नाड़ी कूट विचार और शास्त्रीय दोष निवारण
नाड़ी विभाजन और शास्त्रीय सिद्धांत
ज्येष्ठार्यम्णे शनीहराधिपभयुगयुगं दास्रभं चैकनाडी
पुष्येन्दुत्वाष्ट्रमित्रान्तकवसुजलभं योनिबुध्ने च मध्या ।
वाय्वग्निव्यालविश्वोडुयुगयुगमथो पौष्णभं चापरास्या-
द्दम्पत्योरेकनाड्यां परिणयनमसन्मध्यनाड्यां हि मृत्युः ।। ३४ ।।
- अष्टकूट मिलान में नाड़ी कूट के सर्वाधिक 8 गुण होते हैं।
- नाड़ियाँ अलग हों तो 8 गुण और एक ही नाड़ी, अर्थात एकनाड़ी, होने पर 0 गुण मिलते हैं।
- चंद्र राशि समान और नक्षत्र अलग हों, अथवा नक्षत्र समान और चंद्र राशियाँ अलग हों, तो नाड़ी दोष नष्ट हो जाता है।
- रोहिणी, आर्द्रा, मघा, विशाखा, पुष्य, श्रवण, उत्तराभाद्रपद और भरणी को एकनाड़ी दोष के पारंपरिक अपवादों में गिना गया है।
- कुछ शास्त्रीय मत नाड़ी दोष को विशेष रूप से ब्राह्मण वर्ण के लिए प्रमुख मानते हैं।
नाड़ी के प्रकार और उनके नक्षत्र
| नाड़ी | प्रकृति | नक्षत्र (9) |
|---|---|---|
| आदि नाड़ी | वात | अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद |
| मध्य नाड़ी | पित्त | भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तराभाद्रपद |
| अंत्य नाड़ी | कफ | कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती |
नाड़ी कूट गुण तालिका
| वधू \ वर | आदि | मध्य | अंत्य |
|---|---|---|---|
| आदि | 0 | 8 | 8 |
| मध्य | 8 | 0 | 8 |
| अंत्य | 8 | 8 | 0 |
व्याख्या: श्लोक 34 में मुहूर्त चिंतामणि एक ही नाड़ी में जन्मे दो व्यक्तियों का विवाह अशुभ बताया गया है। मध्य–मध्य नाड़ी के मेल को विशेष रूप से गंभीर संकट से जोड़ा गया है। इसलिए इस श्लोक में मध्य नाड़ी की पुनरावृत्ति को आदि–आदि अथवा अंत्य–अंत्य से अधिक दोषपूर्ण माना गया है। नाड़ी कूट का संबंध स्वास्थ्य, शारीरिक प्रकृति और संतान की संभावना से माना जाता है。
प्राचीन ग्रंथों में नाड़ी दोष निवारण नियम
1. ज्योतिर्निबंध — नक्षत्र अथवा राशि भेद का अपवाद
rukṣaikye rāśibhede ca rāśyaikye rukṣabhinnake ।
nāḍīdoṣo na vidyate tathā gaṇakṛto raṇaḥ ।।
अर्थ: वर-वधू का नक्षत्र समान पर चंद्र राशियाँ भिन्न हों, अथवा चंद्र राशि समान पर नक्षत्र भिन्न हों, तो नाड़ी दोष और गण दोष लागू नहीं होते।
2. वसिष्ठ संहिता — वर्ण आधारित विचार
viprāṇāṃ nāḍīdoṣastu kṣatriyāṇāṃ bhakūṭakam ।
vaiśyānāṃ gaṇadoṣastu śūdrāṇāṃ varṇadoṣakaḥ ।।
अर्थ: इस श्लोक में ब्राह्मणों के लिए नाड़ी दोष, क्षत्रियों के लिए भकूट दोष, वैश्यों के लिए गण दोष और शूद्रों के लिए वर्ण दोष को प्रमुख माना गया है। इसी आधार पर कुछ परंपरागत ज्योतिषी अन्य वर्णों में नाड़ी दोष की तीव्रता कम मानते हैं।
3. नारद संहिता — विशेष नक्षत्र अपवाद
