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ज्योतिष पाठ - ग्रह अवस्थाएं (Baladi Avasthas)


जिस प्रकार मनुष्य के जीवन में बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था होती है, उसी प्रकार कुंडली के ग्रहों की भी अपनी एक आयु होती है। यह आयु इस बात पर निर्भर करती है कि वह ग्रह राशि के कितने "अंशों" (Degrees) पर स्थित है। कई बार हम देखते हैं कि कोई ग्रह उच्च का है, लेकिन वह शुभ फल नहीं दे रहा; इसका मुख्य कारण उसकी "मृत" या "वृद्ध" अवस्था हो सकती है। इसलिए फलकथन से पहले ग्रहों की अवस्था देखना अनिवार्य है।

विषम राशियाँ (Odd Signs: मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ)

विषम राशियों में ग्रहों की अवस्था शून्य से प्रारंभ होकर आगे बढ़ती है:

अंश (Degrees) अवस्था (State) फल (Strength)
0° - 6° बाल्यावस्था (Infant) 25% फल (अल्प बल)
6° - 12° कुमारावस्था (Boy) 50% फल (मध्यम बल)
12° - 18° युवावस्था (Adolescent) 100% फल (पूर्ण प्रभावी)
18° - 24° वृद्धावस्था (Old) नगण्य या बहुत कम फल
24° - 30° मृतावस्था (Dead) 0% फल (प्रभावहीन)

सम राशियाँ (Even Signs: वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन)

सम राशियों में यह क्रम विषम राशियों के ठीक विपरीत (Reverse) हो जाता है:

अंश (Degrees) अवस्था (State) फल (Strength)
0° - 6° मृतावस्था (Dead) 0% फल
6° - 12° वृद्धावस्था (Old) बहुत कम फल
12° - 18° युवावस्था (Adolescent) 100% फल (सर्वश्रेष्ठ)
18° - 24° कुमारावस्था (Boy) 50% फल
24° - 30° बाल्यावस्था (Infant) 25% फल
महत्वपूर्ण सूत्र: 12 से 18 अंशों के बीच स्थित "युवावस्था" का ग्रह सबसे अधिक शक्तिशाली होता है। यदि कोई राजयोग कारक ग्रह युवावस्था में हो, तो जातक को कम आयु में ही बड़ी सफलता प्राप्त होती है। यदि कोई शुभ ग्रह मृत अवस्था में हो, तो उसके बल को बढ़ाने के लिए रत्न धारण करना शास्त्र सम्मत माना गया है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।