मेष (Aries) |
2रा, 7वाँ अधिपति |
तीव्र मारक (Maraka) |
लग्नेश मंगल का सम मित्र है, लेकिन दो मारक स्थानों का स्वामी होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। उत्तम स्थान: 2, 7 (स्वक्षेत्र), 4, 12 (उच्च)। फल: धन तो प्रचुर देगा, लेकिन पारिवारिक तनाव और स्वास्थ्य कष्ट संभव। |
वृषभ (Taurus) |
1ला, 6ठा अधिपति |
शुभ (Benefic) |
स्वयं लग्नेश होने के कारण 6ठे का दोष कम होता है। "मालव्य योग" देने में सक्षम। उत्तम स्थान: 1 (स्वक्षेत्र), 4, 5, 9। फल: आकर्षक व्यक्तित्व, उत्तम स्वास्थ्य, शत्रुओं पर विजय और विलासितापूर्ण जीवन। |
मिथुन (Gemini) |
5वाँ, 12वाँ अधिपति |
शुभ (Benefic) |
लग्नेश बुध का परम मित्र और पंचम त्रिकोण का स्वामी होने से अत्यंत शुभ। उत्तम स्थान: 5 (स्वक्षेत्र), 1, 9, 10 (उच्च)। फल: कला क्षेत्र में सफलता, प्रेम विवाह और विदेश यात्रा के अवसर। |
कर्क (Cancer) |
4था, 11वाँ अधिपति |
पापी (Malefic) |
लग्नेश चंद्रमा का शत्रु है। केंद्र और लाभ भाव का स्वामी होने से केंद्राधिपत्य दोष भी संभव है। उत्तम स्थान: 4 (स्वक्षेत्र+दिग्बल), 11, 12। फल: घर-वाहन का सुख देगा, लेकिन माता के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। |
सिंह (Leo) |
3रा, 10वाँ अधिपति |
पापी (Malefic) |
लग्नेश सूर्य का शत्रु और पराक्रम (3) व कर्म (10) का स्वामी। उत्तम स्थान: 3 (स्वक्षेत्र), 10 (स्वक्षेत्र), 4। फल: भाई-बहनों से अनबन, पर करियर (सिनेमा/मीडिया) में अच्छी सफलता। |
कन्या (Virgo) |
2रा, 9वाँ अधिपति |
शुभ (Benefic) |
लग्नेश बुध का मित्र और भाग्येश होने से शुभ, हालांकि लग्न में नीच का होता है। उत्तम स्थान: 2, 9 (स्वक्षेत्र), 5। फल: उत्तम धन योग और भाग्य का साथ। नीच होने पर स्त्रियों से कष्ट संभव। |
तुला (Libra) |
1ला, 8वाँ अधिपति |
शुभ (Benefic) |
स्वयं लग्नेश होने से 8वें का दोष नहीं लगता। "मालव्य योग" निर्मित करता है। उत्तम स्थान: 1 (स्वक्षेत्र), 4, 5, 9। फल: लंबी आयु, आकर्षण और व्यापार में बड़ी सफलता। 6ठे में उच्च का होकर राजयोग। |
वृश्चिक (Scorpio) |
7वाँ, 12वाँ अधिपति |
मारक (Malefic) |
लग्नेश मंगल का सम मित्र। 7 और 12 भावों का स्वामी वैवाहिक सुख में कमी ला सकता है। उत्तम स्थान: 12 (स्वक्षेत्र), 7 (स्वक्षेत्र), 5 (उच्च)। फल: विवाहेतर संबंध या गृहक्लेश की संभावना। विदेश में आरामदायक जीवन। |
धनु (Sagittarius) |
6ठा, 11वाँ अधिपति |
तीव्र पापी (Worst Malefic) |
लग्नेश गुरु का शत्रु और दो पापी भावों (6, 11) का स्वामी। उत्तम स्थान: 6, 11, 4 (उच्च)। फल: कर्ज, बीमारियां (शुगर/किडनी) और मित्रों से धोखे की संभावना। |
मकर (Capricorn) |
5वाँ, 10वाँ अधिपति |
योगकारक (Yogakaraka) |
केंद्र (10) और त्रिकोण (5) का स्वामी होने से मकर लग्न के लिए शुक्र सर्वश्रेष्ठ ग्रह है। उत्तम स्थान: 1, 5, 10, 9। फल: राजनीतिक पद, सिनेमा, प्रेम विवाह और अखंड राजयोग। |
कुंभ (Aquarius) |
4था, 9वाँ अधिपति |
योगकारक (Yogakaraka) |
केंद्र (4) और त्रिकोण (9) का स्वामी होने से यहाँ भी प्रबल राजयोगकारी है। उत्तम स्थान: 1, 4 (स्वक्षेत्र), 9 (स्वक्षेत्र), 5। फल: स्वयं का घर, वाहन, प्रबल भाग्य और धार्मिक कार्यों में प्रसिद्धि। |
मीन (Pisces) |
3रा, 8वाँ अधिपति |
तीव्र पापी (Worst Malefic) |
यद्यपि लग्न में उच्च का होता है, पर आधिपत्य (3, 8) के कारण पापी फल अधिक देता है। उत्तम स्थान: 8 (विपरीत राजयोग), 3, 12। फल: भाई-बहनों से विवाद, आयु संबंधी चिंता। लग्न में होने पर मिश्रित फल। |