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ज्योतिष पाठ - द्वादश भाव (Twelfth House)


राशि चक्र में यदि लग्न 'प्रारंभ' है, तो द्वादश भाव 'अंत' है। यह व्यक्ति के जीवन चक्र की पूर्णता को दर्शाता है। हालांकि इसे 'व्यय स्थान' (Expenses) कहा जाता है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से यह सबसे ऊँचा 'मोक्ष स्थान' भी है। भौतिक सुखों से मुक्ति, विदेश प्रवास और मन की शांति (नींद) का निर्णय इसी भाव से होता है।

प्रमुख कारकत्वों का वर्गीकरण

श्रेणी कारकत्व और विवरण
1. व्यय और हानि (Loss) खर्च, निवेश में नुकसान, चोरी या जुर्माना (Fines)।
2. विदेश और एकांत सूनसान जगह, अस्पताल (Hospitals), जेल (Imprisonment), आश्रम और विदेश में बसना (Foreign Settlement)।
3. सुख और शयन नींद की गुणवत्ता (Quality of Sleep), शय्या सुख और मृत्यु के बाद का जीवन (Afterlife)।
4. मोक्ष और आध्यात्मिक पक्ष जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (Moksha), ध्यान, दान-धर्म और त्याग की भावना।

भावात भावम् - सूक्ष्म विश्लेषण

  • जीवनसाथी की बीमारी: 7वें भाव से छठा भाव होने के कारण यह जीवनसाथी के स्वास्थ्य कष्टों को दर्शाता है।
  • संतान की आयु: 5वें भाव (संतान) से 8वां भाव होने के कारण यह बच्चों के संकट को दर्शाता है।
  • पिता की संपत्ति: 9वें भाव (पिता) से चौथा भाव होने के कारण यह उनके सुख या अचल संपत्ति को दर्शाता है।

विपरीत राजयोग (Vipareeta Raja Yoga)

शुभ फल: यदि 6, 8, 12 के स्वामी आपस में राशि परिवर्तन करें या एक-दूसरे के भाव में हों, तो 'विपरीत राजयोग' बनता है। उदाहरण के लिए, यदि 12वां स्वामी छठे में हो, तो शत्रुओं का नाश होता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।