपुष्कर(04), 09:42:50 AM
मीन/तुलाशुभ(04), 09:50:40 AM
मीन/वृश्चिकअशुभ(04), 09:58:33 AM
मीन/धनूशुभ(04), 10:06:29 AM
मीन/मकरअशुभ(04), 10:14:30 AM
मीन/कुंभअशुभ(04), 10:22:37 AM
मीन/मीनवर्गो(04), 10:30:52 AM
मेष/मेषवर्गो(04), 10:39:15 AM
मेष/वृषभशुभ(04), 10:47:48 AM
मेष/मिथुनशुभ(04), 10:56:33 AM
मेष/कर्कशुभ(04), 11:05:29 AM
मेष/सिंहअशुभ(04), 11:14:40 AM
मेष/कन्यशुभ(04), 11:24:05 AM
मेष/तुलापुष्कर(04), 11:33:46 AM
मेष/वृश्चिकअशुभ(04), 11:43:45 AM
मेष/धनूपुष्कर(04), 11:54:03 AM
वृषभ/मकरअशुभ(04), 12:04:40 PM
वृषभ/कुंभअशुभ(04), 12:15:38 PM
वृषभ/मीनपुष्कर(04), 12:26:58 PM
वृषभ/मेषअशुभ(04), 12:38:40 PM
वृषभ/वृषभपुष्कर(04), 12:50:45 PM
वृषभ/मिथुनशुभ(04), 01:03:14 PM
वृषभ/कर्कशुभ(04), 01:16:06 PM
वृषभ/सिंहअशुभ(04), 01:29:23 PM
वृषभ/कन्यशुभ(04), 01:43:02 PM
मिथुन/तुलाशुभ(04), 01:57:05 PM
मिथुन/वृश्चिकअशुभ(04), 02:11:29 PM
मिथुन/धनूशुभ(04), 02:26:15 PM
मिथुन/मकरअशुभ(04), 02:41:20 PM
मिथुन/कुंभअशुभ(04), 02:56:43 PM
मिथुन/मीनपुष्कर(04), 03:12:24 PM
मिथुन/मेषअशुभ(04), 03:28:19 PM
मिथुन/वृषभपुष्कर(04), 03:44:27 PM
मिथुन/मिथुनवर्गो(04), 04:00:46 PM
कर्क/कर्कपुष्कर(04), 04:17:15 PM
कर्क/सिंहअशुभ(04), 04:33:52 PM
कर्क/कन्यपुष्कर(04), 04:50:34 PM
कर्क/तुलाशुभ(04), 05:07:21 PM
कर्क/वृश्चिकअशुभ(04), 05:24:11 PM
कर्क/धनूशुभ(04), 05:41:03 PM
कर्क/मकरअशुभ(04), 05:57:56 PM
कर्क/कुंभअशुभ(04), 06:14:49 PM
कर्क/मीनशुभ(04), 06:31:41 PM
सिंह/मेषअशुभ(04), 06:48:32 PM
सिंह/वृषभशुभ(04), 07:05:21 PM
सिंह/मिथुनशुभ(04), 07:22:08 PM
सिंह/कर्कशुभ(04), 07:38:53 PM
सिंह/सिंहवर्गो(04), 07:55:37 PM
सिंह/कन्यशुभ(04), 08:12:18 PM
सिंह/तुलापुष्कर(04), 08:28:57 PM
सिंह/वृश्चिकअशुभ(04), 08:45:36 PM
सिंह/धनूपुष्कर(04), 09:02:13 PM
कन्य/मकरअशुभ(04), 09:18:49 PM
कन्य/कुंभअशुभ(04), 09:35:25 PM
कन्य/मीनपुष्कर(04), 09:52:02 PM
कन्य/मेषअशुभ(04), 10:08:38 PM
कन्य/वृषभपुष्कर(04), 10:25:16 PM
कन्य/मिथुनशुभ(04), 10:41:55 PM
कन्य/कर्कशुभ(04), 10:58:36 PM
कन्य/सिंहअशुभ(04), 11:15:18 PM
कन्य/कन्यवर्गो(04), 11:32:02 PM
तुला/तुलावर्गो(04), 11:48:48 PM

