OnlineJyotish.com

आश्लेषा आदि नक्षत्र दोष निवारण

नक्षत्र पाद के फल और दोष निवारण

मुख्य बातें:
  • विशाखा के प्रथम तीन पाद पति के छोटे भाई के लिए सुखद माने गए हैं।
  • मूल नक्षत्र का चौथा पाद ससुर के लिए शुभ माना गया है।
  • आश्लेषा का पहला पाद सास के लिए शुभ फल देता है।

विशाखा नक्षत्र के प्रथम तीन चरणों (पादों) में जन्मी कन्या अपने पति के छोटे भाई को सुख देती है। मूल नक्षत्र के चौथे पाद में जन्मा बालक या बालिका अपने ससुर के लिए शुभ होता है। इसी प्रकार आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम पाद में जन्मी कन्या अपनी सास के लिए शुभ मानी जाती है।

व्याख्या: यहाँ ज्येष्ठा नक्षत्र दोष के निवारण का उल्लेख नहीं है। उन्नीसवें श्लोक में कहा गया है कि विशाखा नक्षत्र में जन्मी कन्या पति के छोटे भाई के लिए विनाश अथवा मृत्युकारक हो सकती है। परन्तु वर्तमान श्लोक अपवाद बताता है कि यदि कन्या विशाखा के प्रथम तीन पादों, अर्थात उसके तीन-चौथाई भाग में जन्मी हो, तो वह पति के छोटे भाई को सुख देती है।

इसी प्रकार मूल के चौथे पाद में जन्मा बालक या बालिका ससुर के लिए शुभ होता है। इस नक्षत्र के केवल प्रथम तीन पाद ही ससुर के लिए हानिकारक माने गए हैं। आश्लेषा में जन्मे बालक या बालिका को सामान्यतः सास के लिए हानिकारक कहा गया है, किन्तु इसका प्रथम पाद विशेष रूप से शुभ माना गया है।

विषय-सूची


Vedic Astrology/ Vastu/ Hindu Culture Articles: A Comprehensive Library

Past event timings, year-specific festival guides and historical one-time articles are kept here for reference.

2026 and recent one-time articles

2025 and earlier one-time articles