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ज्योतिष पाठ - शनि के लग्न अनुसार परिणाम (Saturn for All Lagnas)


ज्योतिष शास्त्र में शनि (Saturn) को कर्म कारक (Planet of Karma) माना गया है। लोग अक्सर शनि के नाम से भयभीत होते हैं, लेकिन शनि एक निष्पक्ष न्यायाधीश (Judge) हैं जो हमारे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि आयु, दुःख, वैराग्य, परिश्रम, सेवा और लोकतंत्र का कारक है। यदि शनि योगकारक हो, तो यह व्यक्ति को अपार संपदा और सत्ता प्रदान करता है।

इस पाठ में हम देखेंगे कि शनि 12 लग्नों में क्या फल देता है और विशेष रूप से शश महापुरुष योग (Sasa Yoga) का निर्माण कब होता है।

छात्रों के लिए टिप (Student Tip):
  • शनि 7वें भाव में "दिग्बल" (Directional Strength) प्राप्त करता है। यहाँ स्थित शनि विवाह में देरी कर सकता है, लेकिन सार्वजनिक प्रतिष्ठा और व्यापार में बड़ी सफलता दिलाता है।
  • यदि शनि अपनी स्वराशि (मकर, कुंभ) या उच्च राशि (तुला) में होकर केंद्र (1, 4, 7, 10) में हो, तो "शश महापुरुष योग" बनता है। यह व्यक्ति को एक महान राजनेता या जननायक बनाता है।
लग्न आधिपत्य स्वभाव विश्लेषण एवं फल
मेष
(Aries)
10वाँ, 11वाँ अधिपति पापी (Malefic) लग्नेश मंगल का शत्रु और 11वें (बाधक) भाव का स्वामी होने से पापी। हालांकि, दशमेश होकर करियर देता है।
उत्तम स्थान: 10 (स्वक्षेत्र), 11 (स्वक्षेत्र), 7 (उच्च)।
फल: अत्यधिक परिश्रम के बाद ही करियर में सफलता। आय अच्छी पर मानसिक शांति कम।
वृषभ
(Taurus)
9वाँ, 10वाँ अधिपति योगकारक (Yogakaraka) केंद्र (10) और त्रिकोण (9) का स्वामी। वृषभ लग्न के लिए शनि 'बेस्ट' प्लैनेट है।
उत्तम स्थान: 9, 10, 1, 5।
फल: धर्म-कर्म अधिपति योग। करियर, पिता और भाग्य का पूर्ण सुख शनि से ही मिलता है।
मिथुन
(Gemini)
8वाँ, 9वाँ अधिपति मिश्रित शुभ (Mixed) लग्नेश बुध का मित्र और भाग्येश होने से 8वें का दोष कम हो जाता है।
उत्तम स्थान: 9 (स्वक्षेत्र), 5 (उच्च), 10।
फल: विदेश यात्रा, लंबी आयु और आध्यात्मिक उन्नति। पैतृक संपत्ति के योग।
कर्क
(Cancer)
7वाँ, 8वाँ अधिपति तीव्र पापी (Worst) लग्नेश चंद्रमा का प्रबल शत्रु और मारक व आयु भाव का स्वामी।
उत्तम स्थान: 3, 6, 12 (विपरीत राजयोग हेतु)।
फल: वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं और स्वास्थ्य कष्ट की संभावना।
सिंह
(Leo)
6ठा, 7वाँ अधिपति शत्रु (Enemy) लग्नेश सूर्य का धुर विरोधी और दो कठिन भावों (6, 7) का स्वामी।
उत्तम स्थान: 6 (स्वक्षेत्र), 3, 10, 11।
फल: कानूनी उलझने, शत्रु भय और जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद।
कन्या
(Virgo)
5वाँ, 6ठा अधिपति सम/तटस्थ (Neutral) लग्नेश बुध का मित्र। पंचमेश होने से शुभ, षष्ठेश होने से सेवा का प्रतीक।
उत्तम स्थान: 5 (स्वक्षेत्र), 9, 10, 1।
फल: तकनीकी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता। संतान में विलंब संभव।
तुला
(Libra)
4था, 5वाँ अधिपति योगकारक (Yogakaraka) केंद्र (4) और त्रिकोण (5) का स्वामी। तुला में शनि उच्च का होता है।
उत्तम स्थान: 1 (उच्च-शश योग), 4, 5, 9, 10।
फल: अद्भुत राजयोग। अचल संपत्ति, उत्तम संतान और महान यश की प्राप्ति।
वृश्चिक
(Scorpio)
3रा, 4था अधिपति पापी (Malefic) लग्नेश मंगल का शत्रु। सुख और परिश्रम भाव का स्वामी।
उत्तम स्थान: 3 (स्वक्षेत्र), 4 (शश योग), 10, 11।
फल: घर-वाहन के लिए कठिन संघर्ष। माता के स्वास्थ्य की चिंता संभव।
धनु
(Sagittarius)
2रा, 3रा अधिपति पापी (Malefic) लग्नेश गुरु का सम मित्र। मारक (2) और पराक्रम (3) का अधिपति।
उत्तम स्थान: 3 (स्वक्षेत्र), 2 (स्वक्षेत्र), 11 (उच्च), 10।
फल: परिवार के लिए निरंतर संघर्ष। धन की स्थिरता में उतार-चढ़ाव।
मकर
(Capricorn)
1ला, 2रा अधिपति शुभ (Benefic) स्वयं लग्नेश और द्वितीयेश होने के कारण पूर्ण शुभ फलदाई।
उत्तम स्थान: 1 (स्वक्षेत्र-शश योग), 2, 5, 9, 10 (उच्च)।
फल: शून्य से शिखर तक पहुँचने वाला व्यक्तित्व। अचल संपत्ति और दीर्घायु।
कुंभ
(Aquarius)
1ला, 12वाँ अधिपति शुभ (Benefic) लग्नेश होने के कारण अत्यंत शुभ। 12वें का दोष विशेष नहीं लगता।
उत्तम स्थान: 1 (शश योग), 9 (उच्च), 12।
फल: दार्शनिक स्वभाव, गहरा शोध और विदेश में सफलता।
मीन
(Pisces)
11वाँ, 12वाँ अधिपति पापी (Malefic) लग्नेश गुरु का सम मित्र, लेकिन लाभ व व्यय भावों का स्वामी।
उत्तम स्थान: 12 (स्वक्षेत्र), 11, 3, 6।
फल: आय अच्छी होगी पर खर्च भी उतने ही होंगे। मोक्ष की प्राप्ति हेतु उत्तम।

ज्योतिषीय सूत्र (Tips for Prediction)

  • विलंब (Delay): शनि जिस भाव में बैठता है या जिसे देखता है, वहां के फल देर से मिलते हैं (जैसे 7वें में हो तो विवाह में विलंब)। यह 'इनकार' (Denial) नहीं, केवल 'परीक्षा' है।
  • 3, 6, 11 भाव: नैसर्गिक पापी होने के कारण शनि उपचय स्थानों (3, 6, 11) में शत्रुहंता बनता है और अद्भुत फल देता है।
  • नीच भंग: मेष में शनि नीच का होता है, लेकिन यदि मंगल केंद्र में हो या चंद्रमा के साथ हो, तो "नीच भंग राजयोग" बनता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।