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ज्योतिष पाठ - विपरीत राजयोग (Success after Struggle)


सामान्यतः कुंडली के 6, 8 और 12वें भावों को अशुभ माना जाता है। लेकिन यदि इन भावों के स्वामी (Lords) स्वयं इन्हीं भावों में स्थित हों या आपस में युति/दृष्टि संबंध बनाएं, तो विपरीत राजयोग का निर्माण होता है। इसका अर्थ है कि जातक को दूसरों के नुकसान या कठिन परिस्थितियों से लाभ मिलता है।

योग का नाम परिणाम एवं प्रभाव
हर्ष योग
(6वें का स्वामी 6, 8, 12 में)
जातक शत्रुहंता होता है। इनका स्वास्थ्य उत्तम रहता है और ये कठिन प्रतियोगिताओं में विजयी होते हैं। इन्हें समाज में यश और धन की प्राप्ति होती है।
सरल योग
(8वें का स्वामी 6, 8, 12 में)
लंबी आयु और निडर स्वभाव। ऐसे जातक जोखिम लेकर बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं। इन्हें बीमा, वसीयत या आकस्मिक माध्यमों से धन लाभ होता है।
विमल योग
(12वें का स्वामी 6, 8, 12 में)
जातक मितव्ययी (बचत करने वाला) और स्वतंत्र विचारों वाला होता है। ये लोग विदेश में धन अर्जित करते हैं और इनका चरित्र बहुत ही निष्कलंक होता है।
महत्वपूर्ण शर्त विपरीत राजयोग का फल तभी मिलता है जब लग्नेश (Lagna Lord) कुंडली में बलवान हो। यदि लग्न कमजोर है, तो यह योग केवल संघर्ष ही देता है।



नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।