rohiṇyārdrā maghā puṣyo viśākhā śravaṇo bharaṇī ।
uttarābhādrapaccaiva ekanāḍī na doṣakṛt ।।
अर्थ: इस पारंपरिक अपवाद के अनुसार वर-वधू रोहिणी, आर्द्रा, मघा, पुष्य, विशाखा, श्रवण, भरणी या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे हों, तो एकनाड़ी दोष लागू नहीं होता।
4. मुहूर्त गणपति — राशि अथवा नवांश स्वामियों की मैत्री
rāśyādhipau cetsuhṛdau samau vā navāṃśanāthau suhṛdau yadāstām ।
tadāpi nāḍījajanito na doṣaḥ sarvairbudhaiḥ samparikīrtitoऽyam ।।
अर्थ: वर-वधू की चंद्र राशियों के स्वामी परस्पर मित्र या सम हों, अथवा उनके नवांश स्वामी मित्र और बलवान हों, तो नाड़ी दोष नष्ट हो जाता है।
5. नाड़ी दोष परिहार - प्राचीन शास्त्रों के अकाट्य प्रमाण (मुहूर्त चिंतामणि / पीयूषधारा टीका)
आमतौर पर जब हम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से गुण मिलान करते हैं, और यदि वर-वधू दोनों की एक ही नाड़ी (जैसे आदि नाड़ी) हो, तो सॉफ्टवेयर 0 (शून्य) गुण दिखाता है। परंतु, हमारे पूजनीय महर्षियों ने कुछ विशेष और असाधारण नियम बताए हैं, जहाँ नाड़ी दोष पूरी तरह से प्रभावहीन और निष्फल हो जाता है।
नक्षत्र और राशि भेद का नियम:
उत्तर भारतीय ज्योतिष के सर्वोच्च प्रामाणिक ग्रंथ 'मुहूर्त चिंतामणि' और 'वशिष्ठ संहिता' के अनुसार, यदि वर और वधू की नाड़ी एक ही हो, लेकिन उनके नक्षत्र और राशियाँ पूरी तरह से भिन्न हों, तो विवाह अत्यंत शुभ होता है और नाड़ी दोष स्वतः समाप्त हो जाता है।
नक्षत्रभेदे राशीनां भेदे चैवैकनाडिका ।
शुभाय परिणेतव्या नाडीदोषो न विद्यते ।।
6. आर्द्रा आदि नक्षत्रों के लिए विशेष छूट
मुहूर्त चिंतामणि की 'पीयूषधारा' टीका स्पष्ट रूप से कुछ विशेष नक्षत्रों को आदि नाड़ी दोष से मुक्त करती है।
रोहिण्यार्द्रा मृगेन्द्राग्नि पुष्यश्रवणपौष्णभम् ।
अहिर्बुध्न्यर्क्षमेताषां नाडी दोषो न विद्यते ।।
अन्वय: महर्षियों के इस प्रामाणिक कथन के अनुसार, यदि जन्म रोहिणी, आर्द्रा, मृगशिरा, कृत्तिका, पुष्य, श्रवण, रेवती या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ हो, तो नाड़ी दोष का नियम लागू ही नहीं होता। यदि वधू का जन्म आर्द्रा नक्षत्र में हुआ है, तो यह मिलान नाड़ी दोष से पूर्णतः शुद्ध और मुक्त है।
विषय-सूची
- 1. आश्लेषा आदि नक्षत्र दोष निवारण
- 2. विवाह मिलान में अष्टकूट — परिचय
- 3. 1. वर्ण कूट विचार
- 4. 2. वश्य कूट विचार
- 5. 3. तारा कूट विचार
- 6. 4. योनि कूट विचार
- 7. 5. ग्रह मैत्री कूट विचार
- 8. 6. गण कूट विचार
- 9. 7. भकूट विचार और दोष निवारण
- 10. 8. नाड़ी कूट विचार और दोष निवारण
- 11. वर्ग कूट और अन्य मिलान विचार
- 12. मंगल दोष विचार और शास्त्रीय निवारण नियम

