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ज्योतिष पाठ - ग्रहों की अवस्थाएँ (Exaltation & Debilitation)

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ज्योतिष में परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि ग्रह किस राशि में बैठा है। एक ग्रह अपने घर की तुलना में उच्च राशि में अधिक शक्तिशाली होता है। इसके विपरीत, नीच राशि में वह अपनी शक्ति खो देता है।

ग्रहों के बल का वर्गीकरण

  1. स्वक्षेत्री: ग्रह का अपने ही घर में होना (आरामदायक स्थिति)।
  2. मूलत्रिकोण: अपने घर से भी अधिक बलवान स्थिति।
  3. उच्च: ग्रह की सबसे शक्तिशाली और शुभ स्थिति।
  4. नीच: ग्रह की सबसे कमजोर स्थिति।

नवग्रहों की उच्च-नीच तालिका

ग्रह उच्च राशि (डिग्री) नीच राशि (डिग्री) मूलत्रिकोण
सूर्यमेष (10°)तुला (10°)सिंह
चंद्रवृषभ (3°)वृश्चिक (3°)वृषभ
मंगलमकर (28°)कर्क (28°)मेष
बुधकन्या (15°)मीन (15°)कन्या
गुरुकर्क (5°)मकर (5°)धनु
शुक्रमीन (27°)कन्या (27°)तुला
शनितुला (20°)मेष (20°)कुंभ

महत्वपूर्ण सूत्र: 180 डिग्री का नियम

विशेष सूत्र: कोई ग्रह जिस राशि में उच्च का होता है, ठीक उससे 7वीं राशि (180 डिग्री दूर) में वह नीच का हो जाता है। उदाहरण के लिए, सूर्य मेष (पहली राशि) में उच्च का है, तो वह तुला (7वीं राशि) में नीच का होगा।



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