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ज्योतिष पाठ - गुरु ग्रह की दृष्टियाँ (Jupiter Aspects)


नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि को "गंगाजल" के समान पवित्र माना गया है। जिस प्रकार गंगाजल अशुद्ध वस्तुओं को भी शुद्ध कर देता है, उसी प्रकार कितना भी पापी ग्रह हो या दूषित भाव हो, यदि उस पर गुरु की दृष्टि पड़ जाए, तो वह पवित्र हो जाता है और उसके दोष नष्ट हो जाते हैं। ज्योतिष का एक नियम है कि गुरु जहां बैठते हैं (Position) वहां से ज्यादा लाभ वहां देते हैं, जहां वे देखते हैं (Aspect)।

दृष्टि (Aspect) परिणाम और विश्लेषण (Analysis)
5वीं दृष्टि (पंचम)
(Creativity/Purva Punya)
स्वभाव: इसे "पूर्व पुण्य दृष्टि" कहते हैं। गुरु अपनी 5वीं दृष्टि से जिस भाव को देखते हैं, उस भाव से संबंधित पिछले जन्मों के पुण्य (Purva Punya) जागृत हो जाते हैं। समस्याएं दैवीय कृपा से सुलझ जाती हैं।
उदाहरण: यदि लग्न में बैठे गुरु 5वें भाव (संतान/विद्या) को देखते हैं, तो संतान सुख उत्तम रहता है और विद्या में बाधाएं नहीं आतीं।
7वीं दृष्टि (सप्तम)
(Expansion)
स्वभाव: इसे "वृद्धि दृष्टि" कहते हैं। गुरु अपने सामने वाले भाव को विस्तारित (Expand) करते हैं। यह दृष्टि रिश्तों और साझेदारी में सुधार लाती है।
उदाहरण: यदि गुरु 7वें भाव को (लग्न से) देखते हैं, तो वैवाहिक जीवन सम्मानजनक और सुखद रहता है।
9वीं दृष्टि (नवम)
(Luck/Protection)
स्वभाव: यह "भाग्य दृष्टि" है और गुरु की दृष्टियों में सबसे शक्तिशाली मानी जाती है। गुरु 9वीं दृष्टि से जिसे देखते हैं, उसे "दैवीय सुरक्षा" (Divine Protection) प्राप्त होती है।
उदाहरण: 4थे भाव में बैठे गुरु यदि 12वें भाव (व्यय/मोक्ष) को 9वीं दृष्टि से देखते हैं, तो उस व्यक्ति के खर्च शुभ कार्यों (जैसे यज्ञ, दान) में होते हैं और वह मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ता है।

गुरु यदि अन्य ग्रहों को देखे?

  • गुरु -> शनि को देखे: शनि की क्रूरता और कष्ट कम हो जाते हैं। व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र (Profession) में मान-सम्मान मिलता है।
  • गुरु -> राहु को देखे: राहु की शरारतें और बुरे प्रभाव नियंत्रित (Control) होते हैं। व्यक्ति अनैतिक कार्यों से बचकर सन्मार्ग पर चलता है।
  • गुरु -> चंद्रमा को देखे: यह "गजकेसरी योग" के समान फल देता है। मन शांत, स्थिर और आशावादी रहता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।