सप्तमांश कुंडली (Saptamsa Chakra - D7)
राशि चक्र (D1) में 5वां भाव संतान का होता है। लेकिन संतान से संबंधित सूक्ष्म बातों (जैसे- संतान प्राप्ति में देरी, उनका स्वास्थ्य, उनका भविष्य और सुख) को जानने के लिए सप्तमांश कुंडली (D7) का विश्लेषण करना अनिवार्य है। इसके अलावा, इसका उपयोग व्यक्ति की सृजनात्मक क्षमता (Creativity) को देखने के लिए भी किया जाता है।
| भाव (House in D7) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| लग्न (प्रथम भाव) | जातक को बच्चों से मिलने वाला सुख। यदि D7 का लग्न मजबूत है, तो व्यक्ति को अपनी संतान से खुशी और सम्मान मिलता है। |
| 5वां भाव (5th House) | प्रथम संतान (First Child)। 5वें भाव और 5वें स्वामी की स्थिति से पहली संतान के स्वास्थ्य और शिक्षा का पता चलता है। |
| 7वां भाव (7th House) | दूसरी संतान (Second Child)। (गणना: 5वें भाव से 3रा भाव = 7वां भाव, क्योंकि छोटा भाई/बहन 3रे भाव से देखा जाता है)। |
| 9वां भाव (9th House) | तीसरी संतान। साथ ही, यह भाव नाती-पोतों (Grandchildren) को भी दर्शाता है। |
| गुरु (Jupiter) | "संतान कारक"। यदि सप्तमांश कुंडली में गुरु नीच राशि में हो या पाप ग्रहों (राहु/केतु/शनि) से पीड़ित हो, तो संतान प्राप्ति में विलंब या कष्ट हो सकता है। |