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ज्योतिष पाठ - सूर्य के लग्न अनुसार परिणाम (Sun for All Lagnas)

Total Lunar Eclipse - March 3, 2026: Significance & Predictions: Read in తెలుగు, हिंदी, English

ज्योतिष शास्त्र में किसी भी ग्रह का फल इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि उसने किस लग्न के लिए किस भाव का आधिपत्य (Lordship) लिया है। इसे "भावाधिपत्य" कहते हैं। सूर्य आत्मा, पिता और सत्ता का कारक है। यद्यपि सूर्य एक क्रूर ग्रह (Natural Malefic) है, फिर भी वह कुछ लग्नों के लिए अत्यंत लाभकारी 'योगकारक' बन जाता है।

इस पाठ में हम देखेंगे कि सूर्य 12 लग्नों में क्या भूमिका निभाता है और उसका कहाँ होना श्रेष्ठ है:

छात्रों के लिए टिप: सूर्य कुंडली के 10वें भाव में (दोपहर के समय) "दिग्बल" (Directional Strength) प्राप्त करता है। लग्न कोई भी हो, यदि सूर्य 10वें भाव में है, तो करियर में बड़ी सफलता दिलाता है।
लग्न आधिपत्य स्वभाव विश्लेषण एवं फल
मेष
(Aries)
5वाँ अधिपति
(त्रिकोण)
शुभ (Yogakaraka) लग्नेश मंगल का मित्र और पंचम (पुण्य भाव) का स्वामी होने से सूर्य यहाँ पूर्ण शुभ है।
उत्तम स्थान: 1 (उच्च), 5, 9, 10।
फल: सरकारी नौकरी, उच्च पद और बुद्धिमान संतान।
वृषभ
(Taurus)
4था अधिपति
(केंद्र)
सम (Neutral) लग्नेश शुक्र का शत्रु है, लेकिन केंद्र (4थे) का स्वामी है। सूर्य-चंद्र को केंद्राधिपत्य दोष नहीं लगता।
उत्तम स्थान: 4, 10, 3, 11।
फल: 10वें में "सिंहासन योग", भूमि-संपत्ति और राजनीतिक लाभ।
मिथुन
(Gemini)
3रा अधिपति
(उपचय)
अशुभ (Malefic) तीसरा भाव परिश्रम का है। सूर्य यहाँ मेहनत के बाद ही फल देता है।
उत्तम स्थान: 3, 6, 10, 11।
फल: संचार क्षेत्र में सफलता, पर भाई-बहनों से विवाद संभव।
कर्क
(Cancer)
2रा अधिपति
(मारक)
सम (Neutral) लग्नेश चंद्रमा का मित्र है, लेकिन दूसरा भाव मारक स्थान है। अतः धन तो देगा, पर स्वास्थ्य प्रभावित कर सकता है।
उत्तम स्थान: 2, 10 (उच्च), 9।
फल: सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से धन लाभ, पर नेत्र विकार संभव।
सिंह
(Leo)
1ला अधिपति
(लग्न)
शुभ (Benefic) स्वयं लग्नेश होने के कारण पूर्ण शुभ है। यह आत्मविश्वास, आरोग्य और कीर्ति प्रदान करता है।
उत्तम स्थान: 1, 5, 9, 10।
फल: समाज में अपार मान-सम्मान और अधिकार।
कन्या
(Virgo)
12वाँ अधिपति
(व्यय)
अशुभ (Malefic) दुस्थान (12वें) का स्वामी होने से अशुभ। विदेश यात्रा का कारक बनता है।
उत्तम स्थान: 12 (विपरीत राजयोग), 6, 8।
फल: सरकारी दंड या आँखों की समस्या। विदेश में नौकरी हेतु उत्तम।
तुला
(Libra)
11वाँ अधिपति
(बाधक)
मारक/बाधक तुला लग्न के लिए 11वाँ भाव बाधक स्थान है और लग्न में सूर्य नीच का होता है।
उत्तम स्थान: 3, 6, 10, 11।
फल: मित्रों से हानि, पर 10वें भाव में होने पर करियर में मजबूती।
वृश्चिक
(Scorpio)
10वाँ अधिपति
(राज्य)
शुभ (Yogakaraka) मंगल का मित्र और कर्म भाव का स्वामी। करियर के लिए परम शुभ।
उत्तम स्थान: 10 (दिग्बल), 1, 5, 9।
फल: उच्च सरकारी पद और पिता से बड़ा लाभ।
धनु
(Sagittarius)
9वाँ अधिपति
(भाग्य)
अति शुभ भाग्येश और मित्र होने के कारण सूर्य यहाँ जातक के भाग्य का निर्माता है।
उत्तम स्थान: 9, 1, 5 (उच्च), 10।
फल: धार्मिकता, उच्च शिक्षा और पिता से विशेष सहयोग।
मकर
(Capricorn)
8वाँ अधिपति
(अष्टम)
अशुभ (Malefic) शनि का शत्रु और मृत्यु भाव (8वें) का स्वामी। संघर्ष और अपमान का कारक।
उत्तम स्थान: 6, 8, 12 (विपरीत राजयोग में ही)।
फल: सरकारी कार्यों में अड़चनें, पर शोध/बीमा कार्यों में लाभ।
कुंभ
(Aquarius)
7वाँ अधिपति
(मारक)
मारक (Maraka) शनि का शत्रु और 7वें (मारक) भाव का स्वामी। जीवनसाथी के साथ अहंकार का टकराव।
उत्तम स्थान: 3, 6, 10, 11।
फल: साझेदारी में विवाद, विवाह में विलंब संभव।
मीन
(Pisces)
6ठा अधिपति
(रोग/शत्रु)
अशुभ (Malefic) गुरु का मित्र होते हुए भी 6ठे (दुस्थान) का स्वामी है। ऋण और रोगों को दर्शाता है।
उत्तम स्थान: 6 (स्वक्षेत्र), 10, 12।
फल: डॉक्टरों, वकीलों या पुलिस हेतु उत्तम, अन्यथा कर्ज की समस्या।

विश्लेषण के गुप्त सूत्र

  • नीच भंग: यदि तुला लग्न में सूर्य नीच का हो लेकिन शुक्र या शनि केंद्र में हो, तो "नीच भंग राजयोग" बनता है।
  • अष्टम दोष: शास्त्रों के अनुसार सूर्य और चंद्र को अष्टम भाव का दोष नहीं लगता, लेकिन मारक प्रभाव अपनी दशा में अवश्य देते हैं।



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