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ज्योतिष पाठ - विष योग (Visha Yoga)

चंद्रमा "मन" का कारक है और शनि "अनुशासन व दुःख" का। जब ये दोनों एक साथ होते हैं, तो इसे "विष योग" या "पुनरफू दोष" कहा जाता है। यह युति जातक को बहुत गंभीर और कभी-कभी मानसिक रूप से अशांत बनाती है, लेकिन इसके कुछ बहुत ही गहरे सकारात्मक पहलू भी हैं।

पहलू विश्लेषण एवं प्रभाव
व्यवसाय एवं स्वभाव
  • ये जातक बहुत व्यावहारिक (Practical) होते हैं। ये हवा में महल नहीं बनाते।
  • ऐसे लोग उत्कृष्ट वैज्ञानिक, शोधकर्ता (Researchers), माइनिंग इंजीनियर या सन्यासी हो सकते हैं।
  • ये लोग एकांत में रहकर बड़े और अद्भुत कार्य करने में सक्षम होते हैं।
चुनौतियां जातक अक्सर अवसाद (Depression) या अकेलेपन का अनुभव कर सकता है। शनि के प्रभाव के कारण जीवन में हर महत्वपूर्ण कार्य (जैसे विवाह) में विलंब की संभावना रहती है।
सकारात्मक पक्ष आध्यात्मिक साधना के लिए यह सर्वोत्तम योग है। शनि मन को नियंत्रित करने की शक्ति देता है। ये जातक बड़े से बड़े संकट को धैर्य से सहने की क्षमता (Stoicism) रखते हैं। आमतौर पर 30 वर्ष की आयु के बाद इनका जीवन अधिक स्थिर होता है।
पुनरफू दोष यदि यह युति विवाह भाव से जुड़ी हो, तो सगाई का टूटना या विवाह संबंधी बातचीत में बार-बार बाधा आना संभव है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।