वश्य कूट विचार
वश्य के प्रकार और गुण तालिका
हित्वा मृगेन्द्रं नरराशिवश्याः सर्वे तथैषां जलजाश्च भक्ष्याः ।
सर्वेऽपि सिंहस्य वशे विनालिं ज्ञेयं नराणां व्यवहारतोऽन्यत् ।। २३ ।।
- वश्य कूट के अधिकतम 2 गुण होते हैं।
- राशियों को चतुष्पद, नर, जलचर, वनचर और कीट वर्गों में बाँटा गया है।
- यह कूट दंपति के बीच परस्पर आकर्षण, प्रभाव और समायोजन क्षमता का विचार करता है।
वश्य का अर्थ प्रभाव या आकर्षण है, जबकि भक्ष्य का शाब्दिक अर्थ वह है जिसे भोगा या वश में किया जा सके। विवाह मिलान में इस कूट से भावी दंपति के परस्पर आकर्षण और प्रतिक्रिया का सांकेतिक विचार किया जाता है। इसके 2 गुण होते हैं।
पाँच वश्यों का राशि विभाजन
- चतुष्पद: मेष, वृषभ, धनु का उत्तरार्ध और मकर का पूर्वार्ध।
- नर (मानव): मिथुन, कन्या, तुला, धनु का पूर्वार्ध और कुंभ।
- जलचर: कर्क, मकर का उत्तरार्ध और मीन।
- वनचर: सिंह।
- कीट: वृश्चिक।
वश्य कूट गुण तालिका
| वधू \ वर | चतुष्पद | नर | जलचर | वनचर | कीट |
|---|---|---|---|---|---|
| चतुष्पद | 2 | 1 | 1 | 0 | 1 |
| नर | 1 | 2 | 1/2 | 0 | 1 |
| जलचर | 1 | 1/2 | 2 | 1 | 1 |
| वनचर | 0 | 0 | 1 | 2 | 0 |
| कीट | 1 | 0 | 1 | 0 | 2 |
विषय-सूची
- 1. आश्लेषा आदि नक्षत्र दोष निवारण
- 2. विवाह मिलान में अष्टकूट — परिचय
- 3. 1. वर्ण कूट विचार
- 4. 2. वश्य कूट विचार
- 5. 3. तारा कूट विचार
- 6. 4. योनि कूट विचार
- 7. 5. ग्रह मैत्री कूट विचार
- 8. 6. गण कूट विचार
- 9. 7. भकूट विचार और दोष निवारण
- 10. 8. नाड़ी कूट विचार और दोष निवारण
- 11. वर्ग कूट और अन्य मिलान विचार
- 12. कुज दोष विचार और शास्त्रीय निवारण नियम

