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ज्योतिष पाठ - सप्तम भाव (Seventh House)


यदि लग्न 'स्व' (Self) है, तो उसके ठीक सामने वाला सप्तम भाव 'अन्य' (Others) को दर्शाता है। हमारे जीवन में आने वाले जीवनसाथी, व्यावसायिक साझेदार और समाज के साथ हमारे संबंधों को यह भाव निर्धारित करता है। इसे मुख्य रूप से कलत्र स्थान (Spouse) और काम स्थान (Desires) कहा जाता है। यह एक केंद्र स्थान (Kendra) होने के कारण कुंडली में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रमुख कारकत्वों का वर्गीकरण

श्रेणी कारकत्व और विवरण
1. विवाह और संबंध (Marriage) जीवनसाथी का रूप, गुण और उनका परिवार। वैवाहिक सुख, कामेच्छा और आकर्षण।
2. व्यापार और साझेदारी साझेदारी में व्यापार (Partnerships), क्रय-विक्रय (Trade), अनुबंध (Agreements) और स्वरोजगार।
3. विदेश और यात्राएं विदेश निवास, लंबी यात्राएं और अपने मूल स्थान से दूर जाकर बसना।
4. समाज और कानून सामाजिक प्रतिष्ठा, जनता के साथ संबंध और खुले शत्रु (Open Enemies)।

भावात भावम् - सूक्ष्म विश्लेषण

  • दूसरी संतान: 5वां भाव पहली संतान है, उससे तीसरा भाव (3rd from 5th) सप्तम भाव है।
  • तीसरा भाई/बहन: तीसरे से तीसरा पांचवां और पांचवें से तीसरा सातवां भाव होता है।
  • माता का सुख/वाहन: चौथे भाव (माता) से चौथा भाव होने के कारण यह माता के वाहन सुख को दर्शाता है।
  • पद प्राप्ति: 10वें भाव (राज्य) से 10वां भाव होने के कारण यह राजनीतिक पद और लोकप्रियता को दर्शाता है।

मारक स्थान (Maraka Sthana) - चेतावनी

महत्वपूर्ण नोट: लग्न से 8वां भाव आयु का है। 8वें से 12वां भाव (व्यय) सप्तम भाव होता है। आयु का व्यय करने वाला स्थान होने के कारण 7वें भाव को 'मारक स्थान' कहा जाता है। गंभीर बीमारी के समय इसका सूक्ष्म विश्लेषण आवश्यक है।

सप्तమ भाव के अन्य नाम

कलत्र स्थान
काम स्थान
जामित्र
अस्त स्थान



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।