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ज्योतिष पाठ - द्वितीय भाव (Second House)


यदि लग्न 'मनुष्य' है, तो उस मनुष्य के जीने के लिए आवश्यक 'संसाधन' द्वितीय भाव हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे मुख्य रूप से धन स्थान, कुटुंब स्थान और वाणी स्थान कहा जाता है। एक व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि और बात करने का तरीका इसी भाव पर निर्भर करता है।

प्रमुख कारकत्वों का वर्गीकरण

द्वितीय भाव कई विषयों का प्रतिनिधित्व करता है। बेहतर समझ के लिए इन्हें चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

श्रेणी विवरण और कारकत्व
1. धन (Wealth) अर्जित संपत्ति, बैंक बैलेंस (Bank Balance), बचत करने की क्षमता, नकद धन, सोना-चांदी, रत्न और वित्तीय लेनदेन।
नोट: 11वां भाव 'आय' (Income) को दर्शाता है, जबकि 2वां भाव 'संचित धन' (Savings) को।
2. वाणी (Speech) बोलने का तरीका (कोमल या कठोर), वाक्पटुता, सत्य या असत्य बोलना, व्याख्यान शक्ति, वाणी दोष (जैसे हकलाना) और गायन शक्ति।
3. परिवार (Family) परिवार के सदस्यों के साथ संबंध, परिवार का विस्तार, छोटा या बड़ा परिवार, पारिवारिक सुख और खान-पान की आदतें (Food habits)।
4. शरीर (Body Parts) मुख (Face), दाहिनी आंख (Right Eye), जीभ, दांत, नाखून और नाक।

भावात भावम् - सूक्ष्म विश्लेषण

दूसरा भाव जातक के अलावा रिश्तेदारों के बारे में भी जानकारी देता है:

  • प्रथम संतान का करियर: 5वें भाव से 10वां भाव होने के कारण, यह पहली संतान की नौकरी या प्रसिद्धि को दर्शाता है।
  • मित्रों के माता-पिता: 11वें भाव से 4था भाव होने के कारण यह मित्रों के सुख या उनके माता-पिता के बारे में बताता है।
  • शत्रुओं का पराक्रम: 12वें भाव से 3रा भाव होने के कारण यह गुप्त शत्रुओं के भाइयों या उनके साहस को दर्शाता है।

मारक स्थान (Maraka Sthana)

महत्वपूर्ण नोट: ज्योतिष में 2वें और 7वें भाव को 'मारक स्थान' कहा जाता है। जब आयु पूरी हो जाती है, तो इन भावों के स्वामियों की दशा में मृत्यु या गंभीर कष्ट की संभावना होती है।

द्वितीय भाव के अन्य नाम

धन स्थान
कुटुंब स्थान
वाणी स्थान
अर्थ
कोश
स्व



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।