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ज्योतिष पाठ - ग्रहों का अस्त होना (Planetary Combustion)


वैदिक ज्योतिष में जब कोई ग्रह सूर्य (Sun) के बहुत निकट आ जाता है, तो सूर्य के अत्यधिक तेज और प्रताप के कारण वह ग्रह अपनी चमक और प्रभाव खो देता है। इस अवस्था को ज्योतिषीय भाषा में "अस्त होना", "अस्तंगत" या दक्षिण भारत में "मौढ्यमी" कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे Combustion कहते हैं। अस्त हुआ ग्रह एक प्रकार से "असहाय" हो जाता है और अपनी स्वाभाविक शुभता या फल देने की क्षमता में कमी महसूस करता है।

अस्त होने के अंश (Degrees of Combustion)

यदि कोई ग्रह सूर्य के दोनों ओर (आगे या पीछे) इन निश्चित अंशों के भीतर हो, तो वह अस्त माना जाता है:

  • चंद्रमा (Moon): 12 अंश
  • मंगल (Mars): 17 अंश
  • बुध (Mercury): 14 अंश (वक्री होने पर 12 अंश)
  • गुरु (Jupiter): 11 अंश
  • शुक्र (Venus): 10 अंश (वक्री होने पर 8 अंश)
  • शनि (Saturn): 15 अंश

विशेष नोट: राहु और केतु कभी अस्त नहीं होते, क्योंकि वे छाया ग्रह हैं और स्वयं सूर्य को ग्रहण लगाते हैं।

अस्त ग्रहों का जातक पर प्रभाव

अस्त ग्रह का प्रभाव कुंडली के भावों और ग्रह की प्रकृति पर निर्भर करता है। यहाँ सामान्य फल दिए गए हैं:

ग्रह अस्त होने का प्रभाव
बुध (Mercury) बुध अक्सर सूर्य के पास ही रहता है (बुधादित्य योग)। इसलिए बुध का अस्त होना बहुत बुरा नहीं माना जाता। लेकिन यदि यह 2-3 अंशों के भीतर हो, तो जातक को तंत्रिका तंत्र (Nervous system) में कमजोरी या संचार में समस्या हो सकती है।
शुक्र (Venus) वैवाहिक सुख में कमी, अहंकार के कारण रिश्तों में कड़वाहट और रचनात्मकता (Creativity) का कम होना। जातक सुख-सुविधाओं का पूर्ण आनंद नहीं ले पाता।
गुरु (Jupiter) ज्ञान तो होता है लेकिन उसे सामाजिक पहचान नहीं मिलती। संतान प्राप्ति में बाधा या देरी, और भाग्य का साथ मिलने में कठिनाई।
शनि (Saturn) कार्यक्षेत्र में अत्यधिक दबाव और संघर्ष। पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) के बीच वैचारिक मतभेद या कानूनी विवाद की संभावना।
मंगल (Mars) अत्यधिक क्रोध और आक्रामकता (Aggression)। जातक अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग नहीं कर पाता। रक्त या पित्त से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं।
ज्योतिषीय उपाय: चूँकि अस्त ग्रह अपनी शक्ति खो चुका होता है, इसलिए सामान्यतः उसका रत्न (Gemstone) धारण करना लाभदायक नहीं होता (जब तक कि वह योगकारक न हो)। इसके स्थान पर संबंधित ग्रह का जप, दान और उपासना करना अधिक श्रेष्ठ माना गया है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।