गुरु + शनि की युति (Dharma-Karma / Brahma Yoga)
गुरु "धर्म और ज्ञान" है, जबकि शनि "कर्म और अनुशासन"। जब ये दोनों ग्रह एक साथ होते हैं, तो इसे "धर्म-कर्माधिपति योग" या "ब्रह्म योग" कहा जाता है। यह युति जातक को बहुत ही परिपक्व (Mature) और जिम्मेदार बनाती है। ऐसे लोग जीवन में जो भी सफलता पाते हैं, वह उनके कड़े परिश्रम और सही मार्ग का परिणाम होती है।
| पहलु | विश्लेषण एवं प्रभाव |
|---|---|
| व्यवसाय एवं करियर |
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| स्वभाव | ये लोग बहुत ही गंभीर और व्यावहारिक (Practical) होते हैं। ये हवाई बातें नहीं करते, बल्कि "काम करने पर ही फल मिलता है" में विश्वास रखते हैं। |
| जीवन की गति | इन जातकों का जीवन धीरे-धीरे शुरू होता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ये बहुत ऊँचे स्तर पर पहुँच जाते हैं। |
| परिवर्तन (Transformation) | यदि शनि गुरु को प्रभावित करे, तो व्यक्ति अपने ज्ञान (Guru) का उपयोग करियर (Saturn) के लिए करता है (जैसे- टीचर)। यदि गुरु शनि को प्रभावित करे, तो व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र (Saturn) में धर्म (Guru) का पालन करता है (जैसे- ईमानदार अधिकारी)। |