ग्रहों के कारकत्व - गुरु और शुक्र
नवग्रहों में दो गुरु हैं। एक देव गुरु बृहस्पति (Jupiter) हैं, तो दूसरे दैत्य गुरु शुक्र (Venus)। दोनों ही शुभ ग्रह हैं और ज्ञान के प्रदाता हैं। जहाँ गुरु 'धर्म' और 'विवेक' (Wisdom) सिखाते हैं, वहीं शुक्र 'भोग' (Luxury) और जीवन जीने की कला प्रदान करते हैं।
1. गुरु (Jupiter/Guru) - "धन और पुत्र कारक"
स्वभाव: सर्वाधिक शुभ ग्रह, सात्विक गुण, आकाश तत्व। गुरु ज्ञान, धन और संतान के कारक हैं।
| श्रेणी | कारकत्व |
|---|---|
| व्यक्तिगत (Personal) | बुद्धि, विवेक (Wisdom), स्मृति, धर्म, दया, सत्य, शांति, आशावाद और बड़ों का सम्मान। |
| शारीरिक (Body) | वसा (Fat), यकृत (Liver), जांघें (Thighs), कान, मस्तिष्क की शक्ति और धमनियां। |
| सामाजिक और करियर | संतान, बड़े भाई, शिक्षक, न्यायाधीश (Judges), बैंकर, पुजारी और मंत्री। |
| वस्तुएं और अन्य | सोना (Gold), धन, पीला रंग, ईशान कोण, वेद और मीठे खाद्य पदार्थ। |
2. शुक्र (Venus/Shukra) - "कलत्र कारक"
स्वभाव: शुभ ग्रह, रजोगुण, जल तत्व। शुक्र प्रेम, विवाह और ललित कलाओं के कारक हैं।
| श्रेणी | कारकत्व |
|---|---|
| व्यक्तिगत (Personal) | प्रेम, काम (Desire), आकर्षण, कलात्मक दृष्टि, विलासिता (Luxury) और सुख की कामना। |
| शारीरिक (Body) | वीर्य/अंडकोष, गुर्दे, चेहरे की चमक, सुंदर आंखें और स्वर (Voice)। |
| सामाजिक और करियर | पत्नी (पुरुष की कुंडली में), कलाकार, अभिनेता, संगीतकार, वाहन व्यापारी और स्त्रियां। |
| वस्तुएं और अन्य | हीरा (Diamond), चांदी, वाहन, इत्र (Perfumes), रेशमी वस्त्र और आग्नेय दिशा। |