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ज्योतिष पाठ - षष्ठ भाव (Sixth House)


जीवन में हम जिन चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हैं, उन्हें षष्ठ भाव दर्शाता है। इसे ज्योतिष की भाषा में 'त्रिक स्थान' या 'दुस्थान' (6, 8, 12) कहा जाता है। मुख्य रूप से यह ऋण, रोग और शत्रु का स्थान है। हालांकि, यह एक उपचय स्थान (Growth House) भी है, जिसका अर्थ है कि इन समस्याओं का डटकर सामना करने से जातक का व्यक्तित्व निखरता है।

प्रमुख कारकत्वों का वर्गीकरण

श्रेणी कारकत्व और विवरण
1. स्वास्थ्य और रोग (Health) सभी प्रकार की बीमारियाँ, घाव (Injuries), ऑपरेशन (Surgery) और मानसिक तनाव।
2. ऋण और कानूनी मामले कर्ज लेना, आर्थिक तंगी, कोर्ट केस (Litigation), बदनामी और जेल यात्रा।
3. शत्रु और प्रतिस्पर्धा खुले और गुप्त शत्रु, विरोध, प्रतियोगिताएं और व्यसन (Addictions)।
4. रिश्ते और सेवा (Service) मामा (Maternal Uncle), मौसी, नौकर, कर्मचारी और पालतू जानवर।
व्यवसाय: पुलिस, सेना और चिकित्सा सेवा जैसे क्षेत्र।

भावात भावम् - सूक्ष्म विश्लेषण

  • जीवनसाथी की बीमारी/व्यय: 7वें भाव (जीवनसाथी) से 12वां भाव होने के कारण यह उनके स्वास्थ्य या खर्चों को दर्शाता है।
  • प्रथम संतान का धन: 5वें भाव (संतान) से दूसरा भाव होने के कारण यह पहली संतान की आर्थिक स्थिति बताता है।
  • मित्रों के कष्ट: 11वें भाव (मित्र) से 8वां भाव होने के कारण यह मित्रों के संकट को दर्शाता है।

स्वास्थ्य संकेतक (Medical Astrology)

नोट: कालपुरुष चक्र में कन्या छठी राशि है। यह शरीर में कमर (Waist), छोटी आंत और पाचन तंत्र के निचले हिस्से को नियंत्रित करती है। इस भाव के पीड़ित होने पर अल्सर या हर्निया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

षष्ठ भाव के अन्य नाम

शत्रु स्थान
रोग स्थान
ऋण स्थान
सेवा स्थान



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।