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12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण – अमेरिका समय, सूतक काल और राशि फल

पूर्ण सूर्य ग्रहण – अमेरिका में आंशिक दृश्यता और वैदिक ज्योतिषीय विश्लेषण

बुधवार, 12 अगस्त 2026 को होने वाली खगोलीय घटना विश्व स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) है। पूर्णता का मार्ग Greenland, Iceland, northern Russia, Atlantic Ocean, Spain और Portugal के एक छोटे भाग से होकर गुजरेगा। अमेरिका में पूर्ण ग्रहण कहीं भी दिखाई नहीं देगा; लेकिन उत्तरी और पूर्वी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए ग्रहण से जुड़े किसी भी नियम का पालन करने की ज़रूरत नहीं है। यह लेख उन लोगों के लिए लिखा गया है जो उन शहरों में रहते हैं जहाँ ग्रहण दिखाई देगा।

वैदिक ज्योतिष में निरयण/Lahiri राशि चक्र के अनुसार ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र क्षेत्र में रहते हैं। खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह ग्रहण चंद्रमा के descending node के निकट होता है; इसलिए ज्योतिषीय भाषा में इसे केतु संबंधी ग्रहण कहा जा सकता है। यहां राहु और केतु को भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि सूर्यपथ और चंद्रकक्षा के छेदन-बिंदुओं के रूप में समझना उचित है।

12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण अमेरिका समय और ज्योतिषीय प्रभाव - OnlineJyotish.com
मुख्य जानकारी:
  • तिथि: बुधवार, 12 अगस्त 2026
  • विश्व स्तर पर ग्रहण: पूर्ण सूर्य ग्रहण
  • अमेरिका में: केवल कुछ क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण
  • वैदिक राशि: कर्क
  • नक्षत्र: अश्लेषा
  • भारत में: ग्रहण दिखाई नहीं देगा; इसलिए स्थानीय सूतक लागू नहीं होगा

अमेरिका के प्रमुख भारतीय-बहुल शहरों में सूर्य ग्रहण का समय

नीचे दिए गए सभी समय संबंधित शहर के स्थानीय समय हैं। सामान्य सूतक को ग्रहण स्पर्श से लगभग 12 घंटे पहले और बच्चों, वृद्धों तथा रोगियों के लिए परंपरागत शिथिल अवधि को लगभग 3 घंटे पहले दिखाया गया है।

शहर ग्रहण स्पर्श मध्य / अधिकतम ग्रहण मोक्ष सामान्य सूतक बच्चे / वृद्ध / रोगी TZ
Boston, Massachusetts 1:01 PM 1:55 PM 2:46 PM 1:01 AM 10:01 AM EDT
New York City, New York 1:07 PM 1:54 PM 2:38 PM 1:07 AM 10:07 AM EDT
Jersey City, New Jersey 1:07 PM 1:54 PM 2:38 PM 1:07 AM 10:07 AM EDT
Edison, New Jersey 1:08 PM 1:54 PM 2:37 PM 1:08 AM 10:08 AM EDT
Philadelphia, Pennsylvania 1:11 PM 1:53 PM 2:35 PM 1:11 AM 10:11 AM EDT
Washington, D.C. 1:17 PM 1:53 PM 2:27 PM 1:17 AM 10:17 AM EDT
Fairfax, Virginia 1:18 PM 1:52 PM 2:26 PM 1:18 AM 10:18 AM EDT
Detroit, Michigan 1:03 PM 1:36 PM 2:08 PM 1:03 AM 10:03 AM EDT
Cleveland, Ohio 1:07 PM 1:40 PM 2:12 PM 1:07 AM 10:07 AM EDT
Chicago, Illinois 12:16 PM 12:28 PM 12:40 PM 12:16 AM 9:16 AM CDT

समय संबंधी टिप्पणी: Boston, New York, Philadelphia, Washington D.C. और Detroit के समय NASA के प्रकाशित स्थानीय eclipse circumstances से मिलाए गए हैं; New Jersey, Fairfax, Cleveland और Chicago के समय स्थानीय eclipse calculations से जांचे गए हैं। एक ही metropolitan area में सटीक स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है।

