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ज्योतिष पाठ - श्रापित योग (Saturn-Rahu/Ketu Conjunction)

शनि "कर्मफल दाता" है और राहु "छाया ग्रह"। जब ये दोनों एक साथ होते हैं, तो इसे "श्रापित दोष" कहा जाता है। यह युति जीवन में कड़ा संघर्ष देती है, लेकिन तकनीकी दृष्टि से व्यक्ति को बहुत बुद्धिमान भी बनाती है।

संयोजन (Combination) विश्लेषण एवं प्रभाव
शनि + राहु
(Saturn-Rahu)
  • श्रापित दोष: जातक को ऐसा महसूस हो सकता है कि वह बिना किसी कारण के जीवन में कठिनाइयां झेल रहा है। "मैं इतनी मेहनत क्यों कर रहा हूँ?" जैसे सवाल मन में आते हैं।
  • करियर: तकनीकी क्षेत्र, कोडिंग, मशीनों के साथ काम करने में ये लोग जीनियस होते हैं। सूक्ष्म यंत्रों की मरम्मत में निपुण होते हैं।
शनि + केतु
(Saturn-Ketu)
  • मोक्ष मार्ग: जातक एकांत प्रिय होता है। सांसारिक सुखों के प्रति वैराग्य की भावना आ सकती है।
  • प्रभाव: यह सन्यास के लिए एक अनुकूल योग है। व्यक्ति अपने कर्मों को गहराई से समझने की कोशिश करता है।
उपाय (Remedies) भगवान शिव का रुद्राभिषेक या कालभैरव की आराधना करना श्रेष्ठ है। गरीबों, असहायों और विकलांगों की सेवा करने से श्रापित दोष का प्रभाव कम होता है।

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नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।