भकूट विचार और शास्त्रीय दोष निवारण
भकूट दोष और अपवाद
मृत्युः षष्ठाष्टके ज्ञेयो ऽपत्यहानिर्नवात्मजे ।
द्विर्द्वादशे निर्धनत्वं द्वयोरन्यत्र सौख्यकृत् ।।३१ ।।
- भकूट के अधिकतम 7 गुण होते हैं।
- दोनों राशियों का स्वामी एक ही हो अथवा उनके स्वामी परस्पर मित्र हों, तो भकूट दोष नष्ट हो जाता है।
- नवपंचक (5–9) और द्विर्द्वादश (2–12) संबंधों के लिए शास्त्रीय अपवाद बताए गए हैं।
प्राचीन ग्रंथों में भकूट दोष निवारण के श्लोक
1. मुहूर्त प्रदीप — शुभ षडाष्टक अपवाद
meṣāḷī vṛṣatule karkidhanuṣī siṃhamīnake ।
mithunāṃgane makara kuṃbhau ṣaṣṭāṣṭakeऽpi śubhapradau ।।
अर्थ: मेष–वृश्चिक, वृषभ–तुला, कर्क–धनु, सिंह–मीन, मिथुन–कन्या और मकर–कुंभ राशियाँ 6/8 संबंध में होने पर भी दोषकारक नहीं मानी जातीं। इनके स्वामी समान अथवा परस्पर मित्र होने के कारण ये षडाष्टक संबंध शुभ माने गए हैं।
2. कालप्रकाशिका — द्विर्द्वादश (2–12) अपवाद
vaśyatve rāśināthānāmaitryāṃ vā na bhakūṭakam ।
lābhadvitīye rāśīśa sakhye doṣo na vidyate ।।
अर्थ: राशि स्वामी परस्पर मित्र हों अथवा एक राशि दूसरी के वश्य में हो, तो 2/12 संबंध से उत्पन्न द्विर्द्वादश दोष लागू नहीं होता।
3. ज्योतिःप्रकाश — नवपंचक (5–9) का विशेष नियम
navame pañcame caiva varusya pañcame śubham ।
vadhvāśca pañcame tvasat putrahā prakīrtitam ।।
अर्थ: जब वधू की राशि वर की राशि से नवम और वर की राशि वधू की राशि से पंचम हो, तो यह योग शुभ है। इसके विपरीत, जब वर की राशि वधू से नवम और वधू की राशि वर से पंचम हो, तो इसे संतान के लिए हानिकारक बताया गया है।
विषय-सूची
- 1. आश्लेषा आदि नक्षत्र दोष निवारण
- 2. विवाह मिलान में अष्टकूट — परिचय
- 3. 1. वर्ण कूट विचार
- 4. 2. वश्य कूट विचार
- 5. 3. तारा कूट विचार
- 6. 4. योनि कूट विचार
- 7. 5. ग्रह मैत्री कूट विचार
- 8. 6. गण कूट विचार
- 9. 7. भकूट विचार और दोष निवारण
- 10. 8. नाड़ी कूट विचार और दोष निवारण
- 11. वर्ग कूट और अन्य मिलान विचार
- 12. कुज दोष विचार और शास्त्रीय निवारण नियम

