शुक्र अस्त 2025-2026: तिथियाँ और वर्जित शुभ कार्य
भारतीय ज्योतिष और सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य के लिए 'मुहूर्त' का होना अत्यंत आवश्यक है। विवाह और गृहस्थ सुख का कारक ग्रह 'शुक्र' (Venus) माना जाता है। जब शुक्र ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाता है, तो वह 'अस्त' (Combust) हो जाता है, जिसे आम भाषा में 'तारा डूबना' कहते हैं। इस अवधि में शुक्र बलहीन हो जाता है, इसलिए शुभ कार्यों की मनाही होती है।
शुक्र अस्त (तारा डूबने) की तिथियाँ
पंचांग गणना के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत से लेकर 2026 के प्रारंभ तक शुक्र मौद्यमी (अस्त) रहेगा।
- प्रारंभ तिथि: 26 नवंबर 2025 (बुधवार)
- समाप्ति तिथि: 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)
लगभग 3 महीने की इस अवधि में विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए शुद्ध मुहूर्त उपलब्ध नहीं होंगे।
शुक्र अस्त (मौद्यमी) में वर्जित कार्य
धर्मशास्त्रों के अनुसार, गुरु या शुक्र के अस्त होने पर किए गए कार्यों में दैवीय आशीर्वाद की कमी रहती है। अतः निम्नलिखित कार्य इस दौरान नहीं करने चाहिए:
- विवाह संस्कार: शादी-विवाह, सगाई या रोक की रस्में।
- गृह कर्म: नींव पूजन (शिलान्यास), गृह प्रवेश (नये घर में जाना)।
- उपनयन और शिक्षा: जनेऊ संस्कार (यज्ञोपवीत), विद्यारंभ संस्कार।
- प्रतिष्ठा: मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा, यज्ञ-अनुष्ठान या मंदिर निर्माण का कार्य।
- अन्य संस्कार: मुंडन, कर्णवेध (कान छिदवाना), महादान, कूप-तड़ाग (कुआं या तालाब) खुदवाना और नए व्रत का उद्यापन या प्रारंभ।
इस दौरान क्या कर सकते हैं? (विहित कार्य)
अक्सर लोग सोचते हैं कि तारा डूबने पर कोई भी पूजा-पाठ नहीं हो सकता, जो कि गलत धारणा है। कुछ नित्य नैमित्तिक कर्म और शांति उपाय इस दौरान अवश्य किए जा सकते हैं:
- शांति पूजा: आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल आदि गंडमूल नक्षत्रों की शांति पूजा।
- स्वास्थ्य उपाय: रोग निवृत्ति के लिए महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक या नवग्रह शांति हवन।
- नित्य कर्म: दैनिक पूजा, संध्या वंदन और पहले से चले आ रहे व्रत।
- संस्कार: मास-आधारित संस्कार जैसे अन्नप्राशन (बच्चे को पहली बार अन्न खिलाना) और पुंसवन संस्कार किए जा सकते हैं।
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