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ज्योतिष पाठ - ग्रहण योग (Sun-Rahu/Ketu Conjunction)


ज्योतिष में सूर्य को "आत्मा" और "जीवन शक्ति" माना गया है। जब सूर्य राहु या केतु के साथ बैठता है, तो इसे "ग्रहण योग" कहा जाता है। यह योग जातक के आत्मविश्वास को प्रभावित करता है और पिता के साथ संबंधों में दूरियां ला सकता है।

पहलु विश्लेषण एवं प्रभाव
आधुनिक प्रभाव
  • ऐसे जातक अपनी स्वयं की पहचान (Identity) को लेकर उलझन में रहते हैं।
  • शोध (Research), चिकित्सा, या ज्योतिष के क्षेत्र में ये लोग बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
  • किसी के अधीन कार्य करना (Boss के नीचे) इनके लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
व्यक्तित्व जातक स्वभाव से अंतर्मुखी (Introvert) हो सकता है और अक्सर हीन भावना (Inferiority Complex) का शिकार हो जाता है।
उपाय (Remedies)
  • प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करना अत्यंत लाभकारी है।
  • पिता का सम्मान करना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना इस दोष की शांति में सहायक होता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।