नवांश कुंडली (Navamsa Chakra - D9)
राशि चक्र (D1) के बाद ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण यदि कोई वर्ग कुंडली है, तो वह नवांश कुंडली (D9) है। एक राशि को 9 बराबर भागों में विभाजित करने पर नवांश बनता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से दो बातों के लिए किया जाता है:
- वैवाहिक जीवन (Marriage): जीवनसाथी का स्वभाव कैसा होगा? वैवाहिक सुख मिलेगा या नहीं?
- ग्रहों का वास्तविक बल (Real Strength): कोई ग्रह राशि चक्र में मजबूत दिख सकता है, लेकिन क्या वह वास्तव में अंदर से मजबूत है? यह नवांश तय करता है।
वर्गोत्तम ग्रह (Vargottama Planet)
वर्गोत्तम ग्रह अत्यंत शक्तिशाली होता है। भले ही वह राशि चक्र में नीच राशि में क्यों न हो, यदि वह वर्गोत्तम हो जाता है, तो वह शुभ फल ही प्रदान करता है। ऐसे ग्रह जीवन में स्थिरता (Stability) और उच्च पद प्रदान करते हैं।
| विषय (Subject) | विश्लेषण विधि (Analysis Method) |
|---|---|
| विवाह (Marriage) | नवांश लग्न (D9 Lagna) और नवांश लग्नेश की स्थिति देखनी चाहिए। यदि वे पाप प्रभाव से मुक्त और केंद्र/त्रिकोण में हों, तो वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। साथ ही, D1 के सप्तमेश की स्थिति D9 में जांचें। |
| भाग्य (Luck) | ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 30-35 वर्ष की आयु के बाद नवांश कुंडली का प्रभाव बढ़ जाता है। राशि चक्र (D1) वह है जो हम जन्म से लेकर आए हैं (प्रारब्ध), और नवांश (D9) वह है जो हम अपने कर्मों से बनाते हैं। |
| पुष्कर नवांश (Pushkaramsa) | यदि ग्रह नवांश में कुछ विशिष्ट अंशों (Degrees) पर होते हैं, जिन्हें "पुष्कर अंश" या "पुष्कर नवांश" कहते हैं, तो वे जातक को जीवन भर पोषण, सुरक्षा और विकास प्रदान करते हैं। |