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ज्योतिष पाठ - शतभिषा नक्षत्र (The Veiling Star)


राशि चक्र में शतभिषा 24वां नक्षत्र है (6°40' - 20°00' कुंभ राशि)। यह पूर्ण रूप से कुंभ राशि के भीतर स्थित है। इस नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। इसका प्रतीक "खाली वृत्त" (Empty Circle) या 'सौ फूल/तारे' है। इसके अधिष्ठाता देव वरुण देव (सागर और ब्रह्मांडीय जल के देवता) हैं। 'शतभिषा' का अर्थ है 'सौ वैद्य' (Hundred Physicians), जो इसकी अपार उपचार शक्ति को दर्शाता है।

मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics)

  • चिकित्सा शक्ति (Healing): इस नक्षत्र के जातकों में असाध्य रोगों को भी ठीक करने की प्राकृतिक शक्ति होती है। ये जातक महान डॉक्टर, हीलर या शोधकर्ता (Researchers) बनते हैं।
  • रहस्यमयी स्वभाव (Secrecy): खाली वृत्त 'माया' और गोपनीयता का प्रतीक है। ये जातक अपने मन की बात जल्दी किसी को नहीं बताते और इन्हें एकांत प्रिय होता है। ये अच्छे जासूस या डिेक्टिव बन सकते हैं।
  • व्यसन के प्रति सावधानी (Addiction): राहु और वरुण (मदिरा के कारक) के प्रभाव के कारण इन जातकों में व्यसनों (Drugs/Alcohol) की ओर झुकाव होने की संभावना रहती है। इन्हें आत्म-नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए।

नक्षत्र चरणों का फल (Results by Padas)

चरण नवांश राशि विशेषता
प्रथम चरण धनु (गुरु) आशावादी दृष्टिकोण, दर्शनशास्त्र, ज्योतिष और धर्म में गहरी रुचि।
द्वितीय चरण मकर (शनि) व्यावहारिक सोच, महत्वाकांक्षा और कॉर्पोरेट जगत में सफलता। जातक अनुशासित होता है।
तृतीय चरण कुंभ (शनि) वर्गोत्तम। अद्भुत वैज्ञानिक ज्ञान। खगोल शास्त्र (Astronomy) और विमानन (Aviation) के लिए श्रेष्ठ।
चतुर्थ चरण मीन (गुरु) हीलिंग, कल्पनाशीलता, फिल्म जगत और समुद्री यात्राओं में रुचि। स्वभाव परोपकारी होता है।

शतभिषा में ग्रहों का प्रभाव

  • राहु (Rahu): यह राहु का अपना नक्षत्र है। जातक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए आविष्कार (Inventions) करने की क्षमता रखता है।
  • शनि (Saturn): जातक गंभीर और खोजी स्वभाव का होता है। ये पुरानी या जटिल बीमारियों पर शोध करने में सफल होते हैं।
  • चंद्रमा (Moon): जातक बहुत संवेदनशील होता है। इनमें गजब का अंतर्ज्ञान (Intuition) होता है, लेकिन कभी-कभी मानसिक तनाव या अवसाद (Depression) की स्थिति बन सकती है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।