नक्षत्र चरण और गण (Nakshatra Padas & Ganas)
प्रत्येक नक्षत्र को 4 बराबर भागों में विभाजित किया गया है। इन्हें
"चरण" या
"पाद" (Padas) कहते हैं।
1 नक्षत्र का मान = 13°20'
1 चरण का मान = 3°20'
कुल 27 नक्षत्र x 4 चरण =
108 चरण। यही 108 संख्या जप माला के 108 मनकों का आधार है और इन्ही चरणों से नवांश कुंडली का निर्माण होता है।
पुरुषार्थ (Purpose of Life)
नक्षत्र का प्रत्येक चरण जीवन के चार मुख्य लक्ष्यों (पुरुषार्थों) में से एक को दर्शाता है:
- प्रथम चरण: धर्म (अग्नि तत्व) - कर्तव्य, नैतिकता और जिम्मेदारी।
- द्वितीय चरण: अर्थ (पृथ्वी तत्व) - धन अर्जन, भौतिक संसाधन और करियर।
- तृतीय चरण: काम (वायु तत्व) - इच्छाएं, संबंध और सामाजिक नेटवर्क।
- चतुर्थ चरण: मोक्ष (जल तत्व) - आध्यात्मिकता, मुक्ति और त्याग।
गण वर्गीकरण (Gana Classification)
गण व्यक्ति के मूल स्वभाव (Temperament) और मानसिक शक्ति को निर्धारित करता है। इसे विवाह मिलान में भी देखा जाता है।
| गण (Gana) | स्वभाव (Nature) | नक्षत्र (Stars) |
|---|---|---|
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देव गण (Divine) |
शांत स्वभाव, दयालु, परोपकारी और बुद्धिमान। ये झगड़ों से दूर रहना पसंद करते हैं। | अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, रेवती। |
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मनुष्य गण (Human) |
व्यावहारिक (Practical)। ये यथार्थवादी होते हैं - अच्छे के साथ अच्छा और बुरे के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। धन अर्जन पर ध्यान देते हैं। | भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद। |
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राक्षस गण (Demonic) |
जिद्दी, आक्रामक, और स्वार्थी हो सकते हैं। लेकिन इनमें अपार ऊर्जा (Energy), साहस और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता होती है। | कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा, शतभिषा। |