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ज्योतिष पाठ - गुरु बल (Guru Balam)


गोचर में जब देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) आपकी जन्म राशि (चंद्रमा) से कुछ विशिष्ट भावों में भ्रमण करते हैं, तो उस स्थिति को "गुरु बल" प्राप्त होना कहते हैं। यदि गुरु की कृपा (बल) हो, तो जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। इसीलिए विवाह आदि शुभ कार्यों का मुहूर्त निकालते समय "गुरु बल" की विशेष रूप से जांच की जाती है।

भाव (चंद्रमा से) शुभ फल (Results)
द्वितीय भाव
(धन स्थान)
धन लाभ, पारिवारिक सुख, वाणी में प्रभाव। विवाह तय करने के लिए यह अत्यंत उत्तम समय है।
पंचम भाव
(पुत्र/विद्या स्थान)
संतान प्राप्ति, नए विचारों का उदय, प्रेम संबंधों में सफलता, और विद्यार्थियों के लिए स्वर्णिम काल। (मूर्ति निर्णय शुभ होना चाहिए)।
सप्तम भाव
(कलत्र स्थान)
विवाह संपन्न होना, साझेदारी (Partnership) के व्यापार में लाभ, यात्राएं। गोचर में गुरु का चंद्रमा को देखना (गजकेसरी योग समान) शुभ होता है।
नवम भाव
(भाग्य स्थान)
यह गुरु के लिए सर्वश्रेष्ठ गोचर माना जाता है। प्रबल भाग्योदय, विदेश यात्रा, तीर्थ दर्शन, और पैतृक संपत्ति का लाभ।
एकादश भाव
(लाभ स्थान)
मनोकामनाओं की पूर्ति, पदोन्नति (Promotion), और आर्थिक रूप से जीवन की सर्वोच्च स्थिति।

यदि गुरु बल न हो तो क्या करें?

जब गुरु गोचर में 1, 3, 4, 6, 8, 10, या 12वें भाव में होते हैं, तो माना जाता है कि "गुरु बल" नहीं है। ऐसी स्थिति में दैव आराधना (विष्णु सहस्रनाम आदि) करनी चाहिए। यदि आपकी जन्म कुंडली में वर्तमान "दशा-भुक्ति" (Dasha Strength) मजबूत है, तो गोचर कमजोर होने पर भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। केवल गोचर के आधार पर शुभ कार्यों को रोकना नहीं चाहिए, दशा का विश्लेषण भी अनिवार्य है।




नोट: इस वेबसाइट पर त्योहारों और ग्रहण की तिथियों की गणना स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और दृक सिद्धांत के आधार पर की गई है। यहां दर्शाए गए समय आपके चुने गए शहर के अक्षांश और देशांतर के अनुसार समायोजित किए गए हैं, जिसमें सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की गणना टोपोसेंट्रिक (topocentric) निर्देशांकों का उपयोग करके की गई है। क्षेत्रीय परंपराओं या स्थानीय पंचांग की भिन्नताओं के कारण इसमें मामूली अंतर आ सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में, कृपया अपने स्थानीय पंचांग या पारिवारिक पुरोहित (पंडित जी) से पुष्टि अवश्य कर लें।