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ज्योतिष पाठ - चन्द्रमा के लग्न अनुसार परिणाम (Moon for All Lagnas)

Total Lunar Eclipse - March 3, 2026: Significance & Predictions: Read in తెలుగు, हिंदी, English

ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। यदि सूर्य राजा है, तो चन्द्रमा रानी है। चन्द्रमा मन (Mind), माता, भावनाओं और तरल पदार्थों का कारक है। अन्य ग्रहों की तुलना में चन्द्रमा की एक विशेषता है - पक्ष बल (Paksha Bala)। शुक्ल पक्ष में (अमावस्या से पूर्णिमा तक) चन्द्रमा स्वाभाविक रूप से शुभ और कृष्ण पक्ष में (पूर्णिमा से अमावस्या तक) स्वाभाविक रूप से अशुभ व्यवहार करता है।

इस पाठ में हम देखेंगे कि चन्द्रमा 12 लग्नों के लिए क्या भूमिका निभाता है और उसका कहाँ होना श्रेष्ठ है:

छात्रों के लिए टिप: चन्द्रमा कुंडली के 4थे भाव में "दिग्बल" (Directional Strength) प्राप्त करता है। लग्न कोई भी हो, यदि चन्द्रमा 4थे भाव में है, तो वह घर का सुख, वाहन योग और माता का स्नेह प्रदान करता है।
लग्न आधिपत्य स्वभाव विश्लेषण एवं फल
मेष
(Aries)
4था अधिपति
(केंद्र)
शुभ (Benefic) लग्नेश मंगल का मित्र और सुख स्थान का स्वामी होने से चन्द्रमा यहाँ शुभ है।
उत्तम स्थान: 4 (स्वक्षेत्र+दिग्बल), 1, 2 (उच्च), 5, 9।
फल: माता से लाभ, भूमि-भवन, वाहन सुख और शांत मन।
वृषभ
(Taurus)
3रा अधिपति
(उपचय)
अशुभ (Malefic) चन्द्रमा यहाँ उच्च का होता है लेकिन आधिपत्य के अनुसार तीसरा भाव (परिश्रम भाव) होने से अशुभ है।
उत्तम स्थान: 3, 1 (उच्च), 10।
फल: कला में रुचि, यात्राएं। लग्न में होने पर मानसिक शक्ति देता है।
मिथुन
(Gemini)
2रा अधिपति
(धन/मारक)
सम (Neutral) लग्नेश बुध का शत्रु है (बुध चन्द्रमा को शत्रु नहीं मानता लेकिन चन्द्रमा मानता है)। 2रा भाव मारक भी है।
उत्तम स्थान: 2 (स्वक्षेत्र), 11।
फल: वाकचातुर्य अच्छा होता है लेकिन धन की स्थिति में उतार-चढ़ाव रह सकता है।
कर्क
(Cancer)
1ला अधिपति
(लग्न)
शुभ (Benefic) स्वयं लग्नेश होने के कारण पूर्ण शुभ है। यह स्वास्थ्य और कीर्ति प्रदान करता है।
उत्तम स्थान: 1, 4, 5, 9, 10।
फल: समाज में सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और दयालु स्वभाव।
सिंह
(Leo)
12वाँ अधिपति
(व्यय)
अशुभ (Malefic) लग्नेश सूर्य का मित्र है लेकिन 12वें दुस्थान का स्वामी होने से तटस्थ या अशुभ।
उत्तम स्थान: 12 (विपरीत राजयोग), 3, 6, 8 (सीमित)।
फल: मानसिक चिंता, अनिद्रा। विदेश यात्रा के लिए उत्तम।
कन्या
(Virgo)
11वाँ अधिपति
(लाभ)
अशुभ (Malefic) लग्नेश बुध का मित्र नहीं है। 11वाँ भाव लाभ का है लेकिन द्विस्वभाव लग्न के लिए बाधक भी है।
उत्तम स्थान: 11, 2, 9।
फल: मित्रों से लाभ होगा लेकिन बड़ों से वैचारिक मतभेद संभव।
तुला
(Libra)
10वाँ अधिपति
(राज्य)
शुभ (Benefic) लग्नेश शुक्र का शत्रु है लेकिन केंद्र (10वें) का स्वामी होने से शुभ फल देता है।
उत्तम स्थान: 10 (स्वक्षेत्र), 1, 4, 5, 9।
फल: करियर में प्रसिद्धि। राजनीति या व्यापार के लिए श्रेष्ठ।
वृश्चिक
(Scorpio)
9वाँ अधिपति
(भाग्य)
शुभ (Yogakaraka) लग्नेश मंगल का मित्र और त्रिकोण का स्वामी। लेकिन लग्न में चन्द्रमा नीच का होता है।
उत्तम स्थान: 9 (स्वक्षेत्र), 4, 5, 10।
फल: भाग्य और धर्म में रुचि। लग्न में होने पर मानसिक कमजोरी संभव।
धनु
(Sagittarius)
8वाँ अधिपति
(अष्टम)
अशुभ (Malefic) अष्टमाधिपति होने से दोष लगता है। यद्यपि चन्द्रमा को अष्टम दोष नहीं लगता, फिर भी फल कष्टकारी हो सकते हैं।
उत्तम स्थान: 6, 8, 12 (विपरीत राजयोग हेतु)।
फल: मानसिक भय, श्वसन संबंधी समस्याएं।
मकर
(Capricorn)
7वाँ अधिपति
(मारक)
मारक (Maraka) लग्नेश शनि का शत्रु और 7वाँ भाव मारक स्थान है। चर लग्न के लिए यह बाधक स्थान नहीं है, फिर भी मारक फल देता है।
उत्तम स्थान: 7, 4, 10।
फल: सुंदर जीवनसाथी मिलेगा लेकिन आपसी मनमुटाव संभव।
कुंभ
(Aquarius)
6ठा अधिपति
(रोग/शत्रु)
अशुभ (Malefic) लग्नेश शनि का शत्रु और 6ठे भाव का स्वामी। स्वास्थ्य हेतु शुभ नहीं है।
उत्तम स्थान: 6, 8, 12।
फल: सर्दी-जुकाम, मानसिक तनाव। माता को स्वास्थ्य कष्ट।
मीन
(Pisces)
5वाँ अधिपति
(पुत्र)
शुभ (Benefic) लग्नेश गुरु का मित्र और पंचम (त्रिकोण) का स्वामी होने से अत्यंत शुभ।
उत्तम स्थान: 5 (स्वक्षेत्र), 1, 4, 9।
फल: उत्तम संतान, रचनात्मकता, मंत्र सिद्धि और प्रेम में सफलता।

विश्लेषण के गुप्त सूत्र

  • पक्ष बल: यदि चन्द्रमा पूर्णिमा के निकट (पूर्ण चन्द्र) है, तो वह अशुभ भाव का स्वामी होकर भी शुभ फल देगा। अमावस्या का चन्द्रमा शुभ भाव का स्वामी होकर भी फल कम देता है।
  • केमद्रुम योग: यदि चन्द्रमा के आगे-पीछे कोई ग्रह न हो (राहु-केतु, सूर्य को छोड़कर), तो "केमद्रुम योग" बनता है, जो मानसिक एकाकीपन देता है।
  • नीच भंग: वृश्चिक लग्न में चन्द्रमा नीच का हो, लेकिन मंगल केंद्र में हो, तो नीच भंग राजयोग बनता है।



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