OnlineJyotish.com

ज्योतिष पाठ - विशाखा नक्षत्र (The Star of Purpose)

आकाश मंडल में विशाखा 16वां नक्षत्र है। इसका विस्तार तुला राशि के 20°00' से लेकर वृश्चिक राशि के 3°20' तक है (प्रथम 3 चरण तुला में और अंतिम 1 चरण वृश्चिक में)। इस नक्षत्र के स्वामी गुरु (Jupiter) हैं। इसका प्रतीक "विजय द्वार" (Triumphal Arch) या कुम्हार का चाक है। इसके अधिदेवता इन्द्राग्नि (इन्द्र और अग्नि) हैं। 'विशाखा' का अर्थ है 'विभाजित' या 'शाखाओं वाला'। राधा (श्री कृष्ण की प्रियसी) का संबंध भी इसी नक्षत्र से माना जाता है।

मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics)

  • एकाग्रता और लक्ष्य (Focus): जिस प्रकार कुम्हार का चाक घूमते समय पूर्ण एकाग्रता की मांग करता है, उसी प्रकार विशाखा के जातक अपने लक्ष्य (Goal) के प्रति अत्यंत केंद्रित होते हैं। वे जब तक मंजिल पा नहीं लेते, चैन से नहीं बैठते।
  • दोहरा स्वभाव: इसके देवता इन्द्र (जो भोग और सत्ता के प्रतीक हैं) और अग्नि (जो शुद्धिकरण और तपस्या की प्रतीक है) दोनों हैं। इसलिए इन जातकों में एक ओर सत्ता की चाह होती है, तो दूसरी ओर वे गहरे आध्यात्मिक भी हो सकते हैं।
  • प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा: ये जातक अपने प्रतिद्वंद्वियों पर विजय प्राप्त करने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। कभी-कभी दूसरों की सफलता को देखकर इनमें ईर्ष्या की भावना भी आ सकती है।

नक्षत्र चरणों का फल (Results by Padas)

चरण राशि और नवांश विशेषता
प्रथम चरण तुला (मेष नवांश) व्यापारिक कुशलता, नेतृत्व के गुण और स्वभाव में थोड़ी आक्रामकता। जातक प्रभावशाली होता है।
द्वितीय चरण तुला (वृषभ नवांश) कला, सौंदर्य और भौतिक सुखों के प्रति झुकाव। जातक का व्यक्तित्व आकर्षक होता है।
तृतीय चरण तुला (मिथुन नवांश) बौद्धिक क्षमता, बेहतरीन संचार कौशल (Communication) और लेखन या पत्रकारिता में रुचि।
चतुर्थ चरण वृश्चिक (कर्क नवांश) यहाँ राशि परिवर्तन होता है। जातक भावुक, खोजी और गुप्त विद्याओं का ज्ञाता होता है। चंद्रमा के लिए यह नीच नवांश है, फिर भी गुरु का प्रभाव शुभता देता है।

विशाखा में ग्रहों का प्रभाव

  • गुरु (Jupiter): यह गुरु का अपना नक्षत्र है। जातक को उच्च कोटि का ज्ञान, धार्मिकता और समाज में सम्मानित स्थान प्राप्त होता है।
  • चंद्रमा (Moon): मन में एक निश्चित लक्ष्य रहता है। जातक जिद्दी हो सकता है और अपने सिद्धांतों के लिए किसी से भी टकरा सकता है।
  • शनि (Saturn): लक्ष्य प्राप्ति के लिए जातक को कठिन संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि, विलंब के बाद बड़ी सफलता निश्चित होती है।

जो लोग अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए OnlineJyotish.com Exclusive और Premium जन्मकुंडली प्रदान करता है। 400 से अधिक पृष्ठों वाली इस विस्तृत जन्मकुंडली में प्रत्येक भाव का विश्लेषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, नौकरी एवं करियर, भाग्य और जीवन के उद्देश्य से संबंधित विशेष विश्लेषण, योग, दोष एवं उनके उपायों का संपूर्ण विवरण, षड्वर्ग फल, ग्रह अवस्थाओं के फल, अष्टकवर्ग विश्लेषण एवं फल, विंशोपक बल और उनके परिणाम, 100 वर्षों के दशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतरदशा फल, 100 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के गोचर की तिथियाँ तथा अगले 10 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के विस्तृत गोचर फल सहित अनेक विशेष जानकारियाँ सम्मिलित हैं। यह 400 से अधिक पृष्ठों वाली एक विस्तृत बृहत् जन्मकुंडली है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके कुछ ही क्षणों में अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें।

अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें
नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।