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ज्योतिष पाठ - वक्र ग्रह (Retrograde Planets)

वक्री या वक्र ग्रह का अर्थ है वह ग्रह जो पृथ्वी से देखने पर पीछे की ओर चलता हुआ प्रतीत हो। ज्योतिष शास्त्र में वक्री ग्रहों को चेष्टा बल (Chesta Bala) प्राप्त होता है, जिससे वे सामान्य से कई गुना अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं।

[Image explaining retrograde motion of planets in the sky - onlinejyotish]
पहलु विश्लेषण एवं प्रभाव
असाधारण बल वक्री ग्रह को बहुत बलि माना जाता है। ऐसे ग्रह जातक को "असाधारण और अनपेक्षित परिणाम" (Unpredictable) देते हैं। उदाहरण के लिए, वक्री शनि जातक को अत्यधिक जिद्दी और वक्री मंगल प्रचंड ऊर्जा देता है।
कर्म सिद्धांत वक्री ग्रह हमारे "पूर्व जन्म के अधूरे कार्यों" (Pending Karma) को दर्शाते हैं। जातक को उस ग्रह से संबंधित क्षेत्रों में जीवन में बार-बार प्रयास (Repetitive events) करने पड़ते हैं।
व्यवहार वक्री ग्रह वाले जातक अक्सर भीड़ से अलग सोचने वाले होते हैं। वे पारंपरिक तरीकों को छोड़कर नए और कभी-कभी अजीब तरीकों से समस्याओं को हल करने की कोशिश करते हैं।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।