जहां ग्रहण दिखाई नहीं देगा: Dallas, Houston, Atlanta, Los Angeles, San Jose/California और Seattle जैसे कई भारतीय-बहुल अमेरिकी शहरों में 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। पारंपरिक visibility-based नियम के अनुसार जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक मान्य नहीं माना जाता।
Chicago के लिए विशेष सूचना: Chicago में ग्रहण तकनीकी रूप से आंशिक दिखाई देगा, लेकिन उसका स्थानीय magnitude बहुत छोटा है। इसलिए सूर्य की आकृति में परिवर्तन सामान्य आंख से स्पष्ट न भी लगे। फिर भी बिना सुरक्षित solar filter के सूर्य को सीधे न देखें।

सूतक काल – पारंपरिक नियम

दृश्य सूर्य ग्रहण के लिए सूतक सामान्यतः चार प्रहर, लगभग 12 घंटे पहले माना जाता है। बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए भोजन संबंधी नियमों में शिथिलता देते हुए एक प्रहर, लगभग 3 घंटे पहले से पालन की परंपरा है। सूतक केवल उस स्थान पर लागू होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है और ग्रहण मोक्ष के साथ समाप्त होता है।

सूतक और ग्रहण काल में नए मांगलिक कार्य तथा नए शुभ आरंभ टालना परंपरा है। किंतु मंत्रजप, इष्टदेव स्मरण, ध्यान और स्तोत्र पाठ को ग्रहणकाल में उचित आध्यात्मिक साधना माना जाता है।

सूर्य ग्रहण सुरक्षित रूप से कैसे देखें?

आंशिक सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को सीधे न देखें। केवल ISO 12312-2 मानक के अनुरूप eclipse glasses या सुरक्षित solar viewer का उपयोग करें। सामान्य sunglasses सुरक्षित नहीं हैं। उचित solar filter के बिना binoculars, telescope या camera optics से सूर्य को देखना भी खतरनाक है।

12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण – 12 राशियों पर प्रभाव

ज्योतिष में सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास, पिता, स्वास्थ्य, अधिकार, प्रतिष्ठा और पेशे का कारक माना जाता है। चूंकि यह ग्रहण कर्क राशि में होता है, इसलिए नीचे दिए गए सामान्य फल जन्म राशि (चंद्र राशि) से कर्क राशि की भाव स्थिति के आधार पर देखे गए हैं।

जन्म राशि ग्रहण भाव सामान्य स्थिति
मेष चौथा सावधानी
वृषभ तीसरा अनुकूल
मिथुन दूसरा मध्यम / मिश्रित
कर्क पहला सावधानी
सिंह बारहवां सावधानी
कन्या ग्यारहवां अनुकूल
तुला दसवां मध्यम / मिश्रित
वृश्चिक नौवां मध्यम / मिश्रित
धनु आठवां अधिक सावधानी
मकर सातवां सावधानी
कुंभ छठा अनुकूल
मीन पांचवां मध्यम / मिश्रित

उपायों का वर्गीकरण: तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में ग्रहण सामान्यतः अनुकूल माना गया है; इनके लिए सूर्य उपासना पर्याप्त है। दूसरे, पांचवें, नौवें और दसवें भाव में मध्यम फल होने के कारण सूर्य उपासना, आदित्य हृदय स्तोत्र तथा गेहूं या गुड़ का सामान्य दान किया जा सकता है।

पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में ग्रहण होने पर ग्रहण के बाद स्नान करके चांदी या तांबे से बनी सूर्य और केतु की प्रतिमा को घी के साथ, तथा लगभग 2 किलो गेहूं या गेहूं का आटा दान करना उचित माना गया है। संभव न हो तो उसके मूल्य के बराबर धनराशि अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान की जा सकती है।

