संपूर्ण चंद्र ग्रहण - 3 मार्च, 2026: ज्योतिषीय प्रभाव और राशिफल
केतु ग्रस्त चंद्र ग्रहण: सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र पर प्रभाव
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का विशेष आध्यात्मिक और भविष्यवाणी महत्व है। 3 मार्च, 2026, मंगलवार को लगने वाला यह संपूर्ण चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है। यह एक केतु ग्रस्त चंद्र ग्रहण है, क्योंकि इस समय चंद्रमा केतु के साथ युति में होगा। इसका प्रभाव मानसिक शांति, स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था पर गहराई से पड़ेगा।
ग्रहण की दृश्यता और वैश्विक स्थिति
यह चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण चंद्रोदय के समय दिखाई देगा, जिसे ज्योतिषीय भाषा में 'ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण' कहा जाता है। देश के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति) काल दिखाई देगा।
प्रमुख शहरों में ग्रहण का समय (स्थानीय समयानुसार)
| शहर / देश | ग्रहण प्रारंभ (स्थानीय समय) | ग्रहण समाप्त (स्थानीय समय) |
|---|---|---|
| हैदराबाद (भारत) | 06:23 PM (चंद्रोदय) | 06:47 PM |
| न्यूयॉर्क (USA) | 04:47 AM | 06:22 AM (अस्ताचल) |
| सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) | 08:50 PM | 12:17 AM (4 मार्च) |
| टोक्यो (जापान) | 06:50 PM | 10:17 PM |
नोट: ऊपर दिए गए समय केवल विशिष्ट स्थानों के लिए हैं। अपने शहर या दुनिया भर के किसी भी स्थान का सटीक समय जानने के लिए हमारे Lunar Eclipse Date & Time Finder टूल का उपयोग करें।
हैदराबाद शहर के लिए मार्च, 2026 संपूर्ण चंद्र ग्रहण का समय
| विवरण | समय / विवरण |
|---|---|
| आंशिक ग्रहण प्रारंभ | मार्च 3, 2026, 3:20:05 PM |
| अधिकतम ग्रहण | मार्च 3, 2026, 5:03:41 PM |
| आंशिक ग्रहण समाप्त | मार्च 3, 2026, 6:47:17 PM |
| ग्रहण दृश्यता समय - प्रारंभ | मार्च 3, 2026, 6:23:09 PM |
| ग्रहण दृश्यता समय - समाप्त | मार्च 3, 2026, 6:47:17 PM |
| कुल पुण्यकाल | 0घं 24मि |
| सूतक काल (ग्रहण वेध) प्रारंभ | मार्च 3, 2026, 9:23:09 AM |
| बच्चों/वृद्धों/अस्वस्थ व्यक्तियों के लिए सूतक प्रारंभ | मार्च 3, 2026, 3:23:09 PM |
| सूतक काल (ग्रहण वेध) समाप्त | मार्च 3, 2026, 6:47:17 PM |
| ग्रहण के समय राशि | सिंह राशि |
| ग्रहण के समय नक्षत्र | पूर्वा फाल्गुनी |
द्वादश राशियों पर प्रभाव और उपाय
सिंह राशि में लगने वाले इस ग्रहण का सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। यहाँ विस्तृत विवरण और उपाय दिए गए हैं:
मेष राशि: पांचवें भाव में ग्रहण के कारण संतान की चिंता और निर्णयों में भ्रम हो सकता है। महत्वपूर्ण कार्यों को टालना बेहतर है।
उपाय: भगवान सुब्रमण्यम की आराधना करें।
वृषभ राशि: चौथे भाव में प्रभाव से पारिवारिक तनाव या माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है।
उपाय: ललिता सहस्रनाम का पाठ करना मानसिक शांति देगा।
मिथुन राशि: तीसरे भाव में ग्रहण आपके लिए
अत्यंत शुभ फल लेकर आएगा। साहस और कार्यों में सफलता मिलेगी।
उपाय: गरीबों को फल दान करें।
कर्क राशि: दूसरे भाव में ग्रहण धन हानि और वाणी में कठोरता ला सकता है। शांत रहने का प्रयास करें।
उपाय: 'ओम नमः शिवाय' का जाप करें या चंद्र ध्यान करें।
सिंह राशि: आपकी अपनी ही राशि (प्रथम भाव) में ग्रहण होने से स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर ध्यान दें। क्रोध से बचें।
उपाय: ग्रहण के बाद शिव अभिषेक करें और सफेद वस्त्रों का दान करें।
कन्या राशि: बारहवें भाव में प्रभाव के कारण व्यर्थ के खर्च और अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ रहेगा।
तुला राशि: ग्यारहवें भाव में ग्रहण आपके लिए
लाभकारी रहेगा। रुके हुए धन की प्राप्ति होगी।
उपाय: दुर्गाष्टकम का पाठ करें।
वृश्चिक राशि: दसवें भाव में ग्रहण आपके करियर में उन्नति और सम्मान दिलाएगा।
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
धनु राशि: नौवें भाव में प्रभाव से पिता के साथ वैचारिक मतभेद या यात्रा में बाधा आ सकती है।
उपाय: गुरु चरित्र का पाठ करें या दक्षिणामूर्ति स्तोत्र सुनें।
मकर राशि: आठवें भाव में ग्रहण के कारण स्वास्थ्य जोखिम और कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं। सावधानी बरतें।
उपाय: शिव पंचाक्षरी मंत्र का 108 बार जाप करें।
कुंभ राशि: सातवें भाव में ग्रहण जीवनसाथी या व्यावसायिक भागीदारों के साथ अनबन करा सकता है।
उपाय: नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें।
