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ज्योतिष पाठ - वर्ग कुंडलियाँ (Divisional Charts)


अब तक हमने जो देखा वह केवल "राशि चक्र" (D1 Chart) था। यह मनुष्य के "स्थूल शरीर" (Physical Body) के समान है। लेकिन ग्रहों का वास्तविक बल और जीवन के विशिष्ट पक्षों (जैसे- विवाह, करियर, संतान, संपत्ति) को गहराई से जानने के लिए हमें "वर्ग कुंडलियों" (Divisional Charts) का विश्लेषण करना पड़ता है। आप इसे शरीर के "एक्स-रे" (X-Ray) या "एमआरआई स्कैन" (MRI Scan) की तरह समझ सकते हैं, जो ऊपरी तौर पर न दिखने वाली चीजों को भी दिखा देते हैं।

महत्वपूर्ण सूत्र: यदि राशि चक्र (D1) "वृक्ष" (Tree) है, तो नवांश चक्र (D9) उस वृक्ष पर लगने वाला "फल" (Fruit) है। वृक्ष कितना भी विशाल और हरा-भरा क्यों न हो, यदि फल सड़ा हुआ हो या फल ही न हो, तो उस वृक्ष का क्या लाभ? इसीलिए सटीक फलादेश के लिए वर्ग कुंडलियां अनिवार्य हैं।
वर्ग चक्र (Chart) नाम (Name) उद्देश्य/सूचक (Purpose)
D-1 राशि (Rashi) शरीर, सामान्य फल और समग्र जीवन (General Well-being)
D-2 होरा (Hora) धन, संपत्ति और परिवार (Wealth)
D-3 द्रेष्काण (Drekkana) भाई-बहन, पराक्रम और साहस (Siblings & Courage)
D-4 चतुर्थांश (Chaturthamsa) भाग्य, अचल संपत्ति, घर (Assets & Fortune)
D-7 सप्तमांश (Saptamsa) संतान सुख, वंश वृद्धि (Progeny)
D-9 नवांश (Navamsa) विवाह, जीवनसाथी, और ग्रहों का वास्तविक बल (Spouse & Strength) - सर्वाधिक महत्वपूर्ण
D-10 दशांश (Dasamsa) कर्म, व्यवसाय, करियर, मान-सम्मान (Career & Status)
D-12 द्वादशांश (Dwadasamsa) माता-पिता (Parents)
D-16 षोडशांश (Shodasamsa) वाहन सुख, विलासिता (Vehicles & Luxuries)

विश्लेषण कैसे करें? (How to Analyze)

किसी भी परिणाम की भविष्यवाणी करते समय, पहले राशि चक्र (D1) में ग्रह की स्थिति देखें। उसके बाद, उस विषय से संबंधित वर्ग चक्र में (जैसे: विवाह के लिए D9, नौकरी के लिए D10) उसी ग्रह की स्थिति देखें।

  • D1 में उच्च + D9 में नीच = कमजोर ग्रह: यह ग्रह ऊपर से मजबूत दिखता है, लेकिन अंदर से खोखला है। परिणाम आशाजनक नहीं होंगे।
  • D1 में नीच + D9 में उच्च = बली ग्रह: यह ग्रह शुरुआत में संघर्ष दे सकता है, लेकिन अंत में बहुत अच्छे परिणाम और सफलता देता है।




नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।