onlinejyotish.com free Vedic astrology portal

ज्योतिष पाठ - दशा-भुक्ति विश्लेषण (Predicting Events)


प्रत्येक महादशा (Main Period) के अंतर्गत पुनः 9 ग्रहों की "अंतर्दशाएं" या "भुक्ति" (Sub-periods) आती हैं। ज्योतिष में सटीक फलित कहने के लिए केवल महादशा को नहीं, बल्कि भुक्ति को भी देखना अनिवार्य है।

सूत्र: यदि महादशा नाथ "राजा" (King) है, तो भुक्ति नाथ "मंत्री" (Minister) के समान है। राजा आदेश देता है, और मंत्री उसका पालन (क्रियान्वयन) करता है। अर्थात, परिणाम भुक्ति नाथ के अनुसार ही प्राप्त होते हैं।

स्थिति (Condition) फल/परिणाम (Result)
मित्र (Friends) यदि दशनाथ और भुक्तिनाथ आपस में मित्र हों (जैसे: सूर्य दशा - गुरु भुक्ति), तो वह समय अत्यंत शुभ होता है। जीवन में उन्नति और मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं।
शत्रु (Enemies) यदि ये दोनों परस्पर शत्रु हों (जैसे: सूर्य दशा - शनि भुक्ति या राहु भुक्ति), तो वह समय संघर्षपूर्ण रहता है। मानसिक अशांति और व्यर्थ की बाधाएं आती हैं।
6-8-12 भावों की स्थिति यदि दशनाथ से भुक्तिनाथ 6, 8, या 12वें भाव में स्थित हो, तो भले ही वे मित्र हों, अशुभ फल या बाधाएं प्राप्त होती हैं। इसे "द्विर्द्वादश" (2/12) या "षडाष्टक" (6/8) दोष कहते हैं।
योगकारक (Yogakaraka) यदि दोनों ग्रह योगकारक हों और कुंडली में केंद्र या त्रिकोण भावों में स्थित हों, तो उस भुक्ति काल में अचानक धन लाभ या पदोन्नति (Promotion) प्राप्त होती है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।