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ज्योतिष पाठ - रोहिणी नक्षत्र (The Star of Growth)

राशि चक्र में यह चौथा नक्षत्र (10°00' - 23°20' वृषभ) है। यह पूरी तरह से वृषभ राशि के अंतर्गत आता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं। इसका प्रतीक "बैलगाड़ी" या "रथ" (Chariot) है। इसके अधिदेवता ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों (नक्षत्रों) में से रोहिणी उन्हें सबसे अधिक प्रिय है, यही कारण है कि चंद्रमा यहाँ उच्च के होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics)

  • सौंदर्य और आकर्षण: इस नक्षत्र के जातक बहुत सुंदर होते हैं और उनकी आँखें विशेष रूप से आकर्षक होती हैं। वे दूसरों को बहुत जल्दी प्रभावित कर लेते हैं।
  • विकास (Growth): "रोहण" का अर्थ है ऊपर की ओर बढ़ना। ये लोग कृषि, बागवानी या व्यवसाय को शून्य से शिखर तक ले जाने में माहिर होते हैं।
  • ईर्ष्या (Jealousy): चूँकि चंद्रमा रोहिणी को अधिक प्रेम करते थे, इसलिए अन्य नक्षत्रों को उनसे ईर्ष्या हुई। इसी प्रकार, इस नक्षत्र के जातकों में भी दूसरों के प्रति ईर्ष्या या पजेसिवनेस (Possessiveness) की भावना थोड़ी अधिक हो सकती है।

चरणों के अनुसार फल (Results by Padas)

चरण (Pada) नवांश राशि (Navamsa Sign) फल (Result)
1ला चरण मेष (Mars) भावुकता और जुनून (Passion) अधिक होता है। क्रोध जल्दी आता है लेकिन उतनी ही जल्दी शांत भी हो जाता है।
2रा चरण वृषभ (Venus) वर्गोत्तम। यह सबसे शक्तिशाली चरण है। प्रचुर धन, कलात्मक सफलता और अचल संपत्ति। जातक सुखी और वैभवशाली जीवन जीता है।
3रा चरण मिथुन (Mercury) व्यावसायिक बुद्धि, गणित और संवाद कौशल। कला और लेखन के प्रति विशेष झुकाव।
4था चरण कर्क (Moon) कोमल हृदय और परिवार के प्रति अगाध प्रेम। माता से विशेष जुड़ाव। जल से संबंधित कार्यों या व्यवसाय में सफलता।

यदि ग्रह रोहिणी में हों तो?

  • चंद्रमा (Moon): यहाँ चंद्रमा उच्च (Exalted) और अपने ही नक्षत्र में होते हैं। मन अत्यंत शांत, स्थिर और शक्तिशाली होता है। ऐसे जातक बहुत रोमांटिक होते हैं।
  • शनि (Saturn): रोहिणी में शनि का होना "रोहिणी शकट भेदन" नामक योग बनाता है (जो वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल का संकेत है)। व्यक्तिगत रूप से, यह माता के साथ संबंधों में तनाव दे सकता है।
  • शुक्र (Venus): कलाकारों, अभिनेताओं और फैशन डिजाइनरों के लिए यह एक उत्कृष्ट स्थिति है। जातक विलासी जीवन जीता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।