मेष राशि – चौथा भाव

मेष राशि के लिए यह ग्रहण चौथे भाव—माता, गृह, मानसिक सुख, संपत्ति और वाहन में पड़ता है। घर के वातावरण में अस्थिरता, माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता, संपत्ति या वाहन संबंधी कामों में विलंब तथा मानसिक अशांति की स्थिति बन सकती है। भावनात्मक दबाव में बड़े निर्णय लेने से बचना उचित रहेगा।

ग्रहण उपाय: ग्रहण अशुभ स्थान में होने के कारण ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके सामर्थ्य के अनुसार चांदी या तांबे से बनी सूर्य और केतु की प्रतिमा को घी से भरे पात्र में रखकर, उसके साथ लगभग 2 किलो गेहूं या गेहूं का आटा दान करें। यदि यह संभव न हो तो उसके मूल्य के बराबर धनराशि का दान किया जा सकता है। सूर्य अथवा शिव उपासना भी शुभ है।

वृषभ राशि – तीसरा भाव

वृषभ राशि के लिए ग्रहण तीसरे भाव—पराक्रम, प्रयास और भाई-बहनों के स्थान में पड़ता है। यह सामान्यतः अनुकूल माना जाता है। साहस बढ़ सकता है, प्रयासों में सफलता मिल सकती है और प्रतिस्पर्धा में स्थिति मजबूत हो सकती है। भाई-बहनों से बातचीत में धैर्य रखें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण अनुकूल स्थान में होने के कारण विशेष ग्रहण शांति आवश्यक नहीं है। ग्रहण के बाद स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और सूर्य संबंधी स्तोत्रों का पाठ करें।

मिथुन राशि – दूसरा भाव

मिथुन राशि के लिए ग्रहण दूसरे भाव—धन, परिवार और वाणी में पड़ता है। खर्च बढ़ सकते हैं, आर्थिक मामलों में सावधानी की आवश्यकता हो सकती है और कठोर वाणी से पारिवारिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। आंखों की थकान या पहले से चल रही स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण के बाद स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें। आदित्य हृदय स्तोत्र या अन्य सूर्य स्तोत्रों का पाठ लाभकारी है। सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, गेहूं का आटा या गुड़ दान कर सकते हैं।

कर्क राशि – पहला भाव

कर्क राशि के लिए यह ग्रहण जन्म राशि में ही, प्रथम भाव में पड़ता है। इसलिए स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा, मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास पर इसका प्रभाव अधिक व्यक्तिगत रूप से अनुभव हो सकता है। चिंता या भावनात्मक आवेग में निर्णय लेने से बचें और दिनचर्या को व्यवस्थित रखें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण जन्म राशि में होने के कारण ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके चांदी या तांबे से बनी सूर्य और केतु की प्रतिमा को घी से भरे पात्र में रखकर, उसके साथ लगभग 2 किलो गेहूं या गेहूं का आटा दान करें। यदि यह संभव न हो तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार समतुल्य धनराशि दान कर सकते हैं।

सिंह राशि – बारहवां भाव

सिंह राशि के लिए ग्रहण बारहवें भाव—व्यय, निद्रा, एकांत और दूरस्थ स्थान में पड़ता है। अनियोजित खर्च, नींद में कमी, थकान या चिकित्सा संबंधी व्यय बढ़ सकते हैं। सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, इसलिए जीवनशक्ति और आत्मविश्वास को बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

ग्रहण उपाय: यह ग्रहण अशुभ व्यय स्थान में होने के कारण ग्रहण के बाद स्नान करके चांदी या तांबे से बनी सूर्य और केतु की प्रतिमा को घी के साथ दान करें और लगभग 2 किलो गेहूं या गेहूं का आटा भी दान करें। संभव न हो तो उसके बराबर धनराशि दान करें। सूर्य या शिव उपासना भी लाभकारी है।

