विपरीत राजयोग (Vipareeta Raja Yoga)
विपरीत राजयोग छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामियों से जुड़ी पारंपरिक व्याख्या है। इन भावों को दुस्थान कहते हैं। इसका मुख्य विषय कठिन परिस्थिति में अवसर खोजना है। योग की शर्तें ग्रंथ और परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं, इसलिए उपयोग की गई परिभाषा लिखें।
| योग का नाम | परिणाम एवं प्रभाव |
|---|---|
| हर्ष योग (6वें का स्वामी 6, 8, 12 में) |
परंपरा में बाधाओं और प्रतियोगिता का सामना करने से जोड़ा जाता है। इससे स्वास्थ्य या मुकदमे का परिणाम तय नहीं होता। |
| सरल योग (8वें का स्वामी 6, 8, 12 में) |
अनिश्चितता और साझा संसाधनों में बदलाव से जोड़ा जाता है। इससे आयु या लॉटरी जीतने का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। |
| विमल योग (12वें का स्वामी 6, 8, 12 में) |
खर्च में संयम और स्वतंत्रता से जोड़ा जाता है। यह किसी का चरित्र या धन तय नहीं करता। |
| महत्वपूर्ण शर्त | लग्नेश, भाव स्वामित्व, दृष्टि और दशा साथ देखें। कमजोर लग्न को जीवन भर की कठिनाइयों का फैसला न मानें। |
अभ्यास: एक उदाहरण कुंडली में छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी तथा उनकी स्थितियाँ लिखें। योग का नाम तय करने से पहले अपने ग्रंथ की शर्तों से तुलना करें।