आश्लेषा आदि नक्षत्र दोष निवारण
नक्षत्र पाद के फल और दोष निवारण
- विशाखा के प्रथम तीन पाद पति के छोटे भाई के लिए सुखद माने गए हैं।
- मूल नक्षत्र का चौथा पाद ससुर के लिए शुभ माना गया है।
- आश्लेषा का पहला पाद सास के लिए शुभ फल देता है।
विशाखा नक्षत्र के प्रथम तीन चरणों (पादों) में जन्मी कन्या अपने पति के छोटे भाई को सुख देती है। मूल नक्षत्र के चौथे पाद में जन्मा बालक या बालिका अपने ससुर के लिए शुभ होता है। इसी प्रकार आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम पाद में जन्मी कन्या अपनी सास के लिए शुभ मानी जाती है।
व्याख्या: यहाँ ज्येष्ठा नक्षत्र दोष के निवारण का उल्लेख नहीं है। उन्नीसवें श्लोक में कहा गया है कि विशाखा नक्षत्र में जन्मी कन्या पति के छोटे भाई के लिए विनाश अथवा मृत्युकारक हो सकती है। परन्तु वर्तमान श्लोक अपवाद बताता है कि यदि कन्या विशाखा के प्रथम तीन पादों, अर्थात उसके तीन-चौथाई भाग में जन्मी हो, तो वह पति के छोटे भाई को सुख देती है।
इसी प्रकार मूल के चौथे पाद में जन्मा बालक या बालिका ससुर के लिए शुभ होता है। इस नक्षत्र के केवल प्रथम तीन पाद ही ससुर के लिए हानिकारक माने गए हैं। आश्लेषा में जन्मे बालक या बालिका को सामान्यतः सास के लिए हानिकारक कहा गया है, किन्तु इसका प्रथम पाद विशेष रूप से शुभ माना गया है।
विषय-सूची
- 1. आश्लेषा आदि नक्षत्र दोष निवारण
- 2. विवाह मिलान में अष्टकूट — परिचय
- 3. 1. वर्ण कूट विचार
- 4. 2. वश्य कूट विचार
- 5. 3. तारा कूट विचार
- 6. 4. योनि कूट विचार
- 7. 5. ग्रह मैत्री कूट विचार
- 8. 6. गण कूट विचार
- 9. 7. भकूट विचार और दोष निवारण
- 10. 8. नाड़ी कूट विचार और दोष निवारण
- 11. वर्ग कूट और अन्य मिलान विचार
- 12. कुज दोष विचार और शास्त्रीय निवारण नियम

