चंद्र + शनि की युति (Visha Yoga / Punarphoo)
चंद्रमा "मन" का कारक है और शनि "अनुशासन व दुःख" का। जब ये दोनों एक साथ होते हैं, तो इसे "विष योग" या "पुनरफू दोष" कहा जाता है। यह युति जातक को बहुत गंभीर और कभी-कभी मानसिक रूप से अशांत बनाती है, लेकिन इसके कुछ बहुत ही गहरे सकारात्मक पहलू भी हैं।
| पहलू | विश्लेषण एवं प्रभाव |
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| व्यवसाय एवं स्वभाव |
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| चुनौतियां | जातक अक्सर अवसाद (Depression) या अकेलेपन का अनुभव कर सकता है। शनि के प्रभाव के कारण जीवन में हर महत्वपूर्ण कार्य (जैसे विवाह) में विलंब की संभावना रहती है। |
| सकारात्मक पक्ष | आध्यात्मिक साधना के लिए यह सर्वोत्तम योग है। शनि मन को नियंत्रित करने की शक्ति देता है। ये जातक बड़े से बड़े संकट को धैर्य से सहने की क्षमता (Stoicism) रखते हैं। आमतौर पर 30 वर्ष की आयु के बाद इनका जीवन अधिक स्थिर होता है। |
| पुनरफू दोष | यदि यह युति विवाह भाव से जुड़ी हो, तो सगाई का टूटना या विवाह संबंधी बातचीत में बार-बार बाधा आना संभव है। |