मंगल + शनि की युति (Agni Maruta Yoga)
जब मंगल (अग्नि) और शनि (वायु/कर्म) एक साथ होते हैं, तो ज्योतिष में इसे "अग्नि मारुत योग" कहा जाता है। जिस प्रकार हवा अग्नि को और अधिक भड़का देती है, उसी प्रकार यह युति जातक के भीतर असीमित शक्ति और कभी न थकने वाली ऊर्जा पैदा करती है। यह युति तकनीकी और चुनौतीपूर्ण कार्यों के लिए अद्भुत है, लेकिन व्यक्तिगत शांति के लिए कठिन मानी जाती है।
[Image: Agni Maruta Yoga representing technical prowess and struggle - onlinejyotish]| पहलु | विश्लेषण एवं प्रभाव |
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| शास्त्रीय फल (Classical) |
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| आधुनिक विश्लेषण (Modern) |
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| विशेष प्रभाव | यदि यह युति 3, 6, 10, 11 (उपचय) भावों में हो, तो जातक को शत्रुओं पर विजय दिलाती है और अपराजित बनाती है। लेकिन यदि यह 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो कानूनी मामले और पारिवारिक विवादों का कारण बनती है। |