कन्या राशि – ग्यारहवां भाव

कन्या राशि के लिए ग्रहण ग्यारहवें भाव—लाभ, मित्र-वृत्त और इच्छापूर्ति में पड़ता है। यह सामान्यतः अनुकूल स्थान है। रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं, उपयोगी संपर्कों से लाभ मिल सकता है और आय के अवसर बन सकते हैं। सकारात्मक स्थिति के बावजूद अत्यधिक सट्टा या जोखिम से बचें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण अनुकूल लाभ स्थान में होने के कारण विशेष ग्रहण शांति आवश्यक नहीं है। ग्रहण के बाद स्नान कर सूर्य उपासना और अर्घ्य करें। सामर्थ्य के अनुसार गेहूं या गुड़ दान किया जा सकता है।

तुला राशि – दसवां भाव

तुला राशि के लिए ग्रहण दसवें भाव—कर्म, पेशा, प्रतिष्ठा और अधिकार में पड़ता है। कार्यस्थल पर दबाव बढ़ सकता है, वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद की स्थिति बन सकती है और कार्य का उचित श्रेय मिलने में विलंब हो सकता है। नौकरी बदलने या सार्वजनिक विवाद में पड़ने से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण के बाद स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्याष्टक या अन्य सूर्य स्तोत्रों का पाठ करें। सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, गुड़ या तांबे के पात्र का दान किया जा सकता है।

वृश्चिक राशि – नौवां भाव

वृश्चिक राशि के लिए ग्रहण नौवें भाव—भाग्य, पिता, गुरु, धर्म और लंबी यात्राओं में पड़ता है। कामों में देरी, भाग्य का सहयोग कम महसूस होना, पिता के स्वास्थ्य की चिंता या लंबी यात्राओं में व्यवधान संभव है। गुरुजनों और बड़ों के साथ व्यवहार में सम्मान और धैर्य बनाए रखें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण के बाद स्नान कर पिता के स्वास्थ्य और परिवार के कल्याण का संकल्प लेकर सूर्य उपासना करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ लाभकारी है। गेहूं, गुड़ या तांबे की वस्तु का दान कर सकते हैं।

धनु राशि – आठवां भाव

धनु राशि के लिए ग्रहण आठवें भाव—आयु, आकस्मिक घटनाओं और गूढ़ विषयों में पड़ता है। यह संवेदनशील स्थान माना जाता है। अचानक स्वास्थ्य समस्या, भय, अनपेक्षित खर्च या परिस्थितियों में अचानक परिवर्तन हो सकता है। वाहन चलाते समय, यात्रा और जोखिम वाले कार्यों में विशेष सावधानी रखें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण अष्टम भाव में होने के कारण उपायों को विशेष महत्व देना उचित है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके चांदी या तांबे से बनी सूर्य और केतु की प्रतिमा को घी से भरे पात्र में रखकर, उसके साथ लगभग 2 किलो गेहूं या गेहूं का आटा दान करें। संभव न हो तो समतुल्य धनराशि दान करें। सूर्य उपासना के साथ शिव आराधना भी शुभ है।

मकर राशि – सातवां भाव

मकर राशि के लिए ग्रहण सातवें भाव—विवाह, जीवनसाथी, समझौते और व्यापारिक साझेदारी में पड़ता है। पति-पत्नी में गलतफहमी, साझेदारी में मतभेद या समझौतों में देरी की स्थिति बन सकती है। टकराव के बजाय संवाद और आपसी समझ को प्राथमिकता दें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण सप्तम भाव में होने के कारण ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके चांदी या तांबे से बनी सूर्य और केतु की प्रतिमा को घी के साथ दान करें और लगभग 2 किलो गेहूं या गेहूं का आटा भी दान करें। संभव न हो तो उसके बराबर धनराशि दान करें। दांपत्य शांति के लिए शिव उपासना भी लाभकारी है।

