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ज्योतिष पाठ - कृत्तिका नक्षत्र (The Star of Fire)


यह राशि चक्र का तीसरा नक्षत्र है। इसकी विशेषता यह है कि यह दो राशियों में फैला हुआ है (मेष राशि में 1 चरण और वृषभ राशि में 3 चरण)। इसके स्वामी सूर्य हैं। इसका प्रतीक "छुरा" या "कुल्हाड़ी" (Razor/Blade) है। इसके अधिदेवता अग्नि हैं। यह नक्षत्र शुद्धिकरण और परिवर्तन की शक्ति को दर्शाता है।

मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics)

  • स्पष्टवादिता (Sharp Tongue): जिस तरह उस्तरा या चाकू किसी चीज को काट देता है, वैसे ही ये लोग कड़वा सच बोलने से पीछे नहीं हटते। इनकी बातें कभी-कभी दूसरों को चुभ सकती हैं।
  • पाचन शक्ति (Digestion): चूँकि अग्नि देव इसके देवता हैं, इसलिए इन लोगों की जठराग्नि तेज होती है। इन्हें खाना पकाने (Cooking) या अच्छा भोजन करने का शौक होता है।
  • पालन-पोषण (Foster Care): पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिकेय जी का पालन-पोषण कृत्तिकाओं ने किया था। इसलिए इस नक्षत्र के जातकों में दूसरों के बच्चों को पालने या गोद (Adoption) लेने की प्रवृत्ति देखी जा सकती है।

चरणों के अनुसार फल (Results by Padas)

चरण (Pada) राशि और नवांश फल (Result)
1ला चरण मेष राशि (धनु नवांश) अत्यधिक क्रोध, नेतृत्व के गुण, मिलिट्री कमांडर जैसा स्वभाव और अनुशासन।
2रा चरण वृषभ राशि (मकर नवांश) यहाँ से वृषभ राशि शुरू होती है। स्वभाव में स्थिरता और भौतिक संसाधनों के प्रति झुकाव।
3रा चरण वृषभ राशि (कुंभ नवांश) तीक्ष्ण बुद्धि, मानवतावादी दृष्टिकोण और वैज्ञानिक सोच।
4था चरण वृषभ राशि (मीन नवांश) कलात्मक रुचि, संवेदनशील स्वभाव और अच्छा भोजन प्रिय।

यदि ग्रह कृत्तिका में हों तो?

  • चंद्रमा (Moon): यहाँ चंद्रमा उच्च (Exalted) होते हैं (वृषभ भाग में)। मानसिक रूप से व्यक्ति बहुत स्थिर और शांत होता है। आकर्षक व्यक्तित्व मिलता है।
  • राहु (Rahu): राजनीति के लिए यह स्थिति बहुत अच्छी है। अग्नि तत्व के प्रभाव से व्यक्ति जनता को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल होता है।
  • मंगल (Mars): यदि मेष भाग में हो तो पुलिस या सर्जन बनाता है। वृषभ भाग में होने पर जिद्दी स्वभाव देता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।