गोदावरी पुष्कर 2027–28: यदि गुरु का "पूर्ण वास" न हो तो पुष्कर कब मनाएं? (शास्त्रीय विश्लेषण)
गोदावरी पुष्कर की तिथियों को लेकर आपको इंटरनेट पर अलग-अलग जानकारी मिल सकती है। इस भ्रम का मुख्य कारण 2026-2028 के बीच गुरु (बृहस्पति) का सिंह राशि में होने वाला विचित्र गोचर है। सामान्यतः गुरु एक वर्ष तक एक राशि में स्थिर रहते हैं, लेकिन इस बार वक्रगति (Retrograde) के कारण वे टुकड़ों में (Split Transit) गोचर कर रहे हैं। ऐसी विशेष परिस्थिति में पुष्कर कब मनाने चाहिए, इस पर धर्मशास्त्र और पूर्व इतिहास (Precedents) क्या कहते हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
पुष्कर का नियम: वास्तव में पुष्कर कब होता है?
पुराणों के अनुसार बृहस्पति जिस राशि में होते हैं, उस राशि के स्वामी वाली नदी में पुष्कर आता है।
“सिंहे गोदावरी स्मृता” — जब तक गुरु सिंह राशि में हैं, तब तक गोदावरी नदी में पुष्कर काल माना जाता है।
हालाँकि, इसमें दो समय सबसे पवित्र माने जाते हैं:
- आदि पुष्कर: गुरु के राशि प्रवेश के प्रथम 12 दिन।
- अंत्य पुष्कर: गुरु के राशि छोड़ने से अंतिम 12 दिन पहले।
समस्या: गुरु का "पूर्ण वास (Full Stay)" न होने का क्या अर्थ है?
जब गुरु एक राशि में प्रवेश करते हैं, लगभग 12 महीने वहीं रहते हैं, और फिर अगली राशि में जाते हैं, तो उसे "पूर्ण वास" कहते हैं। उदाहरण के लिए 1967, 1979, 1991, 2003 और 2015 में गुरु सिंह राशि में "एक ही बार" में स्थिर रहे थे। इसलिए तब तिथियों को लेकर कोई भ्रम नहीं था।
लेकिन, 2027-28 में स्थिति अलग है। वक्रगति के कारण गुरु सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं, फिर वापस निकल रहे हैं, और फिर दोबारा प्रवेश कर रहे हैं। इसे तकनीकी रूप से खंडित गोचर (Split Transit) कहा जाता है।
2026–2028 गुरु गोचर (3 चरण)
दृक गणित (Scientific Panchangam) के अनुसार इस बार गुरु का गोचर कार्यक्रम इस प्रकार है:
| चरण (Phase) | समय (Period) | स्थिति (Status) |
|---|---|---|
| पहला चरण | 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक | अल्प काल (केवल 3 महीने रहकर वापस चले जाएंगे) |
| दूसरा चरण (मुख्य) | 26 जून 2027 से 26 नवंबर 2027 तक | स्थिर प्रवेश (Major Entry) |
| तीसरा चरण | 28 फरवरी 2028 से 24 जुलाई 2028 तक | अंतिम समय / अंत्य काल |
शास्त्रीय समाधान: पुष्कर कब मनाएं?
जब गुरु इस तरह कई बार राशि में आते-जाते हैं, तो "आदि पुष्कर" कब आयोजित करना चाहिए? इसके लिए धर्मशास्त्र का निर्णय और पिछला इतिहास एक स्पष्ट मार्ग दिखाते हैं।
नियम: यदि गुरु किसी राशि में दो बार प्रवेश करते हैं, तो "द्वितीय प्रवेश" (Second Entry) से ही आदि पुष्कर की गणना करने की परंपरा है। यदि पहला प्रवेश बहुत कम समय का और अस्थिर हो, तो स्थिर रहने वाले दूसरे प्रवेश को ही मानक माना जाता है।
इतिहास क्या कहता है? (1956 का उदाहरण)
यह कोई नई समस्या नहीं है। पहले 1956 में भी गुरु सिंह राशि में इसी तरह 'स्प्लिट' हुए थे। उस समय विद्वानों के निर्णय और सरकारी व्यवस्था में अंतर आ गया था।
- कुछ लोगों ने 3 मई से पुष्कर माना।
- अन्यों ने (सरकार सहित) 22 मई से आयोजन किया।
- परिणामस्वरूप, इतिहास गवाह है कि 1956 में गोदावरी पुष्कर पूरे 24 दिनों तक चले थे।
इसके आधार पर, 2027 में 26 जून को होने वाले दूसरे (स्थिर) प्रवेश को ही आदि पुष्कर के लिए मानक मानना सबसे तार्किक और सही दृष्टिकोण है।
गोदावरी पुष्कर 2027-28: सटीक तिथियां
उपरोक्त विश्लेषण और लाहिरी अयनांश (Lahiri Ayanamsa) के आधार पर गणना की गई तिथियां इस प्रकार हैं:
आदि पुष्कर (2027)
- प्रारंभ: 26 जून 2027 (शनिवार) (भारतीय समयानुसार सुबह 05:25 पर प्रवेश)
- समापन: 07 जुलाई 2027
- विवरण: जिस दिन गुरु सिंह राशि में स्थिर रूप से स्थापित होंगे, वहां से पहले 12 दिन।
अंत्य पुष्कर (2028)
- प्रारंभ: 13 जुलाई 2028
- समापन: 24 जुलाई 2028 (दोपहर 03:39 पर निकास)
- विवरण: गुरु के सिंह राशि को पूरी तरह छोड़कर कन्या राशि में जाने से पहले के अंतिम 12 दिन।
हमें क्या पालन करना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, जब तक गुरु सिंह राशि में हैं, तब तक गोदावरी के जल में पुष्कर कला विद्यमान रहती है। इसलिए जून 2027 से जुलाई 2028 के बीच कभी भी पवित्र स्नान करना पुण्यदायी है। हालाँकि, विशेष फल और पितृ कार्यों के लिए 26 जून - 7 जुलाई 2027 (आदि पुष्कर) या 13 जुलाई - 24 जुलाई 2028 (अंत्य पुष्कर) का चयन करना सबसे उत्तम है।
नोट: ये तिथियां दृक गणित (वैज्ञानिक गणना) और पिछली परंपराओं के विश्लेषण पर आधारित हैं। यदि सरकारी आधिकारिक घोषणा में तिथियों में कोई मामूली बदलाव होता है, तो उसे यहां अपडेट किया जाएगा।


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