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ज्योतिष पाठ - परिवर्तन योग (Exchange of Signs)


जब दो ग्रह एक-दूसरे की राशि में स्थित होते हैं, तो उसे "परिवर्तन योग" कहा जाता है। यह योग बहुत शक्तिशाली होता है क्योंकि इसमें दोनों ग्रह एक-दूसरे के कार्यों में पूर्ण सहयोग करते हैं। फलित ज्योतिष में इसके तीन मुख्य प्रकार हैं:

योग का नाम प्रभाव और परिणाम
1. महा परिवर्तन योग केंद्र (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण (1, 5, 9) के स्वामियों के बीच होने वाला परिवर्तन। यह एक श्रेष्ठ राजयोग है। जातक धनी, भाग्यशाली और समाज में उच्च पद प्राप्त करने वाला होता है।
2. खल परिवर्तन योग तृतीय भाव (3) के स्वामी का अन्य शुभ भावों के स्वामियों के साथ परिवर्तन। इसके परिणाम मिश्रित होते हैं। जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है, लेकिन अंततः संघर्ष के बाद विजय मिलती है।
3. दैन्य परिवर्तन योग दुस्थान (6, 8, 12) के स्वामियों का अन्य शुभ भावों के स्वामियों के साथ परिवर्तन। यह शुभ नहीं माना जाता। जातक को मेहनत का फल नहीं मिलता और स्वास्थ्य या शत्रुओं के कारण परेशानियाँ बनी रहती हैं।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।