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ज्योतिष पाठ - सूर्य और गुरु की युति (Sun-Jupiter Conjunction)


ज्योतिष में सूर्य को "आत्मा" और गुरु को "जीव" माना गया है, इसलिए इस युति को "जीवात्मा योग" या "शिवराज़ योग" भी कहा जाता है। यह अत्यंत सात्विक और प्रभावशाली युति है, जो व्यक्ति को समाज में उच्च स्थान, धार्मिकता और महान प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

प्रमुख पहलू विश्लेषण एवं फल
स्वभाव एवं व्यक्तित्व
  • जातक के विचार बहुत शुद्ध और ऊँचे होते हैं।
  • इन्हें ज्ञान बांटना और दूसरों का मार्गदर्शन करना पसंद होता है।
  • समाज में एक सलाहकार या गुरु के रूप में पहचाने जाते हैं।
दग्ध योग (Combustion) यदि गुरु सूर्य के बहुत करीब होकर "अस्त" हो जाए, तो ज्ञान होने के बावजूद पहचान मिलने में देरी हो सकती है। संतान से संबंधित छोटी परेशानियां हो सकती हैं (क्योंकि गुरु पुत्र कारक है), लेकिन गुरु का "जीव" तत्व कभी नष्ट नहीं होता।
सर्वश्रेष्ठ स्थान मेष, सिंह, धनु, मीन और कर्क राशियों में यह योग प्रबल होता है। लग्न, 5वें, 9वें (धर्म स्थान) या 10वें भाव में होना अत्यंत भाग्यशाली है।
सामाजिक स्थिति ऐसे जातक अक्सर धार्मिक संस्थानों, शिक्षा संस्थानों या सरकार में बड़े सलाहकार पदों पर देखे जाते हैं।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।