मीन राशि: छठे भाव में ग्रहण होने से
शत्रुओं पर विजय मिलेगी और पुराने रोगों से मुक्ति मिलेगी।
उपाय: शिव मंदिर जाकर दर्शन करें।
ग्रहण के दौरान सावधानियां और नियम
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना कल्याणकारी माना जाता है:
- गर्भवती महिलाएं: ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें और नुकीली वस्तुओं (चाकू, सुई) का उपयोग करने से बचें।
- भोजन नियम: ग्रहण के सूतक काल (वेध) से भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। खाने-पीने की वस्तुओं में दूर्वा (कुशा) डालना शुभ होता है।
- मंत्र जाप: ग्रहण काल में किया गया दान और मंत्र जाप अक्षय फल प्रदान करता है।
केतु ग्रस्त चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय विश्लेषण: चंद्र-केतु युति का प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से चंद्रमा हमारे मन, विचारों और मातृत्व का कारक है। इसके विपरीत, केतु वैराग्य, आत्महीनता (Self-doubt), भय और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। इस चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का केतु के साथ संयोग (केतु-ग्रस्त) होने के कारण, मन में नकारात्मक विचार और अवचेतन भय बढ़ने की संभावना है।
- आत्महीनता की भावना: इस समय व्यक्ति को अपने आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है या दूसरों की तुलना में खुद को कमतर आंकने की भावना प्रबल हो सकती है।
- मानसिक भय: भविष्य को लेकर अनावश्यक चिंता, असुरक्षा की भावना और मानसिक अशांति में वृद्धि होने की संभावना रहती है।
- वैराग्य और एकांत: सांसारिक कार्यों के प्रति अचानक अरुचि महसूस हो सकती है और एकांत में रहने या सबसे दूर होने की इच्छा बढ़ सकती है।
- निर्णय लेने की क्षमता में कमी: भ्रम और असमंजस के कारण सही समय पर सही निर्णय लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
- आध्यात्मिक झुकाव: इस युति के प्रभाव से मन भौतिक सुखों से हटकर आध्यात्मिकता, ध्यान या मंत्र साधना की ओर अग्रसर हो सकता है।
इस ग्रहण का प्रभाव सामान्यतः आगामी 6 महीनों तक रहता है। इस अवधि के दौरान भगवान शिव या मां दुर्गा की सच्चे मन से आराधना करने से मानसिक शक्ति और साहस प्राप्त होता है। अपने डरों को ईश्वर को समर्पित कर अपने कर्तव्यों का पालन करना ही सबसे उत्तम मार्ग है। चूंकि ये परिणाम व्यक्तिगत कुंडली की दशा और ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए अत्यधिक भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
ग्रहण - वैज्ञानिक और पारंपरिक दृष्टिकोण
ग्रहण एक अत्यंत अद्भुत खगोलीय घटना है। केवल इसलिए डरना सही नहीं है कि ग्रहण आपकी राशि के किसी संवेदनशील भाव में हो रहा है। कोई भी परिणाम ग्रहण के कारण नया नहीं आता, बल्कि वह आपकी जन्म कुंडली के ग्रहों पर आधारित होता है। हालांकि, हमारे पूर्वजों द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए निर्देश: ज्योतिष में चंद्रमा का मन पर सीधा प्रभाव माना गया है। इसलिए शास्त्रों में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखने से बचने की सलाह दी गई है, ताकि आने वाले बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा हो सके। हमारे पूर्वजों ने दिव्य ज्ञान के माध्यम से जो भी नियम बनाए हैं, वे मानवता के कल्याण के लिए ही हैं। शास्त्र केवल मार्ग दिखाते हैं, उनका पालन करना व्यक्तिगत विश्वास और विवेक का विषय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करना चाहिए?
उत्तर: ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की शुद्धि करें, स्नान करें और फिर पूजा-पाठ करके दान पुण्य करें।
प्रश्न: क्या ग्रहण के दौरान सो सकते हैं?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, स्वस्थ व्यक्तियों को ग्रहण काल में सोने से बचना चाहिए और भगवान का ध्यान करना चाहिए। बीमार और वृद्धों के लिए नियम शिथिल हैं।
प्रश्न: सूतक काल क्या है?
उत्तर: ग्रहण लगने से पहले की वह अवधि जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण प्रारंभ से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
निष्कर्ष: ग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत घटना है। अपनी राशि के अनुसार बताए गए उपायों को अपनाकर आप इसके नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं। व्यक्तिगत कुंडली के ग्रहों की स्थिति के आधार पर परिणामों में भिन्नता हो सकती है।


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