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वर्ग कूट और अन्य विचार

अक्षर वर्ग और उनके फल

अकचटतपयशवर्गाः खगेशमार्जारसिंहशुनाम् ।
सर्पाखुमृगावीनां निजपञ्चमवैरिणामष्टौ ।। ३६ ।।

मुख्य बातें:
  • व्यक्ति के नाम के प्रथम अक्षर से वर्गाधिपति निर्धारित किया जाता है।
  • किसी भी वर्ग से पाँचवाँ वर्ग उसका शत्रु वर्ग माना जाता है।
  • जन्म कुंडली उपलब्ध न हो, तो नक्षत्र से संबंधित नामाक्षरों के आधार पर सीमित मिलान किया जा सकता है।

अक्षर वर्ग और उनके अधिपति

  • “अ” वर्ग: गरुड़
  • “क” वर्ग: बिल्ली
  • “च” वर्ग: सिंह
  • “ट” वर्ग: श्वान
  • “त” वर्ग: सर्प
  • “प” वर्ग: मूषक
  • “य” वर्ग: हिरण
  • “श” वर्ग: भेड़

नौकरी, ऋण, विवाह और निवास के लिए नक्षत्र मिलान

से व्याधमर्ण यूवतीनगरादिभं चेत् पूर्व -
हि मृत्यधनिभर्तृ पुरादिस‌द्भात् ।
सेवाविनाशधननाशनमर्तुनाश-ग्रामादिसौख्य-
हृदिदं क्रमशः प्रदिष्टम् ।। ३८ ।||

  • नौकरी: निर्दिष्ट क्रम में स्वामी का नक्षत्र पहले आए, तो सेवा निष्फल या अस्थिर मानी जाती है।
  • ऋण: ऋणी का नक्षत्र पहले आए, तो उधार दिया गया धन नष्ट होने का भय माना जाता है।
  • विवाह: अशुभ क्रम में स्त्री का नक्षत्र पहले आए, तो उद्धृत नियम के अनुसार वर को हानि का संकेत है।
  • निवास: ग्राम या स्थान का नक्षत्र पहले आए, तो वहाँ सुखपूर्वक निवास में बाधा मानी जाती है।

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