OnlineJyotish.com

ज्योतिष पाठ - परिवर्तन योग (Exchange of Signs)

जब दो ग्रह एक-दूसरे की राशि में स्थित होते हैं, तो उसे "परिवर्तन योग" कहा जाता है। यह योग बहुत शक्तिशाली होता है क्योंकि इसमें दोनों ग्रह एक-दूसरे के कार्यों में पूर्ण सहयोग करते हैं। फलित ज्योतिष में इसके तीन मुख्य प्रकार हैं:

योग का नाम प्रभाव और परिणाम
1. महा परिवर्तन योग केंद्र (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण (1, 5, 9) के स्वामियों के बीच होने वाला परिवर्तन। यह एक श्रेष्ठ राजयोग है। जातक धनी, भाग्यशाली और समाज में उच्च पद प्राप्त करने वाला होता है।
2. खल परिवर्तन योग तृतीय भाव (3) के स्वामी का अन्य शुभ भावों के स्वामियों के साथ परिवर्तन। इसके परिणाम मिश्रित होते हैं। जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है, लेकिन अंततः संघर्ष के बाद विजय मिलती है।
3. दैन्य परिवर्तन योग दुस्थान (6, 8, 12) के स्वामियों का अन्य शुभ भावों के स्वामियों के साथ परिवर्तन। यह शुभ नहीं माना जाता। जातक को मेहनत का फल नहीं मिलता और स्वास्थ्य या शत्रुओं के कारण परेशानियाँ बनी रहती हैं।

जो लोग अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए OnlineJyotish.com Exclusive और Premium जन्मकुंडली प्रदान करता है। 400 से अधिक पृष्ठों वाली इस विस्तृत जन्मकुंडली में प्रत्येक भाव का विश्लेषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, नौकरी एवं करियर, भाग्य और जीवन के उद्देश्य से संबंधित विशेष विश्लेषण, योग, दोष एवं उनके उपायों का संपूर्ण विवरण, षड्वर्ग फल, ग्रह अवस्थाओं के फल, अष्टकवर्ग विश्लेषण एवं फल, विंशोपक बल और उनके परिणाम, 100 वर्षों के दशा, अंतर्दशा एवं प्रत्यंतरदशा फल, 100 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के गोचर की तिथियाँ तथा अगले 10 वर्षों के गुरु, शनि, राहु और केतु के विस्तृत गोचर फल सहित अनेक विशेष जानकारियाँ सम्मिलित हैं। यह 400 से अधिक पृष्ठों वाली एक विस्तृत बृहत् जन्मकुंडली है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके कुछ ही क्षणों में अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें।

अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली प्राप्त करें
नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।