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ज्योतिष पाठ - चंद्र ग्रहण योग (Moon-Rahu/Ketu Conjunction)


जब मन का कारक चंद्रमा छाया ग्रह राहु या केतु के साथ होता है, तो इसे "ग्रहण योग" कहा जाता है। राहु चंद्रमा को भ्रमित करता है और केतु उसे विरक्ति की ओर ले जाता है। यह युति जातक की मानसिक स्थिरता और सोचने के तरीके को गहराई से प्रभावित करती है।

विभाजन विश्लेषण एवं प्रभाव
मानसिक स्थिति
  • जातक अक्सर अज्ञात भय, चिंता या फोबिया (Phobia) का शिकार हो सकता है।
  • ये लोग बहुत गहरे विचारक होते हैं और कभी-कभी समाज से कटकर एकांत में रहना पसंद करते हैं।
विशेष शक्ति इन जातकों के पास अद्भुत "अंतर्दृष्टि" (Intuition) होती है। ये भविष्य की घटनाओं को पहले ही भांपने की क्षमता रखते हैं। ज्‍योतिष, मनोविज्ञान (Psychology) और गूढ़ रहस्यों की खोज के लिए यह एक वरदान है।
चुनौतियां यदि लग्न या लग्नेश कमजोर हो, तो जातक अवसाद (Depression) या नकारात्मक विचारों में घिरा रह सकता है। राहु के साथ होने पर भ्रम और केतु के साथ होने पर अत्यधिक डिटैचमेंट (Detachment) की समस्या होती है।
उपाय (Remedies) भगवान शिव की आराधना, सोमवार का व्रत और नियमित ध्यान (Meditation) करने से मन को शांति मिलती है और इस दोष का प्रभाव कम होता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।