चंद्र + राहु/केतु युति (Grahan Yoga)
जब मन का कारक चंद्रमा छाया ग्रह राहु या केतु के साथ होता है, तो इसे "ग्रहण योग" कहा जाता है। राहु चंद्रमा को भ्रमित करता है और केतु उसे विरक्ति की ओर ले जाता है। यह युति जातक की मानसिक स्थिरता और सोचने के तरीके को गहराई से प्रभावित करती है।
| विभाजन | विश्लेषण एवं प्रभाव |
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| मानसिक स्थिति |
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| विशेष शक्ति | इन जातकों के पास अद्भुत "अंतर्दृष्टि" (Intuition) होती है। ये भविष्य की घटनाओं को पहले ही भांपने की क्षमता रखते हैं। ज्योतिष, मनोविज्ञान (Psychology) और गूढ़ रहस्यों की खोज के लिए यह एक वरदान है। |
| चुनौतियां | यदि लग्न या लग्नेश कमजोर हो, तो जातक अवसाद (Depression) या नकारात्मक विचारों में घिरा रह सकता है। राहु के साथ होने पर भ्रम और केतु के साथ होने पर अत्यधिक डिटैचमेंट (Detachment) की समस्या होती है। |
| उपाय (Remedies) | भगवान शिव की आराधना, सोमवार का व्रत और नियमित ध्यान (Meditation) करने से मन को शांति मिलती है और इस दोष का प्रभाव कम होता है। |