सूर्योदय के समय ग्रह स्थिति

ग्रहवक्री/अस्तराशिअंश
लग्नमकर19:45:14
सूर्य-मकर21:28:36
चंद्रसिंह24:25:10
मंगल(अ)मकर15:15:57
बुध(अ)कुंभ01:29:44
गुरु(व)मिथुन22:45:25
शुक्र(अ)मकर28:22:35
शनिमीन04:46:13
राहु(व)कुंभ16:07:10
केतु(व)सिंह16:07:10
(व)= वक्री ग्रह, (अ)= अस्त ग्रह

शुक्र अस्त :

मौढ्य में नहीं करने योग्य कार्य
जब गुरु और शुक्र में से कोई भी अस्तंगत हो जाता है, अर्थात जब गुरु या शुक्र मौढ्य होते हैं, तो कुएँ, तालाब या झीलें खोदना, यज्ञ करना, देवताओं की प्रतिष्ठा करना, विवाह और उपनयन संस्कार करना, शिक्षा प्रारंभ करना, नए घरों का निर्माण शुरू करना, कर्णवेध, महादान करना, वन स्थापित करना, पवित्र स्थानों की यात्रा करना, नए मंत्रों का जाप करना, और राज्याभिषेक जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।
मौढ्य में करने योग्य कार्य
आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूलादि गण्ड नक्षत्रों की शान्ति, रोग संबंधी जप-होमादि, ग्रह शान्ति, अभिषेक, सभी व्रत, उत्पात दोषों आदि की शान्ति, और मासिक आधार पर किए जाने वाले अन्नप्राशन और पुंसवन आदि कार्य गुरु और शुक्र के मौढ्य में किए जा सकते हैं।

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(गु)
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बु (रा)
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सू मं शु *ल*
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चं (के)
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

आज का दिन सामान्य कार्यों के लिए ठीक है।

आज का नक्षत्र अधिकांश दैनिक कार्यों के लिए अनुकूल है।

पंचांग पूरी तरह से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है, जो हर शहर के लिए अलग होता है। दिल्ली और मुंबई के समय में भी अंतर होता है। सही वैदिक समय का पालन करने के लिए अपने शहर का चयन करना आवश्यक है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल में नई यात्रा या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बाधाएं आ सकती हैं। हालांकि, नियमित दिनचर्या या आपात स्थिति में भगवान का नाम लेकर यात्रा की जा सकती है।

वर्ज्यम नक्षत्र का वह समय होता है जिसे 'विष' के समान माना जाता है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए इस समय को पूरी तरह त्याग देना चाहिए।



पंचांग: पांच अंगों का महत्व

पंचांग केवल तारीखें नहीं हैं; यह खगोल विज्ञान और ज्योतिष का मिश्रण है। इसके पांच अंग होते हैं:

अंग अर्थ परिणाम / महत्व
1. तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच की दूरी धन और समृद्धि
2. वार (दिन) ग्रहों का अधिपति आयु (लंबी उम्र)
3. नक्षत्र तारामंडल पाप परिहार (मन की शांति)
4. योग सूर्य-चंद्रमा का योग स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता
5. करण तिथि का आधा भाग कार्य सिद्धि (सफलता)

Santhosh Kumar Sharma

श्री संतोष कुमार शर्मा (वैदिक ज्योतिषी)

वैदिक ज्योतिष में 31 वर्षों से अधिक के शोध के साथ, उन्होंने प्राचीन सिद्धांतों को आधुनिक खगोलीय सटीकता के साथ मिलाकर इस पंचांग को तैयार किया है।

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