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रक्षा बंधन 2025: राखी का शुभ समय, मंत्र, विधि


राखी कब बांधनी चाहिए?

रक्षा बंधन, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है, भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है और यह भारतीय परंपराओं का एक अनूठा और प्रिय त्योहार है। यह हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी आयु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। इस त्योहार का पूरा आशीर्वाद पाने के लिए इसे शास्त्रानुसार मनाना बहुत महत्वपूर्ण है। यह लेख वैदिक पंचांग के आधार पर 2025 में राखी मनाने के सही और शुभ समय पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका प्रदान करता है।

रक्षाबन्धनम् - श्रावणपूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूर्ताधिकोदयव्यापिन्यामपराह्णे प्रदोषे वा कार्यम् । इदं ग्रहणसंक्रान्तिदिनेऽपि कर्तव्यम् ।

उपरोक्त श्लोक का अर्थ है: रक्षा बंधन श्रावण पूर्णिमा के दिन, भद्रा करण से मुक्त अवधि में, अपराह्न (दोपहर) या प्रदोष (शाम) के समय में किया जाना चाहिए। यह अनुष्ठान उस दिन ग्रहण या संक्रांति होने पर भी किया जा सकता है।

इस शास्त्रीय निर्देश का पालन करते हुए, ऐसा दिन चुनना चाहिए जब पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के बाद छह घटी (2 घंटे 24 मिनट) से अधिक समय तक व्याप्त हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समारोह भद्रा काल (जिसे विष्टि करण भी कहा जाता है) के दौरान नहीं किया जाना चाहिए, जिसे एक अशुभ समय माना जाता है जो दुर्भाग्य ला सकता है। भद्रा से मुक्त समय में राखी बांधने से भाई-बहन के बीच का बंधन और मजबूत होता है।



वर्ष 2025 में, रक्षा बंधन शनिवार, 9 अगस्त को है। इस दिन, भद्रा काल प्रातःकाल में ही है और 01:53 AM पर समाप्त हो जाएगा। इसका मतलब है कि पूरा दिन भद्रा से मुक्त है और समारोह के लिए अत्यधिक शुभ है।

पंचांग के अनुसार, सबसे अच्छा समय अपराह्न काल (दोपहर की अवधि) और प्रदोष काल (गोधूलि वेला) है। दिल्ली/एनसीआर के लिए अनुमानित शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं (कृपया अपने शहर के लिए सटीक समय की पुष्टि करें):

  • अपराह्न काल मुहूर्त: दोपहर 01:46:33 PM से 04:26:20 PM
  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 07:06:08 PM से 09:14:27 PM
(ध्यान दें: यह समय दिल्ली के लिए है। चूंकि यह स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है, अपने क्षेत्र के दोपहर और शाम के समय जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

राखी बांधने की विधि

अनुष्ठान को सही ढंग से करने से इसका आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है। यहाँ एक सरल चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका है:

  1. पूजा की थाली तैयार करें: एक थाली में राखी, एक दीपक, तिलक के लिए रोली (कुमकुम), अक्षत (साबुत चावल), और मिठाई सजाएं।
  2. भाई को बिठाएं: अपने भाई को एक छोटी चौकी या आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बिठाएं।
  3. तिलक लगाएं: सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं, उसके बाद अक्षत लगाएं।
  4. राखी बांधें: अब राखी मंत्र का जाप करते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर पवित्र धागा बांधें।
  5. आरती करें और मिठाई खिलाएं: भाई की आरती उतारें और फिर उसे मिठाई खिलाएं।
  6. वचन और उपहारों का आदान-प्रदान: भाई अपनी बहन को उपहार देता है और हमेशा उसकी रक्षा करने का वचन देता है।

राखी बांधने का मंत्र और उसका अर्थ

राखी बांधते समय इस शक्तिशाली मंत्र का पाठ करें:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।

मंत्र का अर्थ:
"जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षे (राखी), तुम स्थिर रहना, तुम विचलित न होना।"

भद्रा क्या है और राखी के लिए इसे अशुभ क्यों माना जाता है?

वैदिक ज्योतिष में, भद्रा एक अशुभ ज्योतिषीय अवधि है जिसमें कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, जिसमें राखी बांधना भी शामिल है। ऐसी मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए कार्यों का फल अच्छा नहीं होता। इसलिए, शास्त्र रक्षा बंधन की रस्म भद्रा समाप्त होने के बाद ही करने की सलाह देते हैं।

अगर मेरा भाई दूसरे देश या टाइम ज़ोन में रहता है तो क्या करें?

रक्षा बंधन का त्योहार हमेशा भाई के स्थानीय समय के अनुसार मनाया जाना चाहिए। आपको अपने भाई के शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार पूर्णिमा तिथि और भद्रा काल की जांच करनी चाहिए और उन्हें वहां के शुभ मुहूर्त में ही राखी बंधवाने की सलाह देनी चाहिए।

क्या सूतक काल में राखी बांधी जा सकती है?

सूतक काल परिवार में किसी के जन्म या मृत्यु के बाद की अशुद्धि की अवधि होती है। आमतौर पर इस दौरान धार्मिक समारोह और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस विषय में अपने पारिवारिक पुरोहित से मार्गदर्शन लेना सबसे अच्छा है, क्योंकि परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।



लेखक के बारे में

यह लेख हमारे लेखक श्री गोल्लापल्ली संतोष कुमार शर्मा द्वारा शोध और लेखन के माध्यम से लिखा गया है, जो https://www.onlinejyotish.com/ से वैदिक ज्योतिष और परंपराओं के विशेषज्ञ हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि त्योहारों और मुहूर्तों से संबंधित सभी जानकारी धर्म सिंधु और द्रिक गणित पंचांग गणना जैसे प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त सटीक और विश्वसनीय हो। हमारा उद्देश्य आपको अपनी परंपराओं को सार्थक और आत्मविश्वास से मनाने में मदद करना है।


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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।