कुंभ राशि – छठा भाव

कुंभ राशि के लिए ग्रहण छठे भाव—शत्रु, रोग, ऋण, सेवा और प्रतिस्पर्धा में पड़ता है। यह सामान्यतः अनुकूल माना जाता है। प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त, ऋण नियंत्रण और लंबे समय से चल रही समस्याओं से निपटने की क्षमता बढ़ सकती है। नियमित स्वास्थ्य देखभाल को नजरअंदाज न करें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण अनुकूल छठे भाव में होने के कारण विशेष ग्रहण शांति आवश्यक नहीं है। ग्रहण के बाद स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, गुड़ या अन्नदान कर सकते हैं।

मीन राशि – पांचवां भाव

मीन राशि के लिए ग्रहण पांचवें भाव—संतान, शिक्षा, बुद्धि और सट्टा निवेश में पड़ता है। संतान या पढ़ाई को लेकर चिंता, विद्यार्थियों में एकाग्रता की कमी तथा निर्णयों में भ्रम संभव है। उच्च जोखिम वाले निवेश और सट्टे में सावधानी रखें और प्रेम संबंधों में स्पष्ट संवाद बनाए रखें।

ग्रहण उपाय: ग्रहण के बाद स्नान करके सूर्य उपासना करें। संतान, शिक्षा और मानसिक स्पष्टता के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र या अन्य सूर्य स्तोत्रों का पाठ करें। सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, गुड़ या घी दान किया जा सकता है।

इन राशि फलों को कैसे समझें?

ग्रहण जन्मकुंडली में न होने वाले किसी नए शुभ या अशुभ फल को अपने आप उत्पन्न नहीं करता। वास्तविक परिणाम जन्मकुंडली में सूर्य, चंद्र और लग्न की स्थिति, चल रही दशा-भुक्ति, वर्तमान गोचर तथा ग्रहण राशि और नक्षत्र के व्यक्तिगत संबंध पर निर्भर करता है। इसलिए ऊपर दिए गए फल चंद्र राशि आधारित सामान्य गोचर संकेत हैं, निश्चित घटनाएं नहीं।

सूर्य प्राकृतिक रूप से आत्मकारक हैं। इसलिए ग्रहण उपाय का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं होना चाहिए। आत्मविश्वास और अनुशासन बनाए रखना, सूर्य उपासना, आदित्य हृदय स्तोत्र या अन्य सूर्य स्तोत्रों का पाठ तथा भगवान शिव की आराधना ग्रहणकाल को संतुलित भाव से ग्रहण करने के पारंपरिक उपाय हैं।

ग्रहण के दौरान क्या करें – संक्षेप में

  • जहां सूतक लागू हो, वहां परिवार की परंपरा के अनुसार भोजन और मांगलिक कार्यों के नियमों का पालन करें।
  • मंत्रजप, ध्यान, इष्टदेव स्मरण और स्तोत्र पाठ कर सकते हैं।
  • ग्रहण के बाद स्नान करके सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
  • ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित eclipse glasses का ही उपयोग करें।

अपने शहर के सटीक स्थानीय ग्रहण समय जानने के लिए OnlineJyotish Solar Eclipse Date & Time Finder का उपयोग करें।

ज्योतिषीय शब्दावली:
  • ग्रहण स्पर्श: किसी स्थान पर दृश्य ग्रहण शुरू होने का समय।
  • ग्रहण मध्य: उस स्थान पर ग्रहण की अधिकतम अवस्था।
  • ग्रहण मोक्ष: उस स्थान पर ग्रहण समाप्त होने का समय।
  • सूतक काल: ग्रहण से पहले पालन किया जाने वाला पारंपरिक काल; केवल दृश्यता वाले स्थान पर लागू।
  • केतु संबंधी ग्रहण: चंद्रमा के descending node के निकट होने वाले ग्रहण के लिए प्रयुक्त ज्योतिषीय अभिव्यक्ति।

खगोलीय आधार: ग्रहण का वैश्विक प्रकार, अमेरिका में दृश्यता और प्रमुख शहरों के समय NASA Science eclipse data से मिलाए गए हैं। Metropolitan area के भीतर स्थानीय समय में मामूली अंतर संभव है।




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