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ज्योतिष पाठ - साढे साती (Sade Sati)

गोचर में जब शनि, जन्म कालीन चंद्रमा (Moon Sign) से 12वें, 1वें और 2रे भाव में भ्रमण करता है, तो उस 7½ वर्ष की अवधि को "साढे साती" (Sade Sati) कहते हैं। इसी प्रकार, जब शनि चंद्रमा से 8वें भाव में गोचर करता है, तो उसे "अष्टम शनि" कहते हैं। शनि "कर्म कारक" और "न्यायाधीश" हैं, इसलिए इस समय में वे हमारे पिछले कर्मों का हिसाब-किताब बराबर करते हैं।

चरण (Phase) प्रभाव स्थान (Body Part) परिणाम/फल (Results)
प्रथम चरण
(12वां भाव)
सिर (Head) मानसिक तनाव, अनिद्रा (Insomnia), व्यर्थ की यात्राएं, और अनचाहे खर्च। मन में सदैव एक अज्ञात भय बना रहता है।
द्वितीय चरण
(जन्म राशि - 1वां भाव)
हृदय/शरीर यह साढे साती का सबसे महत्वपूर्ण और कठिन समय होता है। स्वास्थ्य समस्याएं, व्यक्तिगत जीवन में उतार-चढ़ाव, अपमान और अहंकार का नाश होता है।
तृतीय चरण
(2रा भाव)
पैर (Legs) आर्थिक समस्याएं, परिवार में विवाद या गलतफहमियां। लेकिन जाते-जाते शनि व्यक्ति को तपाकर कुंदन बना देते हैं और जीवन को नई दिशा देते हैं।
अष्टम शनि
(8वां भाव)
आयु स्थान यह 2.5 वर्ष का समय होता है। कार्यक्षेत्र में अत्यधिक दबाव, स्थान परिवर्तन, नौकरी में असंतोष और वाहन दुर्घटनाओं के प्रति सावधानी की आवश्यकता होती है।
क्या डरने की जरूरत है?

बिल्कुल नहीं। साढे साती मनुष्य को निखारती है (Polishes the person)। जो लोग ईमानदारी और कड़ी मेहनत से काम करते हैं, शनि देव उन्हें इसी काल में रंक से राजा बना देते हैं (उदाहरण: नरेंद्र मोदी जी साढे साती के दौरान ही प्रधानमंत्री बने)।
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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।