भीष्म अष्टमी, भीष्म एकादशी 2026: पितृ कृपा और मोक्ष का मार्ग
भारतीय पंचांग के अनुसार माघ मास अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी और एकादशी तिथियां महाभारत के पितामह भीष्म से जुड़ी हुई हैं। एक ज्योतिषी के रूप में, मैं आपको इन पर्वों के पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्यों और ग्रह दोष निवारण में इनकी भूमिका के बारे में बता रहा हूँ।
भीष्म पितामह: त्याग का दूसरा नाम
महाभारत में गंगापुत्र देवव्रत ने अपने पिता शांतनु की खुशी के लिए न केवल राजपाट का त्याग किया, बल्कि आजीवन अविवाहित रहने की भीषण प्रतिज्ञा भी की। इसी अटल संकल्प के कारण उनका नाम भीष्म पड़ा। उन्हें प्राप्त 'इच्छा मृत्यु' के वरदान के कारण, उन्होंने उत्तरायण पुण्यकाल आने तक बाणों की शय्या पर प्रतीक्षा की और फिर अपने प्राण त्यागे।
भीष्म अष्टमी
माघ शुक्ल अष्टमी के दिन ही भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागकर मोक्ष प्राप्त किया था। इस दिन भीष्म तर्पण करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। सामान्यतः पितृ तर्पण वही करते हैं जिनके पिता जीवित नहीं हैं, लेकिन भीष्म पितामह नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे, इसलिए समस्त संसार उनकी संतान के समान है। यही कारण है कि इस दिन हर कोई उन्हें तर्पण अर्पित कर सकता है।
यह जानने के लिए यहाँ क्लिक करें कि इस वर्ष भीष्म अष्टमी कब है।
भीष्म एकादशी और विष्णु सहस्रनाम
इसे जया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। बाणों की शय्या पर लेटे हुए भीष्म पितामह ने भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति में धर्मराज युधिष्ठिर को जो उपदेश दिया था, वही विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र है। यह केवल भगवान के नाम नहीं हैं, बल्कि कलियुग में मानसिक शांति और आरोग्य प्रदान करने वाला एक अद्भुत कवच है।
जानें इस वर्ष भीष्म एकादशी कब है, जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।
विष्णु सहस्रनाम के ज्योतिषीय और आध्यात्मिक लाभ:
- ग्रह दोष शांति: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ कुंडली के सभी नौ ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने की शक्ति रखता है, विशेषकर बुध और शनि की प्रतिकूलता में यह रामबाण है।
- मानसिक शांति: तनाव और अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए इसका श्रवण या पाठ मन को स्थिर और शांत बनाता है।
- भाग्य और समृद्धि: भगवान विष्णु के एक हजार नामों के उच्चारण से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और दरिद्रता का नाश होता है।
- पापों का क्षय: जैसा कि स्वयं भीष्म पितामह ने कहा था, यह स्तोत्र मनुष्य को सभी पापों और बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।
ज्योतिष शब्दावली - ग्लॉसरी (Glossary)
- नैष्ठिक ब्रह्मचारी: वह व्यक्ति जो जीवन भर ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है।
- इच्छा मृत्यु: अपनी इच्छा के अनुसार समय चुनकर मृत्यु प्राप्त करने की शक्ति।
- शरशय्या (बाणों की शय्या): बाणों से निर्मित बिस्तर।
- तर्पण: जल और तिल के माध्यम से पितरों को तृप्त करने की क्रिया।
निष्कर्ष
भीष्म पितामह द्वारा दिखाया गया धर्म का मार्ग आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। उनके त्याग और धर्म के प्रति निष्ठा की स्मृति में ये दो दिन हमारी संस्कृति में रचे-बसे हैं। अष्टमी के दिन उन्हें कृतज्ञता के साथ तर्पण देना और एकादशी के दिन उनके द्वारा दिए गए ज्ञान (विष्णु सहस्रनाम) का स्मरण करना हमारा परम धर्म है।
क्या आपकी कुंडली में पितृ दोष का प्रभाव है? अन्य शंकाओं और परामर्श के लिए हमारी वेबसाइट onlinejyotish.com पर आएं।


The Hindu Jyotish app helps you understand your life using Vedic astrology. It's like having a personal astrologer on your phone!
Are you interested in knowing your future and improving it with the help of Vedic Astrology? Here is a free service for you. Get your Vedic birth chart with the information like likes and dislikes, good and bad, along with 100-year future predictions, Yogas, doshas, remedies and many more. Click below to get your free horoscope.