OnlineJyotish.com

ज्योतिष पाठ - शनि ग्रह की दृष्टियाँ (Saturn Aspects)

ज्योतिष शास्त्र में शनि को "कर्म फलदाता" कहा गया है। शनि की दृष्टि जहां भी पड़ती है, वहां "संघर्ष, विलंब और जिम्मेदारी" अपने आप आ जाती है। शनि के विषय में एक प्रसिद्ध नियम है - "स्थान वृद्धि, दृष्टि हानि"। अर्थात, शनि जिस भाव में बैठते हैं उस भाव की वृद्धि करते हैं (मजबूत करते हैं), लेकिन जिन भावों को देखते हैं, वहां कठिनाइयां पैदा करते हैं या परीक्षा लेते हैं।

दृष्टि (Aspect) परिणाम और विश्लेषण (Analysis)
3री दृष्टि (तृतीय)
(Effort/Challenge)
स्वभाव: यह "पराक्रम दृष्टि" या "परीक्षा दृष्टि" है। शनि अपनी 3री दृष्टि से जिस भाव को देखते हैं, वहां सफलता पाने के लिए आपको अत्यधिक परिश्रम करना पड़ता है। शनि यहां आलस्य को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते।
उदाहरण: यदि लग्न में बैठे शनि 3रे भाव (भाई-बहन/साहस) को देखते हैं, तो छोटे भाई-बहनों से मतभेद हो सकते हैं या व्यक्ति का साहस बार-बार टूटता है।
7वीं दृष्टि (सप्तम)
(Relationship Strain)
स्वभाव: यह "वियोग दृष्टि" है। शनि की 7वीं दृष्टि जहां पड़ती है, वहां रिश्तों में ठंडापन (Coldness) या दूरी आ जाती है।
उदाहरण: यदि लग्न स्थित शनि 7वें भाव (जीवनसाथी) को देखते हैं, तो विवाह में देरी होती है या पति-पत्नी के बीच रोमांस की कमी और वैचारिक मतभेद रहते हैं।
10वीं दृष्टि (दशम)
(Karma/Duty)
स्वभाव: यह "कर्म दृष्टि" है। शनि 10वीं दृष्टि से जिस भाव को देखते हैं, उस भाव के प्रति आपको जीवन भर जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। वहां काम का बोझ (Workload) बहुत अधिक होता है।
उदाहरण: 4थे भाव में बैठे शनि यदि 10वें भाव (करियर) को देखते हैं, तो व्यक्ति को करियर में बहुत ऊँचाई देते हैं, लेकिन इसके बदले में वे दिन-रात काम करवाते हैं।

शनि यदि अन्य ग्रहों को देखे?

  • शनि -> सूर्य को देखे: पिता के साथ वैचारिक मतभेद, सरकारी कार्यों में बाधाएं, और आत्मविश्वास में कमी आती है।
  • शनि -> चंद्रमा को देखे: इसे "विष योग" (Punarphoo Yoga) कहते हैं। यह मानसिक तनाव, डिप्रेशन, अकेलापन और माता को कष्ट देता है।
  • शनि -> मंगल को देखे: यह "अग्नि-मारुत योग" (द्वंद्व योग) है। मशीनों से चोट, ऑपरेशन, या कारखानों में दुर्घटना का भय रहता है।
फल कब मिलता है? इन दृष्टियों का प्रभाव शनि की महादशा, अंतर्दशा में, या "साढे साती" और "ढैया" के गोचर काल में सबसे अधिक अनुभव होता है।

जो लोग अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए OnlineJyotish.com Exclusive और Premium जन्मकुंडली प्रदान करता है। 400 से अधिक पृष्ठों वाली इस विस्तृत जन्मकुंडली में प्रत्येक भाव का विश्लेषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, नौकरी एवं करियर, भाग्य और जीवन के उद्देश्य से संबंधित विशेष विश्लेषण, योग, दोष एवं उनके उपायों का संपूर्ण विवरण, षड्वर्ग फल, ग्रह अवस्थाओं के फल, अष्टकवर्ग विश्लेषण एवं फल, विंशोपक बल और उनके परिणाम, 100 वर्षों के दशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतरदशा फल, 100 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के गोचर की तिथियाँ तथा अगले 10 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के विस्तृत गोचर फल सहित अनेक विशेष जानकारियाँ सम्मिलित हैं। यह 400 से अधिक पृष्ठों वाली एक विस्तृत बृहत् जन्मकुंडली है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके कुछ ही क्षणों में अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें।

